{"_id":"64363d9bd9d238a29a04ca54","slug":"jhamu-jatra-sambit-patra-who-joined-the-goddess-worship-in-odisha-walked-barefoot-on-coal-embers-as-a-devot-2023-04-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhamu Jatra: ओडिशा में देवी पूजा में शामिल हुए संबित पात्रा, भक्त बनकर कोयले की अंगारों पर नंगे पांव चले","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Jhamu Jatra: ओडिशा में देवी पूजा में शामिल हुए संबित पात्रा, भक्त बनकर कोयले की अंगारों पर नंगे पांव चले
Wed, 12 Apr 2023 12:11 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Wed, 12 Apr 2023 12:11 PM IST
सार
झामू यात्रा बैशाख महीने में मनाया जाता है। इस दिन भक्त अपनी ईच्छाओं को पूरा करने के लिए देवी मां की पूजा अर्चना करते हैं।
विज्ञापन
Sambit Patra
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा मंगलवार को ओडिशा के झामू जात्रा पर जलते कोयले पर चले। वह पुरी में देवी पुजा में शाामिल हुए थे, जहां झामू जात्रा में जलते कोयले पर चलने की परंपरा है। इसे लेकर भाजपा के प्रवक्ता ने ट्वीट भी किया।
अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि शक्ति पूजा हमारी सनातन संस्कृति एवं परंपरा का अहम हिस्सा है, पुरी जिले के समंग पंचायत के रेबती रमण गांव में आयोजित यह दण्ड और झामू यात्रा इसी प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। इस तीर्थयात्रा में अग्नि पर चलकर मां की पूजा-अर्चना एवं आशीर्वाद प्राप्त कर, खुद को धन्य अनुभव कर रहा हूं।
भक्त बनकर अंगारों पर चले संबित पात्रा
पुरी में आयोजित देवी पूजा के दौरान जहां एक तरफ भक्त अंगारों में चल रहे थे, वहीं संबित पात्रा को देखकर गांववाले चौंक गए। पात्रा वहां पहुंचकर एक भक्त की तरह कोयले के अंगारो पर नंगे पांव चले। इसके बाद उन्होंने गांव और गांववालों के लिए पूजा-अर्चना कर सलामती के लिए आशीर्वाद मांगा। इसके बाद भाजपा के प्रवक्ता ने मां झड़ेश्वरी के भी दर्शन किए।
क्या है झामू जात्रा
झामू जात्रा बैशाख महीने में मनाया जाता है। इस दिन भक्त अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए देवी मां की पूजा अर्चना करते हैं। इतना ही नहीं देवी मां को खुश करने के लिए भक्त कोयले की अंगारों पर भी चलते हैं। झामू जात्रा पाणा संक्रांति के दिन खत्म होता है।
पाणा संक्रांति उड़िया लोगों का नव वर्ष है। यह त्योहार शिव और हनुमान मंदिरों के दर्शन के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग तीर्थस्थलों में नहाते हैं और विभिन्न पारंपरिक कला या नृत्य में भाग लेते हैं। पाणा संक्रांति के दिन एक विशेष पेय का आयोजन होता है जो कि आम-दूध-दही-नारियल से बना होता है। इसे पाना कहा जाता है, जो कि इस त्योहार के नाम का स्त्रोत है।
विज्ञापन
अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि शक्ति पूजा हमारी सनातन संस्कृति एवं परंपरा का अहम हिस्सा है, पुरी जिले के समंग पंचायत के रेबती रमण गांव में आयोजित यह दण्ड और झामू यात्रा इसी प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। इस तीर्थयात्रा में अग्नि पर चलकर मां की पूजा-अर्चना एवं आशीर्वाद प्राप्त कर, खुद को धन्य अनुभव कर रहा हूं।
विज्ञापन
शक्ति पूजा हमारी सनातन संस्कृति एवं परंपरा का अहम हिस्सा है, पुरी जिले के समंग पंचायत के रेबती रमण गांव में आयोजित यह दण्ड और झामू यात्रा इसी प्राचीन परंपरा का प्रतीक है।
विज्ञापन विज्ञापन
इस तीर्थयात्रा में अग्नि पर चलकर मां की पूजा-अर्चना एवं आशीर्वाद प्राप्त कर, खुद को धन्य अनुभव कर रहा हूँ।… pic.twitter.com/oTciqW61Gj — Sambit Patra (@sambitswaraj) April 11, 2023
भक्त बनकर अंगारों पर चले संबित पात्रा
पुरी में आयोजित देवी पूजा के दौरान जहां एक तरफ भक्त अंगारों में चल रहे थे, वहीं संबित पात्रा को देखकर गांववाले चौंक गए। पात्रा वहां पहुंचकर एक भक्त की तरह कोयले के अंगारो पर नंगे पांव चले। इसके बाद उन्होंने गांव और गांववालों के लिए पूजा-अर्चना कर सलामती के लिए आशीर्वाद मांगा। इसके बाद भाजपा के प्रवक्ता ने मां झड़ेश्वरी के भी दर्शन किए।
क्या है झामू जात्रा
झामू जात्रा बैशाख महीने में मनाया जाता है। इस दिन भक्त अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए देवी मां की पूजा अर्चना करते हैं। इतना ही नहीं देवी मां को खुश करने के लिए भक्त कोयले की अंगारों पर भी चलते हैं। झामू जात्रा पाणा संक्रांति के दिन खत्म होता है।
पाणा संक्रांति उड़िया लोगों का नव वर्ष है। यह त्योहार शिव और हनुमान मंदिरों के दर्शन के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग तीर्थस्थलों में नहाते हैं और विभिन्न पारंपरिक कला या नृत्य में भाग लेते हैं। पाणा संक्रांति के दिन एक विशेष पेय का आयोजन होता है जो कि आम-दूध-दही-नारियल से बना होता है। इसे पाना कहा जाता है, जो कि इस त्योहार के नाम का स्त्रोत है।