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जस्टिस काटजू ने बताया कि वर्मा पर फैसले में क्यों पीएम से सहमत दिखे जस्टिस सीकरी
Fri, 11 Jan 2019 09:51 PM IST
Avdhesh Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 11 Jan 2019 09:51 PM IST
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मार्कंडेय काटजू ने कहा कि मेरी जिंदगी के सबसे अच्छे दिन अब जा चुके
- फोटो : Twitter
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भले ही आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने को लेकर हल्ला मच रहा हो। वर्मा को हटाने वाली सलेक्शन कमेटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ मौजूद जस्टिस एके सीकरी के सरकारी पक्ष का समर्थन किए जाने पर आश्चर्य जताया जा रहा हो। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू का मानना है कि कमेटी में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद जस्टिस सीकरी के पास प्रधानमंत्री मोदी के निर्णय से सहमति जताने के लिए पर्याप्त कारण थे।
जस्टिस काटजू ने जस्टिस सीकरी के साथ बात करने के बाद फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर इन कारणों का खुलासा किया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने पोस्ट में लिखा है कि जब कमेटी ने आलोक वर्मा को हटाया, तो बहुत से लोगों ने मुझे फोन कर इस बात पर सवाल उठाया कि आलोक वर्मा को अपनी सफाई रखने का मौका आखिर क्यों नहीं दिया गया। इस कारण मैंने जस्टिस सीकरी से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में वर्मा मामले में हुए फैसले के पीछे के कारण सामने आए, जिन्हें जस्टिस सीकरी की अनुमति से मैं फेसबुक पर पोस्ट कर रहा हूं।
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जस्टिस काटजू ने जस्टिस सीकरी के साथ बात करने के बाद फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर इन कारणों का खुलासा किया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने पोस्ट में लिखा है कि जब कमेटी ने आलोक वर्मा को हटाया, तो बहुत से लोगों ने मुझे फोन कर इस बात पर सवाल उठाया कि आलोक वर्मा को अपनी सफाई रखने का मौका आखिर क्यों नहीं दिया गया। इस कारण मैंने जस्टिस सीकरी से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में वर्मा मामले में हुए फैसले के पीछे के कारण सामने आए, जिन्हें जस्टिस सीकरी की अनुमति से मैं फेसबुक पर पोस्ट कर रहा हूं।
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यह कारण गिनाए गए हैं पोस्ट में
- आलोक वर्मा के खिलाफ आरोप गंभीर थे, जिनकी प्रारंभिक जांच में सीवीसी को कुछ सबूत और निष्कर्ष मिले थे।
- सीवीसी ने प्रथम दृष्टया सामने आ रहे निष्कर्ष अपनी रिपोर्ट में दर्ज करते हुए आलोक वर्मा को सुनवाई का मौका दिया था।
- इन सबूतों और निष्कर्षों के आधार पर ही जस्टिस सीकरी इस फैसले पर पहुंचे थे कि जांच पूरी होने तक आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद पर नहीं रहना चाहिए। उन्हें इस दौरान उनकी रैंक के बराबर के किसी अन्य पद पर स्थानांतरित कर दिया जाए।
- वर्मा को न तो बर्खास्त किया गया और न ही निलंबित किया गया। कुछ लोगों ने ऐसा होने की बात कही है, लेकिन ऐसा नहीं है। वर्मा को उनके स्तर के बराबर के ही दूसरे पद पर उसी वेतन पर स्थानांतरित किया गया है।
- वर्मा का पक्ष नहीं सुनने की बात है तो तय प्रक्रिया है कि बिना किसी सुनवाई के पद से नहीं हटाया जाता, लेकिन किसी अधिकारी को निलंबित किया जा सकता है। निलंबित रहने के दौरान भी जांच जारी रहती है, जो कि आम प्रक्रिया है।
- वर्मा के मामले में न तो उन्हें निलंबित किया गया और न ही हटाया गया, बल्कि उन्हें सिर्फ सीबीआई चीफ के बराबर स्तर वाले दूसरे पद पर स्थानांतरित किया गया।
- सीवीसी ने प्रथम दृष्टया सामने आ रहे निष्कर्ष अपनी रिपोर्ट में दर्ज करते हुए आलोक वर्मा को सुनवाई का मौका दिया था।
- इन सबूतों और निष्कर्षों के आधार पर ही जस्टिस सीकरी इस फैसले पर पहुंचे थे कि जांच पूरी होने तक आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद पर नहीं रहना चाहिए। उन्हें इस दौरान उनकी रैंक के बराबर के किसी अन्य पद पर स्थानांतरित कर दिया जाए।
- वर्मा को न तो बर्खास्त किया गया और न ही निलंबित किया गया। कुछ लोगों ने ऐसा होने की बात कही है, लेकिन ऐसा नहीं है। वर्मा को उनके स्तर के बराबर के ही दूसरे पद पर उसी वेतन पर स्थानांतरित किया गया है।
- वर्मा का पक्ष नहीं सुनने की बात है तो तय प्रक्रिया है कि बिना किसी सुनवाई के पद से नहीं हटाया जाता, लेकिन किसी अधिकारी को निलंबित किया जा सकता है। निलंबित रहने के दौरान भी जांच जारी रहती है, जो कि आम प्रक्रिया है।
- वर्मा के मामले में न तो उन्हें निलंबित किया गया और न ही हटाया गया, बल्कि उन्हें सिर्फ सीबीआई चीफ के बराबर स्तर वाले दूसरे पद पर स्थानांतरित किया गया।