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Justice BV Nagarathna: 'जटिल नियम सेंसरशिप से ज्यादा घातक', जस्टिस नागरत्ना ने प्रेस की स्वतंत्रता पर दिया जोर
Fri, 27 Feb 2026 11:47 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 27 Feb 2026 11:47 PM IST
सार
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि मीडिया को बिना किसी डर के काम करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि आर्थिक नीतियां और जटिल नियम प्रेस की आजादी के लिए सेंसरशिप से भी बड़ा खतरा हैं। उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र और संविधान के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
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जस्टिस बीवी नागरत्ना
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया किसी भी तरह के डर, दबाव या प्रभाव में रहकर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। उन्होंने कहा कि प्रेस की आजादी के लिए सबसे बड़ा खतरा सीधे सेंसरशिप से नहीं, बल्कि नियमों, स्वामित्व से जुड़े कानूनों, लाइसेंसिंग सिस्टम और आर्थिक नीतियों से होता है।
आईपीआई इंडिया अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म 2025 के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रेस को नियंत्रित करने के हालिया प्रयासों के पीछे केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं। उन्होंने समझाया कि कोई मीडिया संस्थान कानून के तहत सरकार की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हो सकता है, लेकिन आर्थिक दबाव ऐसा माहौल बना सकता है कि उसके लिए आलोचना करना बहुत महंगा या मुश्किल हो जाए।
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उन्होंने यह भी कहा कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का संवैधानिक आधार बहुत महत्वपूर्ण है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क), जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, और अनुच्छेद 19(1)(घ), जो किसी भी पेशे या व्यवसाय को करने की स्वतंत्रता देता है, से मिलकर बनता है।गौरतलब है कि जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बनने वाली हैं। इस कार्यक्रम में पूर्व जस्टिस एमबी लोकुर और पीटीआई के प्रधान संपादक विजय जोशी ने भी अपने विचार रखे।
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आईपीआई इंडिया अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म 2025 के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रेस को नियंत्रित करने के हालिया प्रयासों के पीछे केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं। उन्होंने समझाया कि कोई मीडिया संस्थान कानून के तहत सरकार की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हो सकता है, लेकिन आर्थिक दबाव ऐसा माहौल बना सकता है कि उसके लिए आलोचना करना बहुत महंगा या मुश्किल हो जाए।
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उन्होंने यह भी कहा कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का संवैधानिक आधार बहुत महत्वपूर्ण है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क), जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, और अनुच्छेद 19(1)(घ), जो किसी भी पेशे या व्यवसाय को करने की स्वतंत्रता देता है, से मिलकर बनता है।गौरतलब है कि जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बनने वाली हैं। इस कार्यक्रम में पूर्व जस्टिस एमबी लोकुर और पीटीआई के प्रधान संपादक विजय जोशी ने भी अपने विचार रखे।
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