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Justice Oka: ठाणे में अवैध बैनर देख नाराज हुए जस्टिस अभय एस ओका, कहा- बॉम्बे HC के आदेश का पालन नहीं हो रहा

Sat, 08 Mar 2025 08:56 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे Published by: बशु जैन Updated Sat, 08 Mar 2025 08:56 PM IST
सार

महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान अवैध बैनर लगे देखकर जस्टिस ओका ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि बैनर लगाने से पहले अनुमति लेना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। नगर निकायों को ऐसे बैनरों को हटाना चाहिए। 

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Justice Abhay Oka got angry after seeing illegal banners in Thane, said- Bombay HC order is not being followed
न्यायमूर्ति अभय ओका - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के जज अभय एस ओका ने शनिवार को अवैध होर्डिंग और बैनर लगाए जाने पर नाराजगी जताई। महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान अवैध बैनर लगे देखकर जस्टिस ओका ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि बैनर लगाने से पहले अनुमति लेना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। नगर निकायों को ऐसे बैनरों को हटाना चाहिए। 

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ठाणे में मीरा भायंदर टाउनशिप में मजिस्ट्रेट अदालत के उद्घाटन मौके पर जस्टिस ओका ने मीडिया प्रतिनिधियों और अन्य लोगों में धक्का-मुक्की होने पर ही नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस पर फटकार भी लगाई। इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति करने और अदालतों में बुनियादी ढांचा और आधुनिक तकनीक प्रदान करने के लिए कहा।
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कार्यक्रम में जस्टिस अभय एस ओका ने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर जाते समय मैंने कार्यक्रम में मेहमानों के स्वागत के लिए लगाए गए कई बैनर देखे। शुरू में देखकर खुशी हुई, लेकिन बाद में एहसास हुआ कि यह बैनर अवैध थे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि बिना पूर्व अनुमति के कोई भी बैनर या होर्डिंग नहीं लगाया जाना चाहिए। लेकिन इनमें से किसी भी होर्डिंग पर आवश्यक अनुमति संख्या नहीं थी, जिससे वे अवैध थे। स्थानीय नगर निकाय को ऐसे बैनर हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में पट्टिका के अनावरण के दौरान मैंने देखा कि एक अनियंत्रित भीड़ कई महिलाओं को धक्का दे रही थी। जस्टिस ओका ने जानना चाहा कि अगर भविष्य में ऐसी अनुशासनहीनता जारी रही तो क्या न्यायपालिका से संबंधित कार्यक्रमों में मीडिया प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाना चाहिए? यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम या अभिनेता का कार्यक्रम नहीं है। यह न्यायपालिका का कार्य है जहां अनुशासन जरूरी है। मीडिया पेशेवरों को ऐसे कार्यक्रमों के दौरान शिष्टाचार बनाए रखना चाहिए। न्यायपालिका अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विशेष रूप से मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

न्यायमूर्ति ओका ने बॉम्बे हाईकोर्ट की इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के अनुभव बताए। उन्होंने बताया कि कैसे प्रस्तावों को अक्सर देरी और नौकरशाही बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि 2018 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद हाईकोर्ट के नए भवन के निर्माण के लिए 25 एकड़ जमीन अनिवार्य की गई थी, मार्च 2025 तक केवल चार से पांच एकड़ जमीन ही उपलब्ध कराई गई है। यह महाराष्ट्र में कार्यान्वयन की धीमी गति को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में अभी भी न्यायाधीशों की भारी कमी है। उन्होंने 2016 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया। इसमें कहा गया था कि समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए भारत में प्रति 10 लाख लोगों पर 50 जज होने चाहिए, और कहा कि यह आंकड़ा प्रति 10 लाख लोगों पर केवल 21 से 22 जज है, जो आवश्यक अनुपात से काफी कम है।


उन्होंने कहा कि न्याय में देरी को रोकने के लिए, राज्य सरकार को अधिक जजों की नियुक्ति, बुनियादी ढांचा प्रदान करने और अदालतों में आधुनिक तकनीक को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक अराधे, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक और अन्य मौजूद थे।


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