फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Karnataka High Court raps government for forcing parents to opt for private schools

Karnataka: 'बजट की राशि का क्या हुआ', कर्नाटक HC ने सरकारी स्कूलों की हालत पर राज्य सरकार को लगाई फटकार

Tue, 10 Oct 2023 03:18 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 10 Oct 2023 03:18 PM IST
सार

मीडिया की खबरों के आधार पर वर्ष 2013 में अदालत में दाखिल की गई एक जनहित याचिका पर अदालत सुनवाई कर रही थी। इस दौरान, पीठ ने पूछा कि क्या शिक्षा सिर्फ विशेषाधिकार वाले बच्चों के लिए है? 
 

विज्ञापन
Karnataka High Court raps government for forcing parents to opt for private schools
Karnataka High Court - फोटो : PTI

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने में सरकार की विफलता ने उन गरीब लोगों को अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजने के लिए मजबूर किया, जो तीन वक्त का खाना तक नहीं जुटा सकते।

विज्ञापन

मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी. वराले और न्यायमूर्ति कृष्णा एस. दीक्षित की पीठ ने पूछा कि क्या शिक्षा सिर्फ विशेषाधिकार वाले बच्चों के लिए आरक्षित है? पीठ ने मीडिया की खबरों के आधार पर वर्ष 2013 में अदालत में दाखिल की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सवाल किया।

विज्ञापन

अदालत ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में शौचालयों की कमी और पीने के पानी की सुविधाओं से संबंधित खामियां 2013 में सामने लाई गई थीं, लेकिन इन कमियों को दूर करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने कहा कि अभी तक 464 सरकारी विद्यालयों में शौचालयों की कमी है और 32 में तो पीने के पानी की सुविधा तक नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

अदालत ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर सभी विद्यालयों में मुहैया कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। 

अदालत ने सोमवार को कहा, 'क्या राज्य को यह सब बताना हमारा काम है? यह सब कई वर्षों से चला आ रहा है। बजट में विद्यालयों और शिक्षा विभाग के लिए कुछ राशि जाती है। उस राशि का क्या हुआ? '

गरीबों के लिए राज्य सरकार की मुफ्त योजनाओं का संदर्भ देते हुए सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उन्हें इस तरह की योजनाओं से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन जिन विद्यालयों में गरीब छात्र पढ़ते हैं, वहां आवश्यक और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोपरि होना चाहिए।

अदालत ने कहा, ‘शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, लेकिन सरकार सरकारी विद्यालयों में सुविधाएं मुहैया कराने में विफल रही, जिसकी वजह से गरीब लोगों को अपने बच्चे निजी विद्यालयों में भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे अप्रत्यक्ष रूप से निजी विद्यालयों को फायदा पहुंच रहा है।'

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed