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कपिल मिश्रा को भारी पड़ी आपत्तिजनक बयानबाजी, पार्टी ने भी पल्ला झाड़ा
Tue, 25 Feb 2020 08:01 PM IST
Trainee Trainee
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 25 Feb 2020 08:01 PM IST
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कपिल मिश्रा
भाजपा नेता कपिल मिश्रा अपनी आपत्तिजनक बयानबाजी के लिए कई बार सुर्खियों में रह चुके हैं। लेकिन इस बार उनकी यह बयानबाजी उन पर भारी पड़ गई लगती है। भारतीय जनता पार्टी ने उनके बयान से किनारा कर लिया है और पूर्वी दिल्ली से सांसद गौतम गंभीर ने साफ कह दिया है कि आपत्तिजनक बयानबाजी करने वालों को कड़ा सबक सिखाया जाना चाहिए वे चाहे जिस पार्टी से हों।
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मनोज तिवारी ने भी गलतबयानी से बचने की बात कही है। पार्टी का कोई भी नेता इस समय उनके समर्थन में सामने नहीं आया है। उनकी आपत्तिजनक बयानबाजी के लिए उन पर केस भी दर्ज कर लिया गया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि कपिल मिश्रा को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए क्योंकि उनके बयान के बाद ही हालात बेकाबू हुए।
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नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने रविवार को सड़कें जाम कर दी थी। इसके बाद कपिल मिश्रा ने स्थानीय नेता कुसुम तोमर और कुछ अन्य स्थानीय लोगों को साथ लेकर कानून के समर्थन में एक मार्च निकाला था। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के सामने उन्होंने कहा था कि अगर तीन दिन के अंदर सड़कों को खाली नहीं कराया गया तो वे लोग सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
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कुछ लोगों का आरोप है कि कपिल मिश्रा के इस बयान के बाद ही उत्तर-पूर्व दिल्ली के अनेक इलाकों में दंगे फैल गए। इन दंगों में अब तक नौ लोगों के मारे जाने की खबर है जिसमें दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतनलाल भी शामिल हैं। एक पत्रकार आकाश श्रीवास्तव को भी इस हमले में गंभीर चोट आई है। उनका जीटीबी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
चुनाव के दौरान भी की थी आपत्तिजनक बयानबाजी
कपिल मिश्रा भाजपा में शामिल होने से पहले आम आदमी पार्टी के करावल नगर से विधायक थे। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से नाता जोड़ लिया था। इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें मॉडल टाउन से मैदान में उतारा था।
बताया जाता है कि चुनाव में अपनी हार सामने देख कपिल मिश्रा बौखला गए थे और आपत्तिजनक बयानबाजी करके उन्होंने इस चुनाव को हिंदू बनाम मुस्लिम बनाने की खूब कोशिश की। हालांकि इसके बाद भी उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।