कानों देखी: किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष का मास्टर स्ट्रोक
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी किसानों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को घेरने वाले हैं। इसके लिए 30 नवंबर को दिल्ली में प्रदर्शन की योजना है। किसानों के मुद्दे पर होने वाले इस विरोध प्रदर्शन में अन्य दलों के नेताओं, किसान नेताओं को भी आमंत्रित किया जा रहा है। खास बात यह है कि महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता नाना पटोले की इच्छा पर कांग्रेस ने एक किसान मुद्दे पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया था। भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी किरण चौधरी को सौंपी गई थी।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को इससे दूर रखा गया था। यह योजना फ्लाप साबित हुई थी। इस बार हुड्ड को भी अजमाने की योजना है। वैसे भी कांग्रेस अद्यक्ष पिछले कई महीने से लगातार किसानों के मुद्दे पर मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं। वह किसानों के कर्ज माफी की खुलकर वकालत ही नहीं करते, बल्कि यूपीए सरकार के समय में माप किए गए 70 हजार करोड़ रुपये के कर्ज की दलील भी देते हैं। कांग्रेस के नेता इस राहुलनॉमिक्स(राहुल का अर्थशास्त्र) से गदगद हैं। दरअसल यहां राहुल का सीधा मुकाबला प्रधानमंत्री के किसानों से संबंधित मोदीनॉमिक्स से है।
वसुंधरा का दमखम
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने जिद की पक्की मानी जाती हैं। उन्होंने राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी का उत्तराधिकारी चुने जाने में अपना एक से अधिक बार वीटो लगाया। अंत में तभी मानी जब उनकी पसंद के मदन लाल सैनी को प्रदेश भाजपा की जिम्मेदारी मिली। इसी तरह से वह राज्य में प्रचार अभियान को लेकर अपने रुख पर अड़ी थी। अर्जुन राम मेघवाल से लेकर गजेन्द्र सिंह शेखावत तक को केन्द्रीय नेतृत्व की इच्छा के बाद भी ज्यादा भाव नहीं दिया। यहां तक कि पोस्टरों में केन्द्रीय नेतृत्व की मौजूदगी भी पर कभी वसुंधरा की पसंद ही चल रही थी।
वसुंधरा राज्य में भाजपा के प्रत्याशियों को लेकर काफी संवेदनशील थी। उनके विरोधी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त थे। लेकिन भाजपा ने जिन 131 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, उनमें वसुंधरा की ठीक- ठाक चली है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की टीम चाहकर भी कैंची नहीं चला पाई। बताते हैं दूसरी और अगली सूची में जारी होने 69 उम्मीदवारों की सूची में भी वसुंधरा जी पूरे ठाट से अड़ी हैं। देखिए आगे होता क्या है?
अब तेलंगाना के फॉर्मूले पर कोई ऐतराज नहीं
चंद्रबाबू नायडू ने जिस तरह से कांग्रेस पार्टी के साथ तेलंगाना में गठबंधन किया है, दरअसल यह मूल तृणमूल कांग्रेस की आइडिया ममता बनर्जी का था। ममता ने ही यह कांग्रेस को सुझाया था कि जिस राज्य में जो पार्टी मजबूत जनाधार रखती है, वहीं उस पार्टी के नेतृत्व में राजनीतिक गठजोड़ को अंजाम दिया जाए। लेकिन तब कांग्रेस को यह समझ में नहीं आया। अब चंद्रबाबू नायडू ने तेलंगाना में गठबंधन के लिए कांग्रेस के खाते में 119 में 93 सीटें डालकर समझा दिया है।
चंद्रबाबू नायडू की इस पहल से जद(एस) के नेता और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी, डीएमके के एमके स्टालिन, बसपा की मायावती, एनसीपी के शरद पवार खुश नजर आ रहे हैं। इस तरह से महागठबंधन की बुनियाद पड़ती दिखाई दे रही है। समझा जा रहा है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद और संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इस रूपरेखा अपना आकार लेने लगेगी।
सीबीआई में सब शांत है
केंद्रीय आन्वेषण ब्यूरो(सीबीआई) में इन दिनों सबकुछ शांत है। कार्यवाहक निदेशक एम नागेश्वर राव उच्चतम न्यायालय के फैसले से बंध गए हैं। सीबीआई के छुट्टी पर गए विशेष निदेशक को लेकर एजेंसी के भीतर सस्पेंस लगातार बढ़ रहा है। छुट्टी पर भेजे गए निदेशक आलोक वर्मा को लेकर सीबीआई अधिकारियों के भीतर नये कयास लग रहे हैं। यह कयास सरकार में बैठे कुछ मंत्री भी लगा रहे हैं।
वहीं सीबीआई में एक बड़े अधिकारी (संयुक्त निदेशक) एके शर्मा की चाल लोगों को जरा कम समझ में आ रही है। इसके भी अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। अफवाह तो यह भी है कि सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा का कार्यकाल खत्म होने के बाद एके शर्मा को सीबीआई की कमान भी मिल सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी सीबीआई को लेकर लगातार संजीदा बने हैं। मजे की बात यह है कि इतनी हलचल के बाद भी सीबीआई में सबकुछ शांत है। कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है।
अखिलेश से ज्यादा शिवपाल
समाजवादी पार्टी की लड़ाई का अभी एक एपीसोड और बाकी है। चाचा शिवपाल ने नई पार्टी बना ली है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी चाल से चल रहे हैं। पार्टी का दिल्ली स्थित केंद्रीय मुख्यालय भी अपनी विरानी में खोया है। प्रो. राम गोपाल के पास पार्टी के लिए समय नहीं है और मुलायम सिंह का स्वास्थ्य ढीला चल रहा है। ऐसे में शिवपाल समर्थकों ने नया उत्साह दिखाना शुरू कर दिया है।
खबर है कि शिवपाल दिल्ली के कुछ दूसरे दलों के नेताओं के भी संपर्क में हैं। वह पूरे उ.प्र. और खासकर पूर्वांचल में अपनी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) को खड़ा करने में लगे हैं। वैसे भी शिवपाल समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की लाठी कहे जाते हैं। शिवपाल अभी भी उ.प्र. विधानसभा में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के ही विधायक हैं। उनकी नजर भी समाजवादी पार्टी के पुराने नेताओं के जरिए अपनी पार्टी को मजबूत बनाने पर टिकी है।
राहुल गांधी फिर उड़ाएंगे राफेल
केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को भले ही राफेल सौदे की प्रक्रिया की जानकारी देकर काम चलाने की कोशिश की हो, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष इस सौदे को लेकर चुप बैठने वाले नहीं है। वह डेसाल्ट के सीईओ के तर्क से भी सहमत नहीं हैं। यह मामला उच्चतम न्यायालय में चल रहा है। लेकिन राफेल लड़ाकू विमान सौदे को राहुल गांधी सरकार पर हमला बोलना जारी रखने के मूड में हैं।
वह संसद के शीतकालीन सत्र में भी राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को उठाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस की रणनीति इस मुद्दे को 2019 के चुनाव तक जिंदा रखने की है। हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इस पर काफी हो-हल्ला भी मच चुका है, लेकिन राहुल गांधी इस सौदे को लेकर लगातार मिले दस्तावेजों से काफी उत्साहित हैं।
योगीराज की जय हो
उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी कामयाबी पाई है। भाजपा के केंद्रीय हाईकमान से उनका समीकरण काफी अच्छा हो रहा है। संघ भी योगी के साथ खड़ा है। योगी अब हर बड़ी मुश्किल को चुटकी में टाल दे रहे हैं। हाल में अमित शाह के लखनऊ दौरे के दौरान योगी के राजनीतिक विरोधियों को भी काफी निराशा हाथ लगी है। योगी जी हिंदुत्व की नई लाइन गढ़ रहे हैं। वह राम की प्रतिमा, फैजाबाद का नाम, इलाहाबाद का नाम सब बदल रहे हैं। इलाहाबाद के कुंभ को लेकर भी वह सीधे निर्मय ले रहे हैं और उनके निर्णय पर अब चूं-चपड़ भी घट रही है।
इतना ही नहीं अब प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्री उनकी सरकार के वरिष्ठ कबीना मंत्री की ही हैसियत में रह गए हैं। इन सबके साथ-साथ हर विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए योगी की मांग शीर्ष पर बनी हुई है। राजस्थान, म.प्र., छत्तीसगढ़, तेलंगाना यहां तक कि मिजोरम से भी उ.प्र. के मुख्यमंत्री की मांग है। पश्चिम बंगाल में भाजपा एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है। वहां भी पांच दिसंबर को प्रस्तावित रथयात्रा में अमित शाह के साथ योगी की जोरदार मांग है।