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जेएनयू हिंसा: एक साथ हुई थी रामनवमी की पूजा और इफ्तार, फिर बाहरी लोगों ने लगाई कावेरी में ‘आग’
Mon, 11 Apr 2022 08:23 PM IST
गौरव पाण्डेय
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 11 Apr 2022 08:23 PM IST
सार
हमले के लिए एबीवीपी और लेफ्ट छात्र संगठनों ने एक दूसरे पर आरोप लगाया है, लेकिन दोनों ने ही स्वीकार किया है कि हमलावरों में आधे से ज्यादा लोग बाहरी थे।
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जेएनयू हिंसा पर बात करते एबीवीपी के सदस्य छात्र
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कावेरी हॉस्टल में 10 अप्रैल रविवार को रामनवमी और इफ्तार पार्टी एक साथ मनाई गई थी। एक तरफ हिंदू छात्रों का एक वर्ग रामनवमी पर भजन-कीर्तन कर रहा था तो ठीक उसी समय मेस के दूसरे हिस्से में मुस्लिम छात्र इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रहे थे। सब कुछ बिल्कुल सामान्य और खुशनुमा माहौल में हुआ। लेकिन शाम 7:30 बजे जैसे ही रामनवमी पूजा और इफ्तार समाप्त कर छात्र अपने-अपने कमरों की ओर जाने लगे, रास्ते में पथराव और डंडेबाजी शुरू हो गई।
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हमले के लिए एबीवीपी और लेफ्ट छात्र संगठनों ने एक दूसरे पर आरोप लगाया है, लेकिन दोनों ने ही स्वीकार किया है कि हमलावरों में आधे से ज्यादा लोग बाहरी थे। यानी हमले को पूरी साजिश के साथ अंजाम दिया गया और इसमें बाहर से आए लोगों ने जेएनयू छात्रों को बुरी तरह मारा-पीटा। इसके पूर्व भी गत वर्ष जनवरी में जेएनयू में इसी तरह की हिंसा हुई थी। उसमें भी बाहरी लोगों के द्वारा हिंसा किए जाने की बात सामने आई थी। लेकिन उस मामले में अब तक अपराधियों की पहचान नहीं हो पाई, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। शायद उसी का परिणाम है कि एक बार फिर जेएनयू को सुलगाने की कोशिश की गई।
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लेफ्ट का आरोप
वामपंथी छात्रों का आरोप है कि यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि रामनवमी के दिन पूजा करने में बाधा खड़ी की गई थी। कावेरी हॉस्टल के अध्यक्ष नवीन कुमार ने अमर उजाला से कहा कि पूजा को लेकर किसी तरह का विवाद नहीं था। पूजा होने के बाद सभी छात्रों ने प्रसाद भी खाया था। तब तक कोई विवाद नहीं हुआ था। लेकिन बाद में पूरा विवाद खाने को लेकर खड़ा हुआ।
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एबीवीपी के सदस्य छात्र मांस न परोसे जाने की जिद पर अड़े थे। जबकि 15 दिन पहले छात्रों की कमेटी के द्वारा पूरा मीनू तय हो चुका था। अंतिम समय में डिश में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता था। लेकिन रविवार के दिन अचानक एबीवीपी छात्र मांस न बनाए जाने को लेकर अड़ गए थे। इसके लिए मेस कर्मचारियों को धमकी दी जा रही थी। जब वार्डन से इस बात की शिकायत की गई तब उन्होंने सभी प्रकार के भोजन बनाने की बात कही थी। लेकिन जब छात्र खाने के लिए पहुंचे तो उन्हें मांस नहीं मिला और उसके बाद पूरा विवाद खड़ा हुआ।
मांस खाने पर विरोधी दावे
एबीवीपी के सदस्य छात्रों का कहना है कि हॉस्टल के छात्रों ने आपसी सहमति से एक दिन मांस न बनाने को लेकर सहमति दी थी। इसमें मुस्लिम छात्र भी शामिल थे। अन्य हॉस्टलों के मेस में रविवार को भी मांस परोसा गया था, लेकिन कावेरी हॉस्टल के मेस में मांस नहीं बना था। इसी को लेकर लेफ्ट छात्रों ने विवाद खड़ा किया और हमले का एक बहाना तैयार किया गया।
रविवार के दिन जेएनयू के सभी हॉस्टल के मेस में नॉन-वेज और पनीर सब्जी का विकल्प दिया जाता है। छात्र अपनी-अपनी पसंद से नॉन वेज या पनीर सब्जी खाने को चुन सकते हैं। खाने का मेन्यू हॉस्टल के छात्रों की ही एक टीम तय करती है और इसमें जेएनयू प्रशासन का कोई दखल नहीं होता है।
एबीवीपी ने लगाया लेफ्ट पर आरोप
एबीवीपी छात्र नेता उमेश चंद्र अजमीरा ने अमर उजाला को बताया कि मेस में एक साथ पूजा और इफ्तार पार्टी मनाई गई। यह इस बात का प्रमाण है कि छात्रों को न पूजा से कोई परेशानी थी और न ही इफ्तार से। यदि कोई परेशानी थी तो लेफ्ट छात्रों को थी जो किसी भी कीमत पर परिसर में पूजा न किए जाने को लेकर लगातार धमकियां दे रहे थे। यहां तक धमकी दी गई थी कि यदि पूजा करने की कोशिश की गई तो उस समय हवनकुंड में मांस और ह़ड्डियां फेंक दिए जाएंगे। मां दुर्गा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की गई थीं।
लेकिन पूजा के लिए भारी संख्या में छात्रों के इकट्ठा होने के कारण वे अपनी कोशिशों में सफल नहीं हो सके। लेकिन जब पूजा समाप्त कर छात्र अपने-अपने कमरों की तरफ बढ़ रहे थे, तब उन पर हमला शुरू कर दिया गया। एबीवीपी नेता का आरोप है कि इसी तरह की हिंसा कर लेफ्ट संगठन स्वयं को प्रभावी और प्रासंगिक बनाए रखना चाहते हैं जो अपनी राष्ट्रविरोधी विचारधारा के कारण लगातार छात्रों के बीच अलोकप्रिय होते जा रहे हैं।
अजमीरा ने बताया कि पूजा का समय शाम साढ़े तीन बजे रखा गया था। लेकिन इसके पहले ही लेफ्ट छात्र संगठनों के लोग हॉस्टल और मेस के आसपास इकट्ठा होने शुरू हो गए थे। वे छात्रों को भी पूजा में शामिल होने से रोक रहे थे। लेकिन इसके बाद भी छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। इससे वे पूजा नहीं रोक सके और शाम छः बजे के करीब पूजा शुरू हुई। लेकिन इससे नाराज लेफ्ट छात्रों ने बाद में पहचान कर छात्रों को पीटा।
खाने पर विवाद क्यों
जेएनयू की लेफ्ट लॉबी की छात्रा कविता यादव ने कहा कि खाने पर विवाद खड़ा करना तंग मानसिकता का परिचायक है। जब तक मानव समाज सभ्यता के दायरे में नहीं पहुंचा, हर व्यक्ति मांसाहारी ही था। आज भी समाज के अलग-अलग वर्गों में पूजा के दिन बलि देने और उसका मांस प्रसाद खाने की परंपरा है। बंगाल और बिहार के कई समुदायों में आज भी यह परंपरा देखी जा सकती है। ऐसे में मांस खाने पर विवाद खड़ा करना व्यर्थ है और छात्रों को इससे बचना चाहिए। उन्होंने इस पूरे विवाद को भगवा लॉबी की ओर से अपना प्रचार करने की एक रणनीति करार दिया।