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Karnataka: भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को कर्नाटक हाईकोर्ट से राहत; आचार संहिता उल्लंघन मामले में दर्ज FIR रद्द

Mon, 07 Aug 2023 06:57 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 07 Aug 2023 06:57 PM IST
सार

इलेक्शन विजिलेंस डिविजन (चुनाव सतर्कता प्रभाग) के अधिकारियों ने हरप्पनहल्ली पुलिस थाने में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई कि भाषण ने आदर्श संहिता का उल्लंघन किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इस जांच को रद्द करने की मांग को लेकर नड्डा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

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Karnataka High Court quashes FIR against BJP President JP Nadda Latest News Update
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा । - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने मई में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान एक भाषण में आदर्श आचार संहिता का कथित उल्लंघन करने के मामले में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और जांच को सोमवार को रद्द कर दिया।

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भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने सात मई 2023 को विजयनगर जिले के हरप्पनहल्ली शहर के आईबी सर्कल में भाजपा के लिए चुनाव प्रचार के दौरान एक चुनावी रैली की थी। वहां उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अगर भाजपा चुनाव हार जाती है, तो मतदाता केंद्र सरकार की योजनाओं से वंचित हो जाएंगे। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा था कि अगर कांग्रेस राज्य में सत्ता में आई तो किसान सम्मान निधि और केंद्र की कई परियोजनाएं बंद कर दी जाएंगी।
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नड्डा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी
इलेक्शन विजिलेंस डिविजन (चुनाव सतर्कता प्रभाग) के अधिकारियों ने हरप्पनहल्ली पुलिस थाने में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई कि भाषण ने आदर्श संहिता का उल्लंघन किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इस जांच को रद्द करने की मांग को लेकर नड्डा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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सात जुलाई को जांच पर रोक का अंतरिम आदेश दिया था
जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने सात जुलाई को जांच पर रोक का अंतरिम आदेश दिया। पीठ ने सोमवार को यह कहते हुए प्राथमिकी रद्द कर दी कि जांच जारी रखने की अनुमति देने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।


‘अवैध’’ धार्मिक ढांचों के संरक्षण के लिए लाए गए कानून को अदालत में चुनौती
इस बीच हाईकोर्ट ने कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) अधिनियम, 2021 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। इसे राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने कथित तौर पर सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध धार्मिक इमारतों के संरक्षण के लिए लागू किया था। मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और जस्टिस एमजीएस कमल की खंडपीठ ने बेंगलुरु केडी केशवमूर्ति की जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने नोटिस जारी करने और महाधिवक्ता को तीन सप्ताह के भीतर आपत्तियां दायर करने का निर्देश दिया।

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