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Karnataka: 'न्याय के सिद्धांत कमजोर होंगे', मुस्लिम समुदाय को पिछड़ा वर्ग में लाने के सरकार के फैसले पर NCBC
Tue, 23 Apr 2024 01:59 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 23 Apr 2024 01:59 PM IST
सार
सोमवार रात को एनसीबीसी ने बयान जारी कर कहा कि राज्य में मुस्लिम वर्ग की सभी जातियों और समुदायों को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना गया है और राज्य की पिछड़ा वर्ग लिस्ट में उन्हें कैटेगरी आईआईबी में लिस्ट किया गया है। इससे उन्हें शिक्षण संस्थानों में दाखिले में और राज्य सेवाओं में भर्ती में आरक्षण का लाभ मिलेगा।
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कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कर्नाटक सरकार ने आरक्षण का लाभ देने के लिए राज्य में पूरे मुस्लिम समुदाय को पिछड़ा वर्ग में शामिल किया है। हालांकि सरकार के इस कदम की आलोचना हो रही है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी कर्नाटक सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है और कहा है कि सरकार के इस फैसले से सामाजिक न्याय के सिद्धांत कमजोर होंगे।
मुस्लिम समुदाय को आरक्षण का लाभ देने के लिए कर्नाटक सरकार का फैसला
कर्नाटक पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने जो आंकड़े उपलब्ध कराए हैं, उनके अनुसार, राज्य में मुस्लिम वर्ग की सभी जातियों को शैक्षिक और सामाजिक तौर पर पिछड़ा माना गया है और उन्हें राज्य की पिछड़ा वर्ग की आईआईबी कैटेगरी में लिस्ट किया गया है। बीते साल राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने ओबीसी वर्ग के लिए राज्य की आरक्षण नीति की समीक्षा की थी। अब सोमवार रात को एनसीबीसी ने बयान जारी कर कहा कि राज्य में मुस्लिम वर्ग की सभी जातियों और समुदायों को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना गया है और राज्य की पिछड़ा वर्ग लिस्ट में उन्हें कैटेगरी आईआईबी में लिस्ट किया गया है। इससे उन्हें शिक्षण संस्थानों में दाखिले में और राज्य सेवाओं में भर्ती में आरक्षण का लाभ मिलेगा।
पिछड़ा आयोग ने सरकार के फैसले पर जताई नाराजगी
एनसीबीसी ने राज्य सरकार के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पूरे मुस्लिम समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करने का फैसला सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करेगा। एनसीबीसी ने माना कि मुस्लिम समुदाय में ऐतिहासिक तौर पर हाशिए पर मौजूद वर्ग हैं, लेकिन पूरे समुदाय को पिछड़ा मानना गलत है। एनसीबीसी ने सरकार के फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा। कर्नाटक में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए स्थानीय निकाय चुनाव में 32 फीसदी आरक्षण का दिया जाता है। इस आरक्षण को विभिन्न समुदायों में बांटने की मांग उठ रही है। राज्य में मुस्लिम जनसंख्या करीब 12.92 फीसदी है।
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मुस्लिम समुदाय को आरक्षण का लाभ देने के लिए कर्नाटक सरकार का फैसला
कर्नाटक पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने जो आंकड़े उपलब्ध कराए हैं, उनके अनुसार, राज्य में मुस्लिम वर्ग की सभी जातियों को शैक्षिक और सामाजिक तौर पर पिछड़ा माना गया है और उन्हें राज्य की पिछड़ा वर्ग की आईआईबी कैटेगरी में लिस्ट किया गया है। बीते साल राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने ओबीसी वर्ग के लिए राज्य की आरक्षण नीति की समीक्षा की थी। अब सोमवार रात को एनसीबीसी ने बयान जारी कर कहा कि राज्य में मुस्लिम वर्ग की सभी जातियों और समुदायों को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा माना गया है और राज्य की पिछड़ा वर्ग लिस्ट में उन्हें कैटेगरी आईआईबी में लिस्ट किया गया है। इससे उन्हें शिक्षण संस्थानों में दाखिले में और राज्य सेवाओं में भर्ती में आरक्षण का लाभ मिलेगा।
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पिछड़ा आयोग ने सरकार के फैसले पर जताई नाराजगी
एनसीबीसी ने राज्य सरकार के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पूरे मुस्लिम समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करने का फैसला सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करेगा। एनसीबीसी ने माना कि मुस्लिम समुदाय में ऐतिहासिक तौर पर हाशिए पर मौजूद वर्ग हैं, लेकिन पूरे समुदाय को पिछड़ा मानना गलत है। एनसीबीसी ने सरकार के फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा। कर्नाटक में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए स्थानीय निकाय चुनाव में 32 फीसदी आरक्षण का दिया जाता है। इस आरक्षण को विभिन्न समुदायों में बांटने की मांग उठ रही है। राज्य में मुस्लिम जनसंख्या करीब 12.92 फीसदी है।
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