{"_id":"69ebc17893298acc4d07e0c1","slug":"karnataka-high-court-orders-rs-75k-monthly-support-to-molestation-victim-grants-conditional-stay-in-case-2026-04-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court: 'दुष्कर्म पीड़िता को मिले ₹75,000 मासिक गुजारा भत्ता', कर्नाटक हाईकोर्ट का अहम फैसला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
High Court: 'दुष्कर्म पीड़िता को मिले ₹75,000 मासिक गुजारा भत्ता', कर्नाटक हाईकोर्ट का अहम फैसला
Sat, 25 Apr 2026 12:46 AM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 25 Apr 2026 12:46 AM IST
सार
कोर्ट ने पीड़िता, उसके परिवार और रिश्तेदारों को निर्देश दिया कि जब तक मामला न्यायिक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच जाता, तब तक वे मीडिया से किसी भी प्रकार की बातचीत से बचें। इस याचिका को संबंधित मामलों के साथ टैग किया गया है और इसकी अगली सुनवाई 5 जून, 2026 को निर्धारित है।
विज्ञापन
कर्नाटक उच्च न्यायालय
- फोटो : एएनआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में दुष्कर्म के आरोपी युवक को पीड़िता और उसके 10 महीने के बच्चे के भरण-पोषण के लिए हर महीने ₹75,000 देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आगे की आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने सुनाया। यह याचिका 22 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र श्रीकृष्णा जे. राव ने दायर की थी, जिसने मंगलुरु की एक सत्र अदालत में भारतीय न्याय संहिता के तहत लंबित कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।
संबंध और पितृत्व की पुष्टि
कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता और पीड़िता, जिनकी उम्र क्रमशः 22 और 20 वर्ष है, एक रिश्ते में थे। इस रिश्ते से एक बच्चे का जन्म हुआ। कोर्ट ने इस बात को भी दर्ज किया कि याचिकाकर्ता बच्चे का जैविक पिता है, जिसे चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित और निर्विवाद माना गया है।
विज्ञापन
शादी के वादे से पीछे हटा आरोपी युवक
युवा मां और उसके परिवार की आर्थिक असुरक्षा को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने टिप्पणी की कि महिला को "असमय ही मातृत्व की जिम्मेदारियों में धकेल दिया गया" और अब उसे अप्रत्याशित बोझ उठाना पड़ रहा है, क्योंकि कथित तौर पर याचिकाकर्ता ने शादी के अपने वादे से पीछे हट गया है।
आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक
इसके चलते मंगलुरु स्थित अतिरिक्त प्रधान जिला और सत्र न्यायालय में लंबित कार्यवाही पर याचिकाकर्ता के संबंध में अंतरिम रोक लगा दी गई। हालांकि, इस रोक के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त जुड़ी है।
शर्त के अनुसार, याचिकाकर्ता, या तो व्यक्तिगत रूप से या अपने माता-पिता के माध्यम से, जो सह-याचिकाओं में आरोपी हैं, शिकायतकर्ता और बच्चे को ₹75,000 प्रति माह की राशि प्रदान करेगा। यह राशि याचिका के अंतिम निपटारे तक मां और 10 महीने के बच्चे के भरण-पोषण और कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए है।
भुगतान की समय-सीमा
पहली किश्त एक सप्ताह के भीतर, 1 मई 2026 तक या उससे पहले भुगतान की जानी है और उसके बाद के भुगतान नियमित रूप से किए जाने होंगे। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि भले ही याचिकाकर्ता एक छात्र है, लेकिन ऐसी परिस्थितियां बच्चे और मां की तत्काल जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। अदालत ने कहा कि "न्याय, अपने समतावादी आयाम में, एक संतुलित दृष्टिकोण की मांग करता है।"
अन्य वीडियो
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने सुनाया। यह याचिका 22 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र श्रीकृष्णा जे. राव ने दायर की थी, जिसने मंगलुरु की एक सत्र अदालत में भारतीय न्याय संहिता के तहत लंबित कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।
विज्ञापन
संबंध और पितृत्व की पुष्टि
कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता और पीड़िता, जिनकी उम्र क्रमशः 22 और 20 वर्ष है, एक रिश्ते में थे। इस रिश्ते से एक बच्चे का जन्म हुआ। कोर्ट ने इस बात को भी दर्ज किया कि याचिकाकर्ता बच्चे का जैविक पिता है, जिसे चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित और निर्विवाद माना गया है।
विज्ञापन
शादी के वादे से पीछे हटा आरोपी युवक
युवा मां और उसके परिवार की आर्थिक असुरक्षा को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने टिप्पणी की कि महिला को "असमय ही मातृत्व की जिम्मेदारियों में धकेल दिया गया" और अब उसे अप्रत्याशित बोझ उठाना पड़ रहा है, क्योंकि कथित तौर पर याचिकाकर्ता ने शादी के अपने वादे से पीछे हट गया है।
आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक
इसके चलते मंगलुरु स्थित अतिरिक्त प्रधान जिला और सत्र न्यायालय में लंबित कार्यवाही पर याचिकाकर्ता के संबंध में अंतरिम रोक लगा दी गई। हालांकि, इस रोक के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त जुड़ी है।
शर्त के अनुसार, याचिकाकर्ता, या तो व्यक्तिगत रूप से या अपने माता-पिता के माध्यम से, जो सह-याचिकाओं में आरोपी हैं, शिकायतकर्ता और बच्चे को ₹75,000 प्रति माह की राशि प्रदान करेगा। यह राशि याचिका के अंतिम निपटारे तक मां और 10 महीने के बच्चे के भरण-पोषण और कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए है।
भुगतान की समय-सीमा
पहली किश्त एक सप्ताह के भीतर, 1 मई 2026 तक या उससे पहले भुगतान की जानी है और उसके बाद के भुगतान नियमित रूप से किए जाने होंगे। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि भले ही याचिकाकर्ता एक छात्र है, लेकिन ऐसी परिस्थितियां बच्चे और मां की तत्काल जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। अदालत ने कहा कि "न्याय, अपने समतावादी आयाम में, एक संतुलित दृष्टिकोण की मांग करता है।"
अन्य वीडियो
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन