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Fake News: जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा- फेक न्यूज के दौर में समाज की कमियां सामने लाने वाले पत्रकारों की जरूरत

Wed, 10 Aug 2022 05:12 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 10 Aug 2022 05:12 AM IST
सार

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी कई समुदाय लोकतंत्र का फल नहीं चख पाए। हमें सामाजिक व आर्थिक हैसियत और पद की वजह से यह फल विरासत में मिल गए। पर, कई नागरिक सामाजिक व आर्थिक गैरबराबरी की वजह से वंचित हैं।

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Justice Dhananjaya Y Dhandrachud said in era of fake news need of Honest Journalists
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सूचनाएं, विचार और अभिमत जुटाना है। इन्हीं के बल पर आम नागरिक सही निर्णय ले पाते हैं, बेहतर विकल्प चुन पाते हैं। आज फेक न्यूज और झूठी सूचनाओं के दौर में हमें ऐसे पत्रकारों की पहले से ज्यादा जरूरत है, जो छिपाई जा रही चीजों पर लिखें, समाज में मौजूद खामियां सामने लाएं।

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जस्टिस चंद्रचूड़ ने जिंदल विश्वविद्यालय के दीक्षांत व स्थापना दिवस समारोह में पत्रकार बनने जा रहे युवाओं से कहा कि वे विद्यार्थियों और लोगों की आवाज बन सकते हैं। वे दुनिया को बेहतर बना सकते है। 
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सामाजिक लोकतंत्र के बिना राजनीतिक लोकतंत्र नहीं टिकेगा
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, आजादी के 75 साल बाद भी कई समुदाय लोकतंत्र का फल नहीं चख पाए। हमें सामाजिक व आर्थिक हैसियत और पद की वजह से यह फल विरासत में मिल गए। पर, कई नागरिक सामाजिक व आर्थिक गैरबराबरी की वजह से वंचित हैं। डॉ. बीआर आंबेडकर ने चेताया था कि राजनीतिक लोकतंत्र का ढांचा हमेशा खतरे में रहेगा, अगर इसे सामाजिक लोकतंत्र का सहारा नहीं मिलेगा।
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हम असमानता भरी दुनिया में जी रहे  इसे बदलना होगा : जस्टिस चंद्रचूड़
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कानून औपचारिक समानता दिलाता है, लेकिन हम जिस दुनिया में जी रहे हैं वह असमानता से भरी है। अवसर के दरवाजे उन्हीं के लिए खुलते हैं, जिनके पास सबकुछ है और उनके लिए बंद रहते हैं, जिनके पास कुछ नहीं है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने जिंदल ग्लोबल विवि के दीक्षांत व स्थापना दिवस समारोह में कहा, सामाजिक न्याय को सफल बनाने के लिए बदलाव लाकर सभी को बराबर अवसर दिलाने होंगे। हर नागरिक को इन बदलाव में योगदान देना होगा, खासतौर से विद्यार्थियों और किसी प्रोफेशन से जुड़ने जा रहे युवाओं को सामाजिक न्याय के लिए काम करना होगा।

बचपन का किस्सा बताया : 1960 के दशक में डॉक्टर ने उन्हें गलत एंटीबायोटिक दे दी थी। वे बेहद बीमार पड़ गए, अपने बचने का श्रेय वे अपनी मां के समर्पित प्रेम और देखभाल को देते हैं। माता-पिता को याद करते हुए जस्टिस ने कहा कि भले ही उनके माता-पिता अब तारों में कहीं हैं, लेकिन खुद वे जहां हैं, उसमें उन्हीं का योगदान है।


सुनाए मौत से जुड़े अनुभव
एक साल में दो बार कोविड संक्रमित हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि उस समय वे रात को सोने से पहले सोचते थे कि अगर यह उनके जीवन का आखिरी दिन हुआ तो क्या उन्होंने ऐसा कुछ किया है, जो लोगों को बेहतरी के लिए बदल सके? न केवल अपने परिवार व परिचितों, बल्कि उनके लिए भी जिनसे वे नहीं मिले।

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