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भारत-चीन सीमा विवाद में उलझी कैलाश यात्रा, लोगों ने पुरानी तस्वीरों को साझा कर किया मानसिक तीर्थ
Wed, 24 Jun 2020 03:13 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 24 Jun 2020 03:13 PM IST
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कैलाश मानसरोवर मार्ग
- फोटो : अमर उजाला
कैलाश मानसरोवर निष्काम सेवा समिति अध्यक्ष उदय कौशिक एक अनूठी यात्रा पर चल पड़े हैं। दरअसल, वह 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं की सूची में शामिल हो गए हैं, जो मानसिक तीर्थ करने के लिए अभियान चला रहे हैं।
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बता दें कि, जून से सितंबर महीने के बीच हर साल कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन किया जाता है। इसलिए इस यात्रा पर जा चुके लोग सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाकर अपनी यात्रा की वर्षगांठ को धूमधाम से मना रहे हैं। इस ग्रुप में शामिल सभी लोग यात्रा की तस्वीरों और वीडियो को साझा कर रहे हैं।
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कौशिक ने कहा कि 22 जून से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस समय को मानसिक साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। मान्यता है कि यदि यात्रा को पूरी श्रद्धा भाव से किया जाए तो शिव को आत्मसात किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर ग्रुप पर कैलाश दर्शन कर चुके लोग अपने अनुभव को साझा कर रहे हैं।
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बता दें कि, कैलाश मानसरोवर यात्रा 1981 से शुरू की गई थी। इस साल की कैलाश मानसरोवर यात्रा उत्तराखंड के रास्ते होने वाली थी, जिसमें दिनों का समय लगता था। लेकिन, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा धारचुला से लेकर लिपुलेख तक के रास्ते को यात्रा के लिए उपयुक्त बनाया गया है। इस कारण यात्रा में लगने वाले समय कम हो गया है।
वहीं, कोरोना वायरस महामारी के कारण चीन की यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। दूसरी तरफ, भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर युद्ध की स्थिति पैदा हो गई है। इधर, नेपाल में भी लिपुलेख की भारतीय सड़क पर आपत्ति दर्ज कराई और एक नया नक्शा पास करते हुए भारत के एक हिस्से को अपना बता दिया।