Karnataka Election: कर्नाटक की पिच पर बजरंगी को लेकर जमी सियासी फील्डिंग, क्या कांग्रेस ने मोल ले लिया नुकसान?
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विस्तार
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जैसे-जैसे मतदान की तिथि निकट आ रही है, वहां पर राजनेताओं के बयानों में भी तल्लखी देखने को मिल रही है। राज्य में दस मई को वोट डाले जाएंगे। फिलहाल कर्नाटक की चुनावी पिच पर 'बजरंगी' और 'मुसलमान' को लेकर फील्डिंग जम रही है। कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही पार्टियां वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए एक से बढ़कर एक गुगली फेंक रही हैं। कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल पर बैन करने की बात कही, तो भाजपा ने उसे हाथोंहाथ लेने में कोई देरी नहीं की। यहां तक कि पीएम मोदी की रैलियों में भी 'भारत माता' के नारे से पहले 'बजरंग बली' का नाम सुनने को मिला। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी को राहुल गांधी की 'पांच गारंटी' और 'भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई' के दायरे में ही रहना चाहिए था। कर्नाटक में फायदे में चल रही कांग्रेस ने 'बजरंग' दल पर प्रतिबंध लगाने की बात कह कर बेवजह नुकसान मोल ले लिया है।
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'जहरीले सांप' के मुकाबले 'विषकन्या' का बयान
कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार में अभी तक दोनों ही दल, नहले पर दहला स्टाइल में चल रहे थे। एक दल कोई वार करता तो दूसरी पार्टी उसका जवाब दे देती। सबसे पहले कांग्रेस की तरफ से पीएम मोदी को लेकर 'जहरीले सांप' का बयान सामने आया। भाजपा ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। इससे पहले कांग्रेस नेताओं ने पीएम मोदी के लिए कब और कौन से बयान दिए थे, उनकी सूची भी कर्नाटक के वोटरों के समक्ष रख दी। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह बयान दिया था। मौके की नजाकत और विवाद बढ़ता देख उन्होंने तुरंत अपने बयान पर सफाई दे दी। खरगे ने कहा, उन्होंने यह बात पीएम मोदी के लिए नहीं, बल्कि भाजपा की विचारधारा के लिए कही थी। अगले ही दिन भाजपा विधायक बासनगौड़ा पाटिल यतनाल ने कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को 'विषकन्या' कह दिया। इसके बाद कांग्रेस ने भी भाजपा पर जोरदार हमला बोल दिया।
प्रियंका गांधी ने किया 91 गालियों को काउंटर
किसी तरह से यह मामला शांत हुआ, तो पीएम मोदी ने कर्नाटक चुनाव में एक रैली के दौरान कहा, किसी ने कांग्रेस द्वारा उन्हें दी गई सभी गालियों की सूची बनाई है। अब तक कांग्रेस के लोगों ने मुझे 91 बार तरह-तरह की गालियां दी हैं। चुनाव प्रचार में यह मुद्दा गर्मा गया। हालांकि जल्द ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने 'गाली' के मुद्दे की काट निकाल ली। बागलकोट की एक जनसभा में प्रियंका ने कहा, वह (मोदी) पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो आपके सामने आते हैं और रोते हैं कि उन्हें गालियां दी जा रही हैं। प्रधानमंत्री आपका दुख सुनने की बजाए, यहां आकर अपने बारे में बताते हैं। पीएम कार्यालय में किसी ने लोगों की समस्याओं के बारे में नहीं, बल्कि उन लोगों की एक सूची बनाई है, जिन्होंने प्रधानमंत्री को कई बार गाली दी थी। प्रियंका ने कहा, मेरे भाई राहुल गांधी से सीखिए। मेरा भाई कहता है कि वह इस देश के लिए गाली ही नहीं, बल्कि गोली खाने को भी तैयार है। प्रियंका के इस बयान ने गालियों को काउंटर कर दिया।
चुनाव में भगवान राम, 'मुसलमान' और 'जिन्ना' भी
इसके बाद कर्नाटक की चुनावी पिच पर कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र ने राजनीतिक बवाल मचा दिया। कांग्रेस ने मंगलवार को जारी अपने घोषणापत्र में पीएफआई के अलावा बजरंग दल पर भी बैन लगाने की बात कही। भाजपा ने इसकी गहराई नापने में देर नहीं लगाई। पीएम मोदी और अमित शाह से लेकर पार्टी के हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता की जुबान पर बजरंग बली आ गया। भाजपा ने इसे भगवान हनुमान से जोड़ दिया। इतना ही नहीं, इसे बजरंग बली का अपमान बताया। पीएम मोदी ने विजयनगर की रैली में कहा, कांग्रेस ने पहले तो भगवान राम को ताले में बंद रखा और अब ये लोग बजरंग बली को कैद करना चाहते हैं। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा भी इस विवाद में कूद पड़े। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र को 'मुस्लिम घोषणा पत्र' कह दिया। वे बोले, यह 'मुसलमान' घोषणा पत्र है और 'जिन्ना' भी ऐसा मेनिफेस्टो नहीं जारी करते।
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कांग्रेस को केवल एक हफ्ता शांति से निकालना है
राजनीतिक विश्लेषक और कांग्रेस पार्टी को करीब से जानने वाले शकील अख्तर ने अपने ट्वीट पर लिखा है, कांग्रेस की समझ में ही नहीं आ रहा है कि अनावश्यक लिखना बोलना और नेता का दिखाना बंद कर दें। कर्नाटक में जनता खुद साथ में है। केवल एक हफ्ता शांति से निकालना है। पार्टी को भ्रष्टाचार, राहुल की पांच गारंटी, महंगाई और बेरोजगारी पर केंद्रित रहना चाहिए। घोषणा पत्र में क्या बजरंग दल का जिक्र करना जरूरी था। जिस मुद्दे से पार्टी के वोट बैंक पर कोई असर नहीं पड़ रहा, उसकी बात क्यों कर रहे हैं। क्या घोषणा पत्र में लिखने से बजरंग दल पर बैन लग जाएगा। पीएम मोदी के पास मुद्दे नहीं हैं। आप उन्हें मनपसंद मुद्दे दे रहे हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग जाने वाली अपनी टीम में सलमान खुर्शीद को मुख्य लीड रोल में रखा। अक्ल पर पत्थर पड़ना इसी को कहते हैं। क्या इन साहब को दूर नहीं रख सकते थे।
ऑफ स्टंप वाली बॉल को छेड़ने का क्या मतलब
कौन समझाए कि चुपचाप एक हफ्ता निकालो। जनता तुम्हारा चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस में कोई एक अगर जिम्मेदारी नहीं लेगा, तो लड़ाई बहुत मुश्किल हो जाएगी। खुद ही बेवजह गलतियां करते हैं। गुजरात में पार्टी अध्यक्ष खरगे ने रावण की बात कही, तो कर्नाटक में सांप का जिक्र कर दिया। प्रियंका ने गाली वाले बयान पर जबरदस्त जवाबी हमला कर चुनावी माहौल पलट दिया। अभी यह सवाल रहेगा कि जीतते हुए मैच में ऑफ स्टंप के बाहर जाती हुई बॉल को छेड़ने का क्या मतलब है। पीएम मोदी अब कांग्रेस के किसी बड़े ब्लंडर के इंतजार में हैं। देखते हैं कि कांग्रेस उन्हें यह मौका देती है या संयम रख पाती है।