भारत मां की जय नहीं बोलने वाले संविधान विरोधी: कल्याण सिंह
- इतिहास का लेखन फिर से होना चाहिए
- अंग्रेजों के चाटुकारों ने लिखा था इतिहास
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राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि आज कुछ लोग कहते हैं कि वह भारत मां की जय नहीं बोलेंगे। जय नहीं बोलने वाले संविधान का अपमान कर रहे हैं।
उन्होंने इतिहास के फिर से लेखन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अंग्रेजों के चाटुकार इतिहासकारों ने सच्चाई नहीं लिखी है। मंगलवार को वीरांगना रानी अवंतीबाई के बलिदान दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने तुवन मंदिर प्रांगण में लोगों का आह्वान किया कि वह नशा मुक्त, जुआ मुक्त, गंदगी मुक्त और साक्षरतायुक्त देश बनाएं।
साथ ही कहा कि शिक्षित बनें, संगठित बनें और संघर्ष करें। इसके लिए एक-एक हॉकी खरीदें। हाथ में हाकी आएगी तो वीरता के संस्कार अपने आप आ जाएंगे। उन्होंने बिना नाम लिए कटाक्ष किया कि कुछ लोग कहते हैं कि भारत माता की जय नहीं बोलेंगे।
देशवासियों ने भारत देश को मां का दर्जा दिया है। ऐसे में जय नहीं बोलने वाले लोग संविधान का अपमान कर रहे हैं। पठानकोट हमले के बाद कुछ लोग भारत मां के टुकड़े-टुकड़े करने के नारे लगा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि विचारों का मुकाबला विचारों से किया जाए।
इतिहास का लेखन फिर से होना चाहिए
उन्होंने कहा कि देश की आजादी के दौरान महापुरुषों ने वंदेमातरम गाकर कुर्बानी दी थी। भारत मां की जय नहीं बोलने वाले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर गलत बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतिहासकारों ने रानी अवंतीबाई के बलिदान का कहीं लेखन नहीं किया।
बाबू वृंदावन लाल वर्मा ने मध्य प्रदेश घूमकर रानी के बलिदान को खोज निकाला। अंग्रेजों के चाटुकार इतिहासकारों ने सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को गदर शब्द से निरूपित किया है। ऐसे चाटुकार इतिहासकारों द्वारा लिखे गए इतिहास का फिर से लेखन होना चाहिए। इसके लिए विशेषज्ञ इतिहासकारों का पैनल बनाया जाना चाहिए, ताकि सही इतिहास सामने आ सके।
उन्होंने कहा कि इतिहासकारों ने ईमानदारी नहीं बरती, लेकिन यदि यही इतिहास लगातार पढ़ते रहे तो बच्चों में गलत संस्कार आ जाएंगे। वीरांगना अवंतीबाई किसी जाति की नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज की हैं। जो देश अथवा समाज अपने अतीत को भूल जाता है अथवा संस्कृति को भूल जाता है, वह समाज और देश मिट जाता है।