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नॉट लाइक दिस... यह वो शब्द हैं जो अब सुप्रीम कोर्ट में बमुश्किल ही सुनाई देंगे

Thu, 03 Sep 2020 06:20 AM IST
योगेश साहू राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली। 
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली।  Published by: योगेश साहू Updated Thu, 03 Sep 2020 06:20 AM IST
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Justice Arun Mishra Retired Now, May Be His Wordings Not Like This We Will Not Heard Again In The Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

नॉट लाइक दिस... अब यह शब्द सुप्रीम कोर्ट में बमुश्किल सुनाई देगा। जस्टिस अरुण मिश्रा के ये चंद शब्द सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को संयमित और शिष्टाचार में रहने को मजबूर करते थे। बुधवार को जस्टिस मिश्रा की सुप्रीम कोर्ट में पारी खत्म हो गई।

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जस्टिस मिश्रा बुधवार को सेवानिवृत्त हो गए। शायद यही वजह रही कि अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को भी जस्टिस मिश्रा के लिए 'आयरन जज' के अलावा और कोई शब्द नहीं मिला। करीब छह वर्ष तक सुप्रीम कोर्ट में जज रहे जस्टिस मिश्रा को यह कतई बर्दाश्त नहीं था कि कोई अदालत के डेकोरम को तोड़े।
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जब कभी भी वकील इसका उल्लंघन करते, तो उनके लिए जस्टिस मिश्रा की नाराजगी से बच पाना असंभव था। ऐसी किसी स्थिति में वे अक्सर कहा करते.. नॉट लाइक दिस.. आई कैन नॉट अलॉउ दिस..। जस्टिस मिश्रा की कोर्ट में एक वकील के लिए जितना अहम कानूनी ज्ञान होता था, उतना ही उनके लिए शिष्टाचार में रहना भी महत्वपूर्ण था।
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जस्टिस मिश्रा की नाराजगी जताने के इस अंदाज की चर्चा सुप्रीम कोर्ट के गलियारे में हुआ करती थी। जस्टिस मिश्रा को शोरशराबा कतई पसंद नहीं था। उन्होंने कई ऐसे मामलों की सुनवाई की जिन मामलों में सैकड़ों वकील होते थे, इसमें आम्रपाली मामला महत्वपूर्ण है। लेकिन इसके बावजूद उनके कोर्ट रूम में कभी शोरशराबा नहीं हुआ। उनकी कोर्ट में वकील संयमित रहते थे।

वकील पुरुष हो या महिला, सब एक समान
ऐसा नहीं था कि जस्टिस मिश्रा की नाराजगी का यह अंदाज सिर्फ पुरुष वकीलों के लिए था। वह महिला वकीलों के साथ भी उतनी ही सख्ती से पेश आते थे। इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता था कि वकील जूनियर हो या सीनियर और चाहे वो कोई लॉ ऑफिसर ही क्यों न हो। ऐसा भी नहीं है कि जस्टिस मिश्रा वकीलों की बातें नहीं सुनते थे और वकीलों का सम्मान नहीं करते थे। जस्टिस मिश्रा उन जजों में शामिल रहे जो अक्सर वकीलों को भी 'सर' कहकर संबोधित किया करते थे।

...जब साथी जज से ठन गई
जस्टिस मिश्रा शुरू से ही 'वोकल' थे। सुप्रीम कोर्ट में शुरुआती समय में जमानत के एक मामले को लेकर पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस वी गोपाल गौड़ा से ओपन कोर्ट में उनकी ठन गई थी। इस मसले को लेकर जस्टिस गोपाल गौड़ा और जस्टिस मिश्रा की राय अलग थी।


कहना गलत नहीं होगा कि वास्तव में ओपन कोर्ट में दोनों जजों के बीच झड़प हो गई थी। बता दें कि जस्टिस गोपाल गौड़ा भी उन सेवानिवृत्त जजों में शामिल थे, जिन्होंने हाल ही में प्रशांत भूषण का अवमानना मामले में खुलकर समर्थन किया था।

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