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Jewar Airport Bhoomi Pujan: भाजपा ने कर दी यूपी चुनाव के लिए टोन सेट, क्या एक एयरपोर्ट से दो-दो चुनाव निशाने पर
Thu, 25 Nov 2021 02:32 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 25 Nov 2021 02:32 PM IST
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पीएम मोदी ने जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास किया
- फोटो :
ANI
विस्तार
उत्तर प्रदेश चुनाव आते ही प्रदेश में विकास परियोजनाओं की झड़ी लग गई है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को गौतम बुद्ध नगर के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास किया। इस एयरपोर्ट का विकास यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) ने किया है। उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ मिलकर पीपीपी मॉडल के तहत एयरपोर्ट का विकास किया जा रहा है। यूपी चुनाव से पहले जेवर एयरपोर्ट को सबसे बड़ा चुनावी सौगात माना जा रहा है।यूपी सरकार का कहना है कि अपने बुनियादी ढांचे और क्षमता के कारण, यह एयरपोर्ट राज्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगी। एयरपोर्ट 1300 हेक्टेयर से अधिक में फैला हुआ है और पहले चरण के पूरा होने पर एक साल में लगभग 1.2 करोड़ यात्रिया यहां से सफर कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को घोषणा की, कि अगले आम चुनाव होने से पहले इसे 2024 तक पूरा कर लिया जाएगा। जेवर एयरपोर्ट के निर्माण से भाजपा एक साथ यूपी चुनाव और लोकसभा चुनाव दोनों पर लक्ष्य साधने की कोशिश कर रही है।
मुजफ्फरनगर में खचाखच भरा था जीआईसी मैदान (फाइल फोटो)
- फोटो :
amar ujala
पश्चिमी यूपी किसान आंदोलन के केंद्र में था
पिछले शुक्रवार को तीन विवादस्पद कृषि वापस लेने के फैसले के बाद पीएम मोदी का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह पहला कार्यक्रम था। इन कानूनों को रद्द किए जाने की मांग को लेकर देश भर के किसान पिछले एक साल से विरोध कर रहे थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश तीन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के केंद्रों में से एक था। किसानों ने सितंबर में मुजफ्फरनगर में किसान पंचायत की थी। अनुमान है कि इस महापंचायत में चार से पांच लाख किसान पहुंचे थे।
भाजपा के रणनीतिकारों ने अंदाजा लगा लिया कि आंदोलन का पश्चिम यूपी से निकल कर पूरे यूपी की तरफ बढ़ रहा था। कहा जा रहा है कि भाजपा को पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे प्रदेश में सियासी नुकसान का भय सताने लगा था क्योंकि माना यह जाता है कि यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 210 सीटों पर किसान ही किसी पार्टी के भाग्य का फैसला करते है। इसलिए सरकार, तीनों कृषि कानून वापस लेने के लिए बाध्य हुई। पश्चिमी यूपी वो क्षेत्र है जहां क्रमश: 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव और फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां के जाट समुदाय का जमकर समर्थन मिला। यहां करीब 12 फीसदी जाट है जो चुनावों पर अपना जबरदस्त प्रभाव रखते हैं।
पिछले शुक्रवार को तीन विवादस्पद कृषि वापस लेने के फैसले के बाद पीएम मोदी का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह पहला कार्यक्रम था। इन कानूनों को रद्द किए जाने की मांग को लेकर देश भर के किसान पिछले एक साल से विरोध कर रहे थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश तीन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के केंद्रों में से एक था। किसानों ने सितंबर में मुजफ्फरनगर में किसान पंचायत की थी। अनुमान है कि इस महापंचायत में चार से पांच लाख किसान पहुंचे थे।
भाजपा के रणनीतिकारों ने अंदाजा लगा लिया कि आंदोलन का पश्चिम यूपी से निकल कर पूरे यूपी की तरफ बढ़ रहा था। कहा जा रहा है कि भाजपा को पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे प्रदेश में सियासी नुकसान का भय सताने लगा था क्योंकि माना यह जाता है कि यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 210 सीटों पर किसान ही किसी पार्टी के भाग्य का फैसला करते है। इसलिए सरकार, तीनों कृषि कानून वापस लेने के लिए बाध्य हुई। पश्चिमी यूपी वो क्षेत्र है जहां क्रमश: 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव और फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां के जाट समुदाय का जमकर समर्थन मिला। यहां करीब 12 फीसदी जाट है जो चुनावों पर अपना जबरदस्त प्रभाव रखते हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ पीएम नरेंद्र मोदी
- फोटो :
एएनआई
पश्चिम यूपी का सबसे बड़ा विकास प्रोजेक्ट
जेवर एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा विकास प्रोजेक्ट कहा जा है और इसे क्षेत्र के विकास के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट, दिल्ली-एनसीआर में दूसरा और उत्तर प्रदेश में पांचवां एयरपोर्ट है जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल से विकसित किया जा रहा है। इस एयरपोर्ट को भारत का पहला प्रदूषण मुक्त एयरपोर्ट के तौर पर विकसित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह देश का ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा।
ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि जेवर एयरपोर्ट के शिलान्यास के बाद इस क्षेत्र में विकास और बदलाव की जो बयार दिखेगी उससे लोगों और किसानों का गुस्सा ठंडा किया जा सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही फिल्म सिटी का भी निर्माण होना है। चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले पिछले कुछ हफ्तों में, भाजपा सरकार राज्य में कई विकास परियोजनाओं की घोषणा कर चुकी है।
डबल इंजन वाली सरकार के फायदे दिखाने की कोशिश
16 नवंबर को, पीएम मोदी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में में 341 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। 19 नवंबर को, जिस दिन तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की गई थी, उस दिन पीएम ने राज्य के आर्थिक रूप से पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए 3,425 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की नींव रखी।
जानकार कहते हैं कि, इसके जरिए राज्य सरकार खुद को विकास करने वाली सरकार के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। साथ ही यूपी में परियोजनाओं की श्रृंखला को डबल इंजन वाली सरकार (यानी केंद्र और राज्य दोनों जगह सत्ता में भाजपा है) के 'विकास' के एजेंडे के तौर पर भी पेश करने का भी एक प्रयास हो रहा है। हालांकि कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यूपी में कभी भी एक्सप्रेस वे और एयरपोर्ट के शिलान्यासों के सहारे चुनाव नहीं जीते गए।
जेवर एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा विकास प्रोजेक्ट कहा जा है और इसे क्षेत्र के विकास के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट, दिल्ली-एनसीआर में दूसरा और उत्तर प्रदेश में पांचवां एयरपोर्ट है जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल से विकसित किया जा रहा है। इस एयरपोर्ट को भारत का पहला प्रदूषण मुक्त एयरपोर्ट के तौर पर विकसित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह देश का ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा।
ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि जेवर एयरपोर्ट के शिलान्यास के बाद इस क्षेत्र में विकास और बदलाव की जो बयार दिखेगी उससे लोगों और किसानों का गुस्सा ठंडा किया जा सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही फिल्म सिटी का भी निर्माण होना है। चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले पिछले कुछ हफ्तों में, भाजपा सरकार राज्य में कई विकास परियोजनाओं की घोषणा कर चुकी है।
डबल इंजन वाली सरकार के फायदे दिखाने की कोशिश
16 नवंबर को, पीएम मोदी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में में 341 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। 19 नवंबर को, जिस दिन तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की गई थी, उस दिन पीएम ने राज्य के आर्थिक रूप से पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए 3,425 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की नींव रखी।
जानकार कहते हैं कि, इसके जरिए राज्य सरकार खुद को विकास करने वाली सरकार के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। साथ ही यूपी में परियोजनाओं की श्रृंखला को डबल इंजन वाली सरकार (यानी केंद्र और राज्य दोनों जगह सत्ता में भाजपा है) के 'विकास' के एजेंडे के तौर पर भी पेश करने का भी एक प्रयास हो रहा है। हालांकि कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यूपी में कभी भी एक्सप्रेस वे और एयरपोर्ट के शिलान्यासों के सहारे चुनाव नहीं जीते गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक कार्यक्रम में पीएम मोदी का स्वागत करते हुए (फाइल फोटो)
- फोटो :
अमर उजाला
भाजपा के लिए यूपी अहम
अगले साल वैसे तो पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, लेकिन भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश राजनीतिक रूप से सबसे अहम है। पार्टी जानती है कि 2024 में लोकसभा में कमल खिलाने के लिए अगले साल होने वाले यूपी चुनाव को जीतना जरूरी है। भाजपा को यहां विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी से कड़ी चुनौती मिल रही है। सपा का दावा है कि आदित्यनाथ सरकार सपा की पिछली सरकार शासन में शुरू की गई योजनाओं का श्रेय ले रही है। भाजपा से टक्कर लेने के लिए सपा राज्य में छोटे-छोटे दलों से गठबंधन कर रही है। सपा पहले ही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन कर चुकी है। पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और आम आदमी पार्टी के साथ भी हाथ मिलाने को तैयार है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी भी जेवर कार्यक्रम के समय पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा पर हवाई अड्डे के निर्माण के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहण करने का आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने भी केंद्र सरकार और पीएम मोदी की आलोचना करते हुए जेवर एयरपोर्ट से जुड़े कई पोस्टर भी सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं। हालांकि भाजपा के एक नेता का कहना है ‘एक तरफ जहां विपक्ष तुच्छ और भटकाने वाले मुद्दों में व्यस्त है, हमारी सरकार वादे के अनुसार विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है’।
अगले साल वैसे तो पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, लेकिन भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश राजनीतिक रूप से सबसे अहम है। पार्टी जानती है कि 2024 में लोकसभा में कमल खिलाने के लिए अगले साल होने वाले यूपी चुनाव को जीतना जरूरी है। भाजपा को यहां विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी से कड़ी चुनौती मिल रही है। सपा का दावा है कि आदित्यनाथ सरकार सपा की पिछली सरकार शासन में शुरू की गई योजनाओं का श्रेय ले रही है। भाजपा से टक्कर लेने के लिए सपा राज्य में छोटे-छोटे दलों से गठबंधन कर रही है। सपा पहले ही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन कर चुकी है। पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और आम आदमी पार्टी के साथ भी हाथ मिलाने को तैयार है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी भी जेवर कार्यक्रम के समय पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा पर हवाई अड्डे के निर्माण के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहण करने का आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने भी केंद्र सरकार और पीएम मोदी की आलोचना करते हुए जेवर एयरपोर्ट से जुड़े कई पोस्टर भी सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं। हालांकि भाजपा के एक नेता का कहना है ‘एक तरफ जहां विपक्ष तुच्छ और भटकाने वाले मुद्दों में व्यस्त है, हमारी सरकार वादे के अनुसार विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है’।