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न्यायमूर्ति रमन्ना बोले, न्यायपालिको को आतंकवाद, साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर प्रतिक्रिया देना जरूरी
Sat, 22 Feb 2020 05:54 PM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sat, 22 Feb 2020 05:54 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ न्यायाधीश ने कहा कि आतंकवाद, साइबर अपराध, पर्यावरणीय नुकसान और स्वास्थ्य समस्याएं भारतीय उपमहाद्वीप सहित पूरी दुनिया में बड़े मुद्दे हैं और न्यायपालिका को कानून को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त तरीके से उस पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
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जस्टिस रमना
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन. वी. रमन्ना ने कहा कि आतंकवाद उन मुख्य मुद्दों में शामिल है जिसने दुनिया के हर हिस्से को प्रभावित किया है और इसका यह खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमारी वैश्विक दुनिया काफी निकट है। मुद्दे एक जैसे हैं और समाधान भी एकमत से करने की जरूरत है। भारतीय उपमहाद्वीप सहित पूरी दुनिया में जो बड़े मुद्दे हैं उनमें आतंकवाद, साइबर अपराध, पर्यावरणीय नुकसान और स्वास्थ्य शामिल हैं। उदाहरण के लिए आतंकवाद एक मुख्य मुद्दा है जिसने दुनिया के हर हिस्से को प्रभावित किया है और यह खत्म होता नहीं दिख रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में न्यायमूर्ति रमन्ना ने कहा कि न्यायपालिका को अन्वेषी सिद्धांतों के माध्यम से इस पर उपयुक्त प्रतिक्रिया देनी चाहिए ताकि आतंकवाद को दरकिनार किया जा सके, साथ ही कानून का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण में कानून का पालन आवश्यक है और सीमा पार व्यापार, नागरिकों, सामान की आवाजाही और बढ़ते निवेश के साथ देशों के बीच मजबूत विश्वास की आवश्यकता है।
न्यायमूर्ति रमन्ना ने कहा कि कानून पर आधारित संस्थानों का निर्माण कर विश्वास बनाया जा सकता है जिससे सुरक्षित वातावरण बनता है। न्यायाधीश ने कहा कि हमारे फैसलों को ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, बांग्लादेश और अन्य देशों ने उल्लेखनीय रूप से उद्धृत किया है।
उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति माइकल कर्बी का विशेष जिक्र करना जरूरी है जिन्होंने भारतीय न्यायपालिका का अध्ययन किया और ऑस्ट्रेलिया के उच्च न्यायालयों के फैसलों में प्रमुखता से हमारे फैसलों का जिक्र किया है।