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कर्नाटक: दीवाली को लेकर दिशा-निर्देश जारी, सिर्फ ग्रीन क्रैकर्स की बिक्री की अनुमति 

Sat, 30 Oct 2021 05:09 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कर्नाटक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कर्नाटक Published by: Amit Mandal Updated Sat, 30 Oct 2021 05:09 PM IST
सार

दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल अनुमति वाले विक्रेता ही 1 नवंबर से 10 नवंबर के बीच आवासीय क्षेत्रों के बाहर तय स्थानों पर ग्रीन क्रैकर्स बेच सकते हैं।  
 

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Karnataka: Guidelines issued regarding Diwali, only green crackers allowed to be sold
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई - फोटो : एएनआई

विस्तार

कर्नाटक सरकार ने शनिवार को दीवाली को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए। राज्य सरकार ने केवल ग्रीन क्रैकर्स की बिक्री की अनुमति दी है। साथ ही लोगों को शारीरिक दूरी व कोरोना संबंधी अन्य मानदंडों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। दिवाली के लिए नए दिशा-निर्देशों जारी करते हुए राज्य सरकार ने कहा है कि केवल अनुमति वाले विक्रेता ही 1 नवंबर से 10 नवंबर के बीच आवासीय क्षेत्रों के बाहर तय स्थानों पर ग्रीन क्रैकर्स बेच सकते हैं। दुकानों के बीच 6 मीटर की दूरी जरूरी है। 
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पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में एक बार फिर साफ किया था कि पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है, सिर्फ सेहत के लिए हानिकारक विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को प्रभावित करने वाले पटाखों पर ही प्रतिबंध है। कोर्ट ने कहा कि दूसरों की सेहत की कीमत पर कोई उत्सव नहीं हो सकता।  
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से साफ हो गया है कि दीवाली पर सिर्फ ग्रीन पटाखे या कम प्रदूषण वाले पटाखे बिक सकेंगे। पटाखों के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में दिए गए आदेशों को भी बरकरार रखा है। यानि दीवाली की शाम सिर्फ 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे चलाए जा सकते हैं। इसके अलावा क्रिसमस और नववर्ष पर रात 11.55 से 12.30 तक पटाखे चलाए जा सकते हैं।
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उत्सव की आड़ में जीवन से नहीं खेल सकते
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह किसी विशेष समूह या समुदाय के खिलाफ नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह उत्सव की आड़ में नागरिकों के अधिकारों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दे सकता है। न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह अपने आदेशों का पूर्ण कार्यान्वयन चाहती है। उत्सव की आड़ में आप (निर्माता) नागरिकों के जीवन के साथ नहीं खेल सकते। हम किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं हैं। पीठ ने कहा कि हम कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि हम यहां नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए हैं।

 
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