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रिपोर्ट: 2002-07 तक गुजरात में हुए तीन फर्जी एनकाउंटर, इन पुलिसवालों पर चल सकता है केस

Sat, 12 Jan 2019 09:45 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 12 Jan 2019 09:45 AM IST
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Justice HS Bedi report said between 2002 and 2007 three of the 18 encounters were fake
सांकेतिक तस्वीर

गुजरात सरकार जस्टिस एचएस बेदी के नेतृत्व वाली निगरानी प्राधिकरण की रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने का विरोध कर रही है। सरकार के लिए राहत की बता यह है कि इस रिपोर्ट में किसी भी राजनेता का नाम नहीं है। यह रिपोर्ट 2002-07 के बीच हुए एनकाउंटर पर है। जिस समय नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे। रिपोर्ट में 18 में से केवल तीन एनकाउंटर को फर्जी बताया गया है। 

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221 पेजों की फाइनल रिपोर्ट में जस्टिस बेदी ने कहा है कि 18 में से 15 एनकाउंटर असली लगते हैं और उनके खिलाफ इस संबंध में किसी कार्रवाई की जरुरत नहीं है। निगरानी प्राधिकरण ने पाया की बचे हुए तीन मामले फर्जी हैं और इनमें 9 पुलिसवालों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करके मुकदमा चलाने की सिफारिश की है।
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जस्टिस बेदी की रिपोर्ट में 2007 के स्टिंग ऑपरेशन का संदर्भ है जिसे तहलका ने समीर खान की 2002 के एनकाउंटर में हुई मौत को लेकर किया था। इस हलफनामे में राज्य सरकार के बहुत से बड़े लोगों के नाम शामिल थे। जिसमें राजनीति और प्रशासन दोनों के लोग हैं। जस्टिस बेदी ने कहा, 'जिन लोगों के नाम आए हैं वह मेरे सामने किसी सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुए। निगरानी प्राधिकारण के पास 18 एनकाउंटर इसलिए भेजे गए थे ताकि यह देखा जाए कि यह असल थे या फिर कस्टडी में मौत थीं। मैं सरफराज खान द्वारा स्टिंग ऑपरेशन में लगाए गए आरोप और तीरथ राज के जवाब को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करुंगा।'
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हालांकि समीर खान की मौत को जस्टिस बेदी ने फर्जी बताते हुए इंस्पेक्टर केएम वाघेला और टीए बरोत के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। दो और मामलों को जस्टिस बेदी ने फर्जी पाया। इनमें दूसरा 13 अप्रैल 2006 को किया गया कासिम जाफर का फर्जी एनकाउंटर शामिल है। जस्टिस ने कासिम की विधवा मरियम जाफर और उसके पांच बच्चों को 14 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने और सब इंस्पेक्टर जेएम भारद्वाज और कांस्टेबल गणेशभाई के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की सिफारिश की है।


तीसरा फर्जी एनकाउंटर हाजी इस्माइल का है जिसे 9 अक्तूबर, 2005 को वल्साड जिले के उमारग्राम पुलिस थाने में गोली मारी गई थी। निगरानी प्राधिकरण ने इस मामले में पांच पुलिस वालों- इंस्पेक्टर केजी इरडा, सब इंस्पेक्टर एलबी मोनपारा, जेएम यादव, एसके शाह और पराग पी व्यास के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने की सिफारिश की है।

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