फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Kanon Dekhi NDA 3.0 PM Modi slogans continue amid Chandrababu Naidu and Nitish Kumar entry in Govt formation

कानों देखी: क्या अब भी लगते रहेंगे मोदी-मोदी के नारे? क्यों अलग मूड में हैं चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार

Sat, 08 Jun 2024 12:33 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 08 Jun 2024 12:33 PM IST
सार

टर्निंग प्वाइंट एनडीए के दूसरे घटक दल टीडीपी के नेता चंद्रबाबू नायडू दिखा रहे हैं। संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में एनडीए की बैठक में ही उन्होंने सबकी सरकार, राष्ट्रहित, राज्य हित में संतुलन, सामाजिक सद्भाव का मंत्र देना शुरू किया है। देखना होगा कि नायडू कहां धीरे से अपना पैर फंसाते हैं।

विज्ञापन
Kanon Dekhi NDA 3.0 PM Modi slogans continue amid Chandrababu Naidu and Nitish Kumar entry in Govt formation
एनडीए की बैठक। - फोटो : ANI

विस्तार

पुराने संसद भवन में एनडीए की बैठक थी। नेता चुना जाना था। एनडीए की बैठक में मोदी-मोदी के नारे लगने लगे। भाजपा के सांसद संसद भवन में पिछले 10 साल से ऐसे नारे लगाते रहे हैं। बड़ा सवाल यही है कि अब तो गठबंधन की सरकार बनेगी। तो क्या मोदी-मोदी के नारे लगेंगे? इस सवाल पर टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू ने अपने भाषण में ही सलाहियत दे डाली है। उन्होंने इसे सबकी सरकार बताया। इशारा साफ है कि सिर्फ मोदी-मोदी करने से काम नहीं चलेगा। हालांकि, भाजपा के एक बड़े नेता ने कहा कि यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। यह तो भाजपा के सांसद अपने नेता के सम्मान और जोश को 'हाई' रखने के लिए लगाते हैं। 
विज्ञापन


नीतीश तो कुछ खास नहीं बोले, लेकिन चंद्रबाबू नायडू अलग मूड में थे। नायडू ने नसीहतन भावी केन्द्र सरकार को राष्ट्रहित, राज्यहित, समाज के हर तबके में संतुलन का राग अलाप दिया। नायडू की ये लाइनें लोगों के कान में जगह बना रही हैं।
विज्ञापन


भाजपा का गांधी परिवार बेरोजगार हो गया, अब क्या होगा?
वरुण गांधी का नाम लेने पर कोई कुछ नहीं बोलता। भाजपा के नेता बस इतना कहते हैं कि हमारे वरिष्ठ नेता हैं। उनके बारे में नेतृत्व कुछ अच्छा करेगा। मेनका गांधी भी सुल्तानपुर से चुनाव हार गई हैं। जब से मेनका गांधी ने भाजपा में पकड़ मजबूत की, उन्हें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा था। वरुण गांधी भी 2014 तक सैटल हो चुके थे। ऐसा पहली बार है, जब मां और बेटे दोनों सांसद नहीं हैं। वरुण पीलीभीत से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिला। मेनका लड़ीं तो हार गई। भाजपा का गांधी परिवार बेरोजगार हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे आईं वसुंधरा, दूसरी पंक्ति में बैठीं और चली गईं
राजस्थान में भाजपा को करारी हार मिली है। 2019 में 25 सांसद जीते थे। 2024 में 14। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा प्रचार के लिए बेटे के क्षेत्र के अलावा घर से नहीं निकलीं। वह संसद भवन भी आई थीं। दूसरी पंक्ति में बैठी थीं। काफी गंभीर मुद्रा में। न पहले वाला हंसी-ठिठोली का अंदाज और न कलेवर। भाजपा के नेता भी गजब के हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का मिजाज देखकर चलते हैं। इसलिए किसी ने बड़ा भाव भी नहीं दिया। हां, एक नए नवेले नेता ने जरूर कहा कि जल्द ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जी नए आएंगे। नए आएंगे तो नई टीम बनेगी। देखिए उसमें क्या होता है। मोदी जी के तीसरे मंत्रिमंडल के सवाल पर कहा कि जब अभी यह हाल है तो आगे की कौन जाने?

एनडीए में सबकुछ ठीक है, बस थोड़ा सा गड़बड़झाला है
नीतीश कुमार तो ठीक हैं। खुश हैं। राजनीति के पारखी नीतीश को पता है कि ऊंट पहाड़ के नीचे है। अब वह न केवल बिहार में अहम भाई हैं, बल्कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कोई खतरा नहीं है। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के साथ भी परेशानी नहीं आएगी। सम्राट चौधरी तो समय की धार समझते हैं। दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने अभी से 2025 का विधानसभा चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ने की घोषणा कर दी है। मजे की बात यह है कि चिराग के व्यवहार में बदलाव है। फिर तो बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार हैं। लिहाजा अब दिल्ली में नीतीश अपनी स्टाइल में इस बार 'हार्ड बार्गेनिंग' चाहते हैं।

दूसरा टर्निंग प्वाइंट एनडीए के दूसरे घटक दल टीडीपी के नेता चंद्रबाबू नायडू दिखा रहे हैं। संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में एनडीए की बैठक में ही उन्होंने सबकी सरकार, राष्ट्रहित, राज्य हित में संतुलन, सामाजिक सद्भाव का मंत्र देना शुरू किया है। इसके साथ-साथ पुराने 'हार्ड बार्गेनर' हैं। यथार्थ पर बात करते हैं। वाजपेयी के जमाने में भी ऐसे ही थे। तभी तो जीएमसी बालयोगी लोकसभा सदस्य बन गए थे। देखना होगा कि नायडू कहां धीरे से अपना पैर फंसाते हैं। वैसे भी उन्हें दक्षिण भारत की राजनीति करनी है। आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा दिलाना है। देश मुस्लिम, ईसाई अल्पसंख्यकों की भी चिंता कर सकते हैं। न जाने क्या क्या?


कांग्रेस 150 पार हो जाती तो राहुल गांधी क्या करते?
राहुल गांधी उत्साहित हैं। 6 जून को उन्होंने शेयर घोटाले का बम फोड़ दिया। कांग्रेस के मीडिया फोरम पर भी बता दिया कि अब विपक्ष के पास ताकत आ गई है। साफ संदेश की मोदी-3 में एंग्री यंग मैन से आगे जा सकते हैं। राहुल का अंदाज फिर कांग्रेस के ही एक बड़े नेता को खल गया। सूत्र का कहना है कि थोड़ा सब्र कर लेते तो अच्छा था। आखिर कांग्रेस की सीटें आई ही कितनी हैं? 99 बस। इतनी जल्दी क्या है? कम से कम लोकसभा का गठन तो हो जाने देते। कम से कम मुद्दा तो फुस्स न होता। पूर्व मंत्री ने तंज किया कि कदाचित कांग्रेस 150 सीट पार कर जाती तो हमारे नेता जी कुतुब मीनार पर चढ़ जाते।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed