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नौकरियों पर खतरा नहीं बनेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऐसे देगा फायदा

Wed, 19 Sep 2018 08:26 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 19 Sep 2018 08:26 PM IST
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Job profiles will be replaced by Artificial Intelligence, NASSCOM will re-evaluate

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बार-बार सवाल उठ रहे हैं कि इससे नौकरियों पर खतरा बढ़ेगा। नीति आयोग का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से नौकरियों का स्वरूप बदल जाएगा और रोजगार के नए मौके उपलब्ध होंगे। साथ ही उनकी मदद के लिए कंप्यूटर और रोबोट भी होंगे। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम के चलते देरी से निबटने वाले तुरंत किए जा सकेंगे। वहीं नैसकॉम भी आईटी वर्कर्स को फिर से रि-स्किल करने की बात कह रहा है।

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इतिहास से लें सबक

मंगलवार को नैसकॉम के डीप टेक्नोलॉजी पर आयोजित सेमीनार में बोलते हुए नीति आयोग में एडवाइजर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लेडी (एआई) के नाम से मशहूर अन्ना रॉय ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से नौकरियों के नए मौके मिलेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच भ्रम को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है। अन्ना ने 30 साल पहले का इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि जब देश में कंप्यूटर का दौर शुरू होने वाला था, तब पब्लिक सेक्टर बैंकों में जॉब्स जाने को लेकर कई हड़तालें हुईं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हमें इतिहास से सबक लेने की जरूरत है। नई टेक्नोलॉजी आने से जॉब प्रोफाइल बदलेगा और नई तरह की नौकरियां पैदा होंगी। 
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री-स्किल करने की जरूरत

वहीं नैसकॉम की अध्यक्ष देबजानी घोष का कहना है कि नई टेक्नोलॉजी आने से लोगों के लिए नए रोजगार पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि डीप टेक्नोलॉजी से कम से कम 55 तरह की नए जॉब प्रोफाइल पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि अगले कुछ सालों में नैसकॉम की पहली प्राथमिकता होगी कि फ्यूचर टेक्नोलॉजी के लिए देश के 40 लाख आईटी वर्कर्स को फिर से रि-स्किल किया जाए। नैसकॉम के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती भी होगी कि अगले चार-पांच साल में कम से कम 20 लाख लोगों को पहले रि-स्किल किया जाना है। 
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एसीलेरेट 10एक्स लॉन्च

इससे पहले नैसकॉम ने मंगलवार को देश के स्टार्ट अप्स के लिए एसीलेरेट 10एक्स के दूसरे चरण को लॉन्च करने का ऐलान किया। नैसकॉम का कहना है कि उनका लक्ष्य है कि साल 2023 तक देश में 10 हजार फंडेड स्टार्ट-अप्स हों। उनमें 20 गुना सीड फंडिंग हो। नैसकॉम के मुताबिक 2017 में टैक स्टार्ट अप्स की संख्या 25-30 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ कर 700 से ऊपर पहुंच गई है। वहीं आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस स्टार्टअप्स में फंडिंग 70 प्रतिशत बढ़ी है। तकरीबन देश की 50 फीसदी फर्म्स अपने उत्पादों में आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर जोर दे रही हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स यूनिट्स (आईओटी) ने तेजी से बढ़त बनाई है और अनुमान है कि 2020 तक इन यूनिट्स की संख्या 60 मिलियन से बढ़ कर 1.9 बिलियन तक पहुंच जाएगी। 


स्टार्ट-अप्स में भारत तीसरे नंबर पर

देबजानी घोष ने बताया कि डीप टेक्नोलॉजी के तहत एसीलेरेट 10एक्स में कम से कम 3 गुना टेक स्टार्टअप्स हो, साथ ही 50 गुना डीप टेक पैटेंट्स हों, 30 गुना डीप टैक फंडिंग हो और इनोवेशन में भारत की रैंकिंग टॉप 25 में हो। देबजानी के मुताबिक पिछले कुछ सालों में स्टार्ट-अप्स इकोसिस्टम में भारत की रैंकिंग तीसरे नंबर की है। उन्होंने बताया कि फेसबुक, गूगल, आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन वेब सर्विसेज पूरे देश में डीप इंजीनियरिंग टैक लैब्स लगाने जा रही हैं। उनका कहना है डीप टैक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दोनों ही देश का आर्थिक स्वरूप बदलने वाले साबित होंगे। उन्होंने बताया कि इस प्रोग्राम के तहत देश के 10 हजार स्टार्ट-अप्स को मेंटॉरशिप दी जाएगी और भावी टेक्नोलॉजी के लिए तैयार किया जाएगा।

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