फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   kano dekhi:West Bengal and Uttar Pradesh became headache Rahul gandhi smiriti irani ram vilas paswan

कानों देखी: पश्चिम बंगाल और उ.प्र. बन गया है राहुल का सिर दर्द, सीबीआई निदेशक पर ठनेगी

Thu, 10 Jan 2019 01:33 PM IST
पूजा मेहरोत्रा शशिधर पाठक,नई दिल्ली
शशिधर पाठक,नई दिल्ली Published by: पूजा मेहरोत्रा Updated Thu, 10 Jan 2019 01:33 PM IST
विज्ञापन
kano dekhi:West Bengal and Uttar Pradesh became headache Rahul gandhi smiriti irani ram vilas paswan
कानों देखी - फोटो : अमर उजाला

सीबीआई निदेशक पर ठनेगी

विज्ञापन

सीबीआई निदेशक को लेकर कांग्रेस के लोकसभा में नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के तेवर सख्त हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, खड़गे और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित जस्टिस सीकरी सेलेक्ट कमेटी के सदस्य हैं। इसी तीन सदस्यीय समिति को वर्मा का भविष्य और उनके उत्तराधिकारी के बारे में भी विचार करना है। 31 जनवरी को अवकाश प्राप्त करने वाले आलोक वर्मा सुप्रीम कोर्ट से बहाली का आर्डर लेकर लौटने के बाद काफी सख्त तेवर में हैं। 

पहले ही दिन उन्होंने रूटीन के काफी कामकाज निबटाए। मल्लिकार्जुन खड़गे वर्मा के खिलाफ किसी तरह की जबरिया की जाने वाली कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं। वहीं स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के मामले में पूरी सख्ती बरत कर चल रहे हैं। इसके अलावा सीबीआई के नए निदेशक के बारे में भी कांग्रेस नेता पूरी सावधानी बरत रहे हैं। एक तरफ जब राज्यसभा में आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर तीखी बहस चल रही थी, तब प्रधानमंत्री आवास पर पीएम, जस्टिस सीकरी और खडग़े सलेक्ट कमेटी की बैठक में व्यस्त थे। पहले दिन की इस बैठक कोई खास निर्णय नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि सीबीआई निदेशक को लेकर खडग़े पूरा तेवर दिखाएंगे और सरकार के साथ ठनना तय माना जा रहा है।

विज्ञापन
 

ईरानी जी का मोह नहीं छूट रहा


कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी जब से सूचना मंत्रालय के प्रभार से मुक्त हुई हैं, मंत्रालय का प्रेम उनका लगातार पीछा कर रहा है। मीडिया से बढ़ा प्रेम भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मीडिया कर्मियों के बीच में भी वह आज भी कुछ खास मीडिया कर्मियों के नाम की चर्चा करना नहीं भूलती। ईरानी की एक खासियत है। वह जहां जाती हैं, वहां लोगों को भाई, बहन के रिश्ते में जोडऩे लगती हैं। जब वह मानव संसाधन विकास मंत्री थी तो उनकी एक मीडिया सलाहकार काफी करीब हो गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीएस विनिता श्रीवास्तव से भी रिश्ता बहुत अच्छा था, लेकिन इस रिश्ते के बिगड़ते देर नहीं लगी। एचआरडी के बाद कपड़ा और साथ में जब वह सूचना प्रसारण मंत्रालय लौटी तो उनकी पुरानी मीडिया सलाहकार के होश उड़ गए। ईरानी के आदेश से उसका भी काफी दूर स्थानंतरण हो गया। लिहाजा मोहतरमा ने एक बार फिर खुद को नीचा रखकर ईरानी से गुहार लगाया, लेकिन ईरानी टस से मस नहीं हुई।

इसी तरह से ईरानी के कई मीडिया में भी भाई, बहन हैं। लेकिन मजे की बात यह भी है कि सब उनके तेवर से वाकिफ हैं, लिहाजा संभलकर रहते हैं। आठ जनवरी को ईरानी अमेठी दौरे पर थी तो दिल्ली के पत्रकारों ने वहां तक पीछा किया। वहां भी एक वाकया हो गया। एक स्थानीय मीडियाकर्मी ने इंटरव्यू के लिए समय मांगा तो ईरानी उसे आईना दिखाकर दिल्ली लौट आई।
 

चौधरी साहब का आरक्षण पर गणित

kano dekhi:West Bengal and Uttar Pradesh became headache Rahul gandhi smiriti irani ram vilas paswan
नरेंद्र मोदी-रामविलास पासवान - फोटो : फाइल
आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण का एक बार रास्ता साफ हो गया है। इस सब गणित बिठा रहे हैं। चौधरी वीरेन्द्र सिंह भी गणित बिठा रहे हैं। चौधरी का कहना है कि इसका हरियाणा में जबरदस्त फायदा होने वाला है। जब कुछ लोगों ने सवाल पूछना शुरू किया तो चौधरी साहब ने धौंस दिखा दी। उन्होंने कहा कि उनसे ज्यादा कौन इसे जान सकता है, क्योंकि वह तो कांग्रेस और भाजपा दोनों के विशेषज्ञ हैं। 

चौधरी साहब का गणित है कि हरियाणा का हर आदमी पहले पक्की सरकारी नौकरी चाहता है। दूसरे बनिया आदि के लड़के गुजरातियों की तरह नौकरी तो करते नहीं। वह न तो पुलिस में आते हैं और न ही चपरासी, आईएएस बनते हैं। इसलिए रास्ता जाट, गूजर समेत सबके लिए खाली है।

फिर बात आय की सीमा, जमीन पर आई तो चौधरी ने दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जब भजन लाल थे तो उन्होंने जाटों को नौकरी से बाहर रखने की हर कोशिश कर ली, लेकिन जब नतीजा देखा तो आधे से अधिक जाटों को ही सरकारी नौकरी मिली थी। चौधरी के मुताबिक जब भजन लाल ने इस पर क्लास लगाई तो पता चला कि जाटों ने पैसे फेंक कर नौकरी ले ली है। लिहाजा चौधरी साहब खुश हैं, क्योंकि जाट तो बस मौका लगने की देर है। अपना काम खुद ही कर लेते हैं।
 

पासवान जी की दिलेरी

राज्यसभा में आर्थिक आधार पर आरक्षण के बिल पर चर्चा चल रही थी। केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान और राम दास अठावले भी राजनीतिक महत्व देखकर अपना पक्ष चले आए। पासवान आए तो निशाना भी बने। पहले सतीश चंद्र मिश्रा ने उनसे बसपा प्रमुख का नाम अदब से लेने का दबाव बनाया। इसके बाद और नेताओं ने भी निशाना साधना शुरू किया। बारी कांग्रेस की कु. शैलजा की आई तो शैलजा ने आईना ही दिखा दिया। कहा पासवान जी का क्या? कभी उनके(सत्ता पक्ष) के साथ थे, फिर हम सत्ता में थे तो हमारे साथ और अब उनके साथ हैं। 

कुछ दिन की बात है। क्या पता सत्ता हमारे पास सत्ता आए तो इधर आ जाएं। जब शैलजा यह बोल रही थी, तो भाजपा सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे थे। इसी बीच में किसी सांसद ने मौसम विज्ञानी का तंज भी कस दिया, लेकिन मजे की बात यह है कि पासवान जी सबकुछ पूरी दिलेरी के साथ सुन रहे थे। देर रात जब सदन का सत्रावसान हो गया एक भाजपा के एक मंत्री से लोगों ने पूछ लिया कि क्या सच में पासवान जी 2019 चुनाव के बाद उधर जा सकते हैं। तो साहब का जवाब था। अभी हमारे साथ हैं। आदमी अच्छे हैं। किधर जाएंगे यह मैं(मंत्री) भी नहीं बता सकता। फिलहाल उन्होंने एनडीए में बने रहने का भरोसा दिया है। 
 

प्रधानमंत्री मोदी जी की प्रतिभा

kano dekhi:West Bengal and Uttar Pradesh became headache Rahul gandhi smiriti irani ram vilas paswan
Narendra Modi Maharashtra - फोटो : PTI
कांग्रेस के नेता भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिभा का लोहा मान गए हैं। प्रधानमंत्री के बारे में आम है कि वह हमेशा एक अमोघ शक्ति छिपाए रखते हैं और दुश्मन के भारी पड़ते ही किसी को भनक लगे बिना उसे छोड़ (सर्जिकल स्ट्राइक)देते हैं। किसी को भी इल्म नहीं था कि आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक संसद में भी पेश होगा? प्रधानमंत्री और भाजपा दोनों राफेल, राम मंदिर दोनों मुद्दे पर बैकफुट पर थी। सब मानकर चल रहे थे कि 2019 टेढ़ी चाल चल सकता है। 

अचानक जब कैबिनेट ने यह निर्णय सुना दिया तो कांग्रेसी नेताओं के तोते उडऩे लगे। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तक सब पता करने में जुट गए कि आखिर यह कब से चर्चा में था। खबर की खोजबीन में कुछ पुराने मंत्री लगे। संपर्क में रहने वाले अधिकारियों से लेकर साथियों की मदद से मंत्रियों को टटोला गया। अंत में पता चला कि यह तो नोटबंदी जैसा फैसला था। न तो कैबिनेट के कई मंत्रियों को पता और न अधिकारी को। आनन फानन में निर्णय भी हो गया। बिल भी आ गया। 
 

पश्चिम बंगाल और उ.प्र. है राहुल का सिर दर्द


उ.प्र. और पश्चिम बंगाल दोनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है। पश्चिम बंगाल में जहां भाजपा जड़ें जमा रही है, वहीं कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही है। जबकि कभी यहां कांग्रेस का राज था। इसी तरह से उ.प्र. में एक बार सबकुछ ठीक लगता है और फिर सब उलझ कर रह जा रहा है। पश्चिम बंगाल में अधीर रंजन चौधरी चाहते हैं कि वाम दलों का मोह छोड़ दिया जाए। ममता बनर्जी तीन-चार सीट से अधिक देने के लिए राजी नहीं हैं। राहुल के करीबी मित्रा का मानना है कि भविष्य के लिए वामदल ही ठीक हैं, लेकिन तात्कालिक लाभ के लिए ममता बनर्जी। 

राहुल बाबा अभी इस गणित में माथा पच्ची कर रही हैं। क्योंकि राहुल गांधी जानते हैं कि 2019 में भाजपा, कांग्रेस के बाद सबसे अधिक सीटों वाला दल तृणमूल कांग्रेस हो सकता है। पार्टी तीस सीटों से अधिक ला सकती है और 2019 में समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। ममता बनर्जी तो ममता बनर्जी हैं। राहुल गांधी और सोनिया इसे भलीभांति समझते हैं। 

यही हाल उ.प्र. का है। उम्मीद और सपने दोनों बड़े हैं, लेकिन अरमान पर मायावती का पहरा बैठ गया है। जुलाई 2018 में महागठबंधन की जमीन तैयार थी और दिसंबर आते-आते सूखा पड़ गया है। बहन जी कुछ मजबूरी में हैं और कुछ नाराज हैं। जबकि कांग्रेस हाथी की सवारी को बेताब है। वहीं मायावती किंग मेकर बनने के लिए सारे घोड़े खोल रही हैं। मायावती को पता है कि 2019 में ठीक ठाक हो गया तो दोनों राष्ट्रीय दल दरवाजे पर खड़े होंगे। पीछे अखिलेश यादव हैं ही तो गम किस बात का। इन सबके बीच खबर है कि मकरसंक्राति के बाद कांग्रेस एक बार आखिरी कोशिश करेगी। इसे शुरू करने का सिलसिला मायावती का 15 जनवरी को जन्मदिन बीतने के बाद शुरू होगा।

योगी की परीक्षा

kano dekhi:West Bengal and Uttar Pradesh became headache Rahul gandhi smiriti irani ram vilas paswan
Prayagraj Kumbh 2019
कुंभ 2019 का सफल आयोजन उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परीक्षा है। कुंभ की धर्म संसद की बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, विहिप के प्रमुख विष्णु हरि कोकजे समेत सब वहां होंगे। भाजपा केन्द्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के अलावा सभी भाजपा शासित राज्यों के मुख्य मंत्रियों, सभी प्रदेश अध्यक्षों, वरिष्ठ नेताओं को कुंभ 2019 में आने के लिए कहा गया है। धर्म और आस्था के जौरदार प्रचार की तैयारी है। 

15 जनवरी से यह अभियान तेज हो जाएगा और जनवरी के अंतिम सप्ताह तक चलेगा। इसी बीच में प्रवासी भारतीय दिवस 2019 के संपन्न होने के बाद सैकड़ो भरतवंशी भी वहां पहुंचेगे। इसकी सफलता भी योगी जी की ही अग्निपरीक्षा मानी जा रही है। लिहाजा योगी जी ने प्रदेश के बाहर के किसी कार्यक्रम में जाने से साफ मना कर दिया है।

बताते हैं पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में योगी ने खूब प्रचार किया, लेकिन नतीजे निराशाजनक रहे। योगी के करीबियों की मानें तो उन्हें यह भी समझ में नहीं आ रहा है कि हिन्दुत्व को कितना पकड़ें और कितना छोड़ें। इससे वह आगे के राजनीतिक भविष्य पर भी कुछ चिंतित नजर आ रहे हैं। वैसे भी 2019 का लोकसभा चुनाव सिर पर है। लिहाजा योगी परीक्षा को अव्वल दर्जे से पास करने की माथापच्ची में जुट गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed