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जेल भेजने से पहले जजों को मानवीय रुख अपनाना चाहिए: SC

Wed, 07 Feb 2018 01:42 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Feb 2018 01:42 AM IST
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Judges should adopt human stand before punishment says Supreme court
सुप्रीम कोर्ट

‘जमानत की जगह जेल’ को न्यायशास्त्र का कायदा बनने को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जेल भेजने का आदेश देने से पहले जजों को मानवीय नजरिया अपनाना चाहिए। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि न्यायशास्त्र का मूल यही है कि लोगों को निर्दोष मान कर चलना चाहिए। लिहाजा अदालत को आरोपी को जेल भेजने से पहले कुछ बिंदुओं पर गौर करना चाहिए। 

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पीठ ने यह भी कहा कि न्यायशास्त्र का एक और महत्वपूर्ण पहलू है कि जमानत देना नियम है और जेल या सुधारगृह भेजना अपवाद, लेकिन दुख की बात है कि मूल बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है। पीठ ने कहा कि यही वजह है कि लोगों को लंबे समय के लिए कैद में डाल दिया जाता है। यह कहीं से भी उचित नहीं है। न तो न्यायशास्त्र के लिए और न ही समाज के लिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद-21 लोगों को सम्मान से जीने का हक देता है। इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि जेल में कैदियों की भीड़ है, जिससे कई परेशानी पैदा होती हैं।
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यह है मामला
शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा मामले के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। गोरखपुर की निचली अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट से गिरफ्तारी से संरक्षण न मिल पाने के कारण आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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जमानत देना जज का हक, पर शर्तें कठोर न हों: सुप्रीम कोर्ट

Judges should adopt human stand before punishment says Supreme court
सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने कहा कि जमानत देना या न देना जज का अधिकार है। यह अधिकार बंधन मुक्त होता है, लिहाजा जज को अपने अधिकार का प्रयोग न्यायसंगत और मानवीय पहलू को ध्यान में रखकर करना चाहिए। पीठ ने कहा कि जमानत की शर्तें कठोर नहीं होनी चाहिए, ताकि पालन करने में मुश्किल हो। 

गरीब ही क्यों न हो, जेल जाने से प्रतिष्ठा पर दाग लगता है
पीठ ने कहा कि जमानत पर फैसला देने से पहले आरोपी की पृष्ठभूमि, अपराध में भूमिका के साथ-साथ गरीबी आदि बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए। जज को इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि भले ही आरोपी कितना भी गरीब हो, लेकिन जेल में डालने से उसकी प्रतिष्ठा और सम्मान पर धब्बा लगता है।
 
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