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High Court: कर्नाटक हाईकोर्ट ने जाति सर्वे रोकने से किया इनकार, कहा- आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाने चाहिए

Thu, 25 Sep 2025 05:56 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 25 Sep 2025 05:56 PM IST
सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने जाति सर्वेक्षण रोकने से इनकार करते हुए इसे स्वैच्छिक और गोपनीय रखने का आदेश दिया। वहीं, राज्य सरकार ने ड्यूटी से गायब अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया। 22 सितंबर से शुरू यह सर्वे सात अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें 1.75 लाख गणनाकर्मी दो करोड़ घरों में सात करोड़ से ज्यादा लोगों को कवर करेंगे।

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Karnataka High Court refused to stop caste survey said data should not be made public
कर्नाटक हाईकोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को चल रहे सामाजिक एवं शैक्षणिक सर्वेक्षण, जिसे आमतौर पर जाति सर्वे कहा जा रहा है, पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि सर्वे स्वैच्छिक होना चाहिए और एकत्र किए गए आंकड़े किसी भी सूरत में सार्वजनिक नहीं किए जाने चाहिए। साथ ही, सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि डेटा पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखा जाए।
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मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू और न्यायमूर्ति सी एम जोशी की खंडपीठ ने कहा कि सर्वेक्षण रोकने की कोई वजह नहीं है। हालांकि, अदालत ने कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को यह आदेश दिया कि जनता को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि यह सर्वे वैकल्पिक है और कोई भी नागरिक जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं है।
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सरकार की सख्ती का एलान
इसी बीच, कर्नाटक सरकार ने साफ किया है कि सर्वेक्षण कार्य में लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच के पाटिल ने बताया कि बंगलूरू महानगर क्षेत्र में कार्रवाई का अधिकार जीबीए कमिश्नर को सौंपा गया है। जिलों में आदेश डीसी और जिला पंचायत सीईओ तक पहुंचाए जाएंगे।
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तकनीकी खामियों से प्रभावित रफ्तार
22 सितंबर से शुरू हुआ यह सर्वेक्षण सात अक्तूबर तक चलेगा। पहले दो दिन सर्वर और नेटवर्क की दिक्कतों ने गणनाकर्मियों को परेशान किया। कई जगह ऐप से ओटीपी न जनरेट होने और नेटवर्क की समस्या आई। साथ ही, कुछ गणनाकर्मियों को समय पर हैंडबुक न मिलने से प्रक्रिया धीमी हुई। हालांकि, मंत्री पाटिल का कहना है कि अब स्थिति में सुधार है।

इतिहास का सबसे बड़ा सर्वे
करीब 1.75 लाख गणनाकर्मी, जिनमें अधिकतर सरकारी शिक्षक शामिल हैं, पूरे राज्य के लगभग दो करोड़ घरों में जाकर सात करोड़ से ज्यादा लोगों को कवर करेंगे। इस सर्वे का बजट 420 करोड़ रुपये है और इसमें 60 सवालों की प्रश्नावली तैयार की गई है। हर घर का भू-स्थानिक टैग बिजली मीटर नंबर से किया जाएगा और यूनिक हाउसहोल्ड आईडी दी जाएगी।


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जनता की सुविधा के लिए कदम
सर्वे के दौरान राशन कार्ड और आधार विवरण मोबाइल नंबर से जोड़े जाएंगे। जो लोग घर पर मौजूद नहीं होंगे, उनके लिए शिकायत और सहायता हेतु हेल्पलाइन नंबर 8050770004 जारी किया गया है। नागरिक चाहें तो ऑनलाइन भी इसमें भाग ले सकते हैं। आयोग को दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है।

क्या बोले अधिवक्ता विवेक रेड्डी?
वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक रेड्डी ने तर्क दिया कि राज्य सरकार ने जातियों का सही वर्गीकरण नहीं किया है। उनके अनुसार, सर्वे की पूरी प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है क्योंकि इसमें जाति और उपजाति का स्पष्ट ढांचा नहीं है। रेड्डी ने कहा कि कई ऐसे समुदायों को भी शामिल किया गया है, जो पहले सर्वे का हिस्सा नहीं थे। उनका मुख्य आरोप है कि सरकार कृत्रिम जाति संरचना तैयार कर सर्वे के नतीजों को राजनीतिक रूप से प्रभावित करना चाहती है। साथ ही उन्होंने डेटा के भंडारण और उसकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई।


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