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जजों की नियुक्ति: CJI से रविशंकर ने जताई असहमति, रोहतगी ने बताई लक्ष्मण रेखा

Sat, 26 Nov 2016 09:17 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 26 Nov 2016 09:17 PM IST
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Judiciary Vs Center: Ravi Shankar Prasad & Mukul Rohatgi take a dig at CJI TS Thakur

देश के उच्च न्यायालयों में 500 पदों पर जजों की नियुक्तियां लंबित है। जजों के न होने से कोर्ट रूम खाली पड़े है। सरकार से उम्मीद है कि जल्द ही जजों के रिक्त पदों को भरा जाएगा। यह चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर का कहना है। लेकिन शनिवार को कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने चीफ जस्टिस की बात पर पलटवार किया तो न्यायपालिका और सरकार के बीच मतभेद एक बार फिर उजागर हो गए। अटॉर्नी जनरल ने मुकुल रोहतगी ने यहां तक कहा कि न्यायपालिका और तमाम संस्थानों के लिए एक लक्ष्मण रेखा तय है, इसके लिए उन्हें आत्मावलोकन करना चाहिए। 

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रोहतगी के लक्ष्मण रेखा वाले बयान को सरकार के बयान के तौर पर देखा जा रहा है। चीफ जस्टिस ठाकुर की बात पर कानून मंत्री का असहमति जताना भी इस ओर इशारा कर रहा है।
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प्रसाद ने दलील दी कि 1990 के बाद से दूसरी दफा हाईकोर्टों में सबसे ज्यादा 120 जजों की नियुक्तियां हुई हैं। 2013 में 121 जजों की नियुक्तियां हुई थीं। उन्होंने कहा कि वह सम्मानपूर्वक चीफ जस्टिस की बात से असहमति जताते हैं। उन्होंने यह जरूर माना कि देश की निचली अदालतों में जजों के करीब 5000 पद खाली हैं, लेकिन इसके लिए नियुक्तियां न्यायपालिका ही करती है।

वहीं चीफ जस्टिस के मुताबिक जजों की कमी से ट्रिब्युनल कमजोर हो रहा है तो वहीं कमजोर इनफ्रास्ट्रक्चर भी मामलों के लंबे खिंचने की वजह है।

'अदालतों में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं'

Judiciary Vs Center: Ravi Shankar Prasad & Mukul Rohatgi take a dig at CJI TS Thakur
चीफ जस्टिस जीएस ठाकुर

जजों की नियुक्ति के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में जजों की नियुक्ति पर ब्रेक लगा हुआ है। स्थिति यह आ गई है कि कोई भी रिटायर जज ट्रिब्यूनल को हेड नहीं करना चाहता। 

उन्होंने कहा कि कई कोर्ट खाली हैं। ऐसे में अपने रिटायर साथियों को वहां भेजने में तकलीफ होती है। सरकार कोर्ट को किसी भी तरह की सुविधा देने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि हम सम्मान के साथ उनके (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) साथ असहमति व्यक्त करते हैं, इस साल 120 जजों की नियुक्ति की गई है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि 500 कोर्ट खाली पड़े हैं। वहीं, कई कोर्ट में मूलभूत सुविधाओं की भी भारी कमी है। न्याय की अहमियत होती है। जिनके पास लोगों के अधिकारों को प्रभावित करने का अधिकार है उन्हें इस जिम्मेदारी को समझना चाहिए।

क्यों अब तक नहीं हो सकी है जजों की नियुक्ति

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केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच जजों की नियुक्ति को लेकर खींचतान काफी समय से जारी है। हाईकोर्ट में जजों की भर्ती के लिए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने जिन जजों के नाम की सिफारिश की थी, उनमे से आधे से ज्यादा नामों को केंद्र सरकार ने अपनी मंजूरी नहीं दी है।
 
सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि जजों के कॉलेजियम के भेजे गए 77 नामों में से सरकार ने 43 नामों को लौटा दिया है जबकि 34 जजों की नियुक्ति केंद्र सरकार ने कर दी है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2015 में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के परामर्श से संशोधित मेमोरेंडम ऑफ प्रॉशिजर बनाने के लिए कहा था।

यहीं नहीं 15 अगस्त को प्रधानमंत्री के भाषण के ठीक बाद चीफ जस्‍टिस ठाकुर ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने अपने भाषण में न्यायपालिका में सुधार के बारे में कोई बात नहीं की।

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