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कानों देखी: उत्तर प्रदेश के क्षत्रियों में सबसे बड़े राजनाथ सिंह और फिर...

Sun, 18 Jan 2026 03:31 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sun, 18 Jan 2026 03:31 PM IST
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kano dekhi Among the Kshatriyas of Uttar Pradesh, Rajnath Singh is the most prominent, a
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला

अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव है। राज्य में सियासी हलचल भी से तेज है। इस बीच पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बयान सुर्खियों में हैं। पहले उन्होंने अखिलेश यादव को क्षत्रिय बताया। इसके बाद अपने जन्मदिन उत्सव में उन्होंने क्षत्रियों का सबसे नेता राजनाथ सिंह को बताया। अघोषित तौर पर दूसरे नंबर को खुद को रख दिया। प्रतापगढ़ के रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को अपने बेटों का दोस्त बताया है। अपने जन्मोत्सव में राष्ट्रकथा के बहाने हर समाज, पक्ष, विपक्ष के लोगों के साथ बाहुबली और क्षत्रिय क्षत्रपों की मौजूदगी से अपनी ताकत का भी एहसास कराया है।  

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सतुआ बाबा की रोटी पर सियासत
सतुआ बाबा पीठ के महंत संतोष दास हैं। वही प्राइवेट जेट, डिफेंडर और पोर्शे कार वाले शौकीन बाबा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सतुआ बाबा महंत के साथ अच्छा भाव रखते हैं। संतोष दास मुख्यमंत्री के दौरे में आसपास देखे भी जाते हैं। ऐसे में भला प्रशासन क्यों न नत मस्तक हो जाएगा? हुआ भी। माघ मेले में जिलाधिकारी खुद 24 दिसंबर को बाबा के आश्रम में कोट पहनकर में रोटी सेंक आए। वायरल भी हुए। 10 जनवरी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संगम पहुंचे। मंच से बाबा की तारीफ की और कहा सबको बाबा के आश्रम जाना चाहिए। इसके बाद प्रयागराज संगम तट पर तैयारियों का जायजा लेने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पहुंच गए। मौर्य ने डीएम साहब से कहा, वह (डीएम) बाबा के चक्कर में न पड़ें, रोटी सेकने की बजाय काम पर ध्यान दें। नसीहत दी यह भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अब बारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की थी। बाबा संगम गए तो उन्होंने कहा कि अफसरों को भी सतुआ बाबा आश्रम जाना चाहिए।
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प्रियंका गांधी वाड्रा को लग रहा है कि अब न चूको चौहान 
दिल्ली की गद्दी चाहिए? कांग्रेस को जिंदा करना है? कुछ तो करना होगा? ये सवाल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के हैं। प्रियंका को लग रहा है कि ‘अब न चूको चौहान’ वाला समय आ गया है। उन्होंने अपनी मंशा को भाई राहुल गांधी से शेयर किया है। चाहती हैं कि पार्टी का अध्यक्ष दमदार चेहरा बने। सत्ता पक्ष से जोरदार विपक्ष की लड़ाई हो और 2029 में सब ठीक हो। बताते हैं राहुल ने प्रियंका को सुना है। सोनिया गांधी से चर्चा के बाद कांग्रेस कुछ बदलेगी। फिलहाल कांग्रेस महासचिव ने असम और इसके साथ-साथ उत्तर प्रदेश पर फोकस बढ़ा दिया है।    
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पश्चिम बंगाल का क्या होगा?
दीदी जोरदार लड़ाई लड़ रहे हैं। अपने अंदाज में हैं। अपने एक-एक सिपहसालार पर नजर रख रही हैं। डैमेज कंट्रोल के विकल्प भी उनके पास तैयार हैं। दरअसल दीदी को पता है कि चुनाव आचार संहिता लगते ही इस बार लड़ाई तगड़ी होने वाली है। टीएमसी के रणनीतिकारों को लग रहा है कि आचार संहिता लगते ही कई नेता भाजपा में जा सकते हैं। ऐसा हुआ तो  तृणमूल को झटका लगेगा। बंगाली और अन्य हिन्दू इस बार बांग्लादेश के डेवलपमेंट से तंग है। इसलिए ममता तृणमूल के जमीनी कॉडर को खास संदेश दे रही हैं। निबटना है तो तृममूल की गर्मी और भाजपा की स्टाइल अपना लो। देखना है आगे क्या होता है?  

 शिंदे, पवार, ठाकरे सब चित 
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की प्रचार टीम ने उन्हें ‘धुरंधर’ का तमगा दिलवा दिया है। धुरंधर के वॉरगेम में सफलता की कहानी केंद्रीय भाजपा की एक बड़ी टीम पसंद कर रही है। इस समय कसीदे भी गढ़े जा रहे हैं कि सरकार बना पाने में असफल रहने वाले धुरंधर ने कैसे करिश्मा कर दिखाया। पहले शरद पवार की एनसीपी तोड़ी अजीत दादा पवार को लाए। अजीत दादा लौट गए तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना तोड़ी। एकनाथ शिंदे को ले आए, उपमुख्यमंत्री पद कुबूला। फिर चमत्कार किया अजीत दादा पवार दोबारा आए। भाजपा सत्ता में आई। धुरंधर सीएम बने, सीएम डिप्टी सीएम बना। अजीत भी डिप्टी। अब अकेले बीएमसी और नगर निकायों के चुनाव में झंडा फहरा दिया। पार्टी के विरोधी भी सन्न हैं। समझ रहे हैं न कि इस धुरंधरी का मतलब क्या है?

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