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PFI ban: जस्टिस शर्मा यूएपीए न्यायाधिकरण के प्रमुख नियुक्त, करेंगे पीएफआई पर पाबंदी की सुनवाई
Thu, 06 Oct 2022 03:04 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 06 Oct 2022 03:04 PM IST
सार
यूएपीए के तहत किसी संगठन को प्रतिबंधित किए जाने के बाद सरकार द्वारा एक न्यायाधिकरण का गठन किया जाता है। यह न्यायाधिकरण यह तय करता है कि पाबंदी के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं?
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा को 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया' (PFI) और उसके संबद्ध संगठनों पर पाबंदी से संबंधित यूएपीए न्यायाधिकरण (UAPA Tribunal) का प्रमुख बनाया है। यह प्राधिकरण इस पाबंदी को लेकर संबंधित पक्षों व केंद्र सरकार का पक्ष सुनकर पाबंदी पर विचार करेगा और फैसला देगा।
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कानून मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार न्यायमूर्ति शर्मा का गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) न्यायाधिकरण के प्रमुख के रूप में कार्यकाल मूल सेवा के तहत आएगा। न्यायमूर्ति शर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस. सी. शर्मा ने नामित किया है।
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बता दें, यूएपीए के तहत किसी संगठन को प्रतिबंधित किए जाने के बाद सरकार द्वारा एक न्यायाधिकरण का गठन किया जाता है। यह न्यायाधिकरण यह तय करता है कि पाबंदी के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं?
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तय प्रक्रिया के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय कानून मंत्रालय से हाईकोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश को न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में नामित करने का अनुरोध करता है। इस पर, कानून मंत्री संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से न्यायाधिकरण का नेतृत्व करने के लिए एक न्यायाधीश के नाम की सिफारिश करने का अनुरोध करते हैं।
केंद्र सरकार ने 28 सितंबर को पीएफआई और उसके संबद्ध संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई कड़े आतंकवाद-रोधी कानून के तहत की गई है। बता दें, देश में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की आतंकी फंडिंग व अन्य गतिविधियों के चलते 28 सितंबर को भारत में पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से इसके लिए अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी कर दी गई है। यूएपीए एक्ट के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके पहले देशभर में दो बार छापेमारी कर पीएफआई के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।
बता दें कि PFI एक कट्टरपंथी संगठन है। 2017 में NIA ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। NIA जांच में इस संगठन के कथित रूप से हिंसक और आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के बात आई थी। NIA के डोजियर के मुताबिक यह संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया।
पीएफआई के इन सहयोगी संगठनों पर भी लगा बैन
- रिहैब इंडिया फाउंडेशन
- कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया
- ऑल इंडिया इमाम काउंसिल
- नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन
- नेशनल विमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट
- एम्पावर इंडिया फाउंडेशन
- रिहैब फाउंडेशन(केरल)
- जूनियर फ्रंट