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लाल किले पर सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड नेहरू के नाम, इन्हें नहीं मिला मौका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 15 Aug 2018 05:54 AM IST
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राजनीति की दुनिया में कदम रखने वाले हर नेता का सपना होता है कि एक दिन वो देश का प्रधानमंत्री बने और 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से तिरंगा लहराए और देश को संबोधित करे। लेकिन इस सपने को पूरा करना हर किसी के नसीब में नहीं होता। ये सौभाग्य किसी भाग्यशाली नेता को ही नसीब होता है। आज हम आपको बताएंगे देश के उन सभी प्रधानमंत्रियों के बारे में जिन्हें लाल किले पर तिरंगा झंडा फहराने का अवसर प्राप्त हुआ है। इनमें कुछ ऐसे भी प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्हें ये अवसर कभी मिला ही नहीं।
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सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड नेहरू के नाम
जवाहरलाल नेहरू आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। लाल किले की प्राचीर से सबसे ज्यादा बार तिरंगा झंडा लहराने का अवसर उन्हें ही मिला था। नेहरू 1947 से लेकर 1964 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले पर रिकॉर्ड 17 बार ध्वजारोहण किया। ये सिलसिला और भी आगे चल सकता था, लेकिन 27 मई, 1964 को उनका निधन हो गया, जिसकी वजह से ये सिलसिला वहीं थम गया।
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इस मामले में दूसरे नंबर पर भारत की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री और जवाहरलाल नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी हैं। उन्होंने लाल किला पर 16 बार राष्ट्रध्वज फहराया है। इसके बाद लाल किला पर सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम है। अपने 10 वर्षीय कार्यकाल में उन्होंने 10 बार लाल किले पर झंडा फहराया है।
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इन प्रधानमंत्रियों ने कभी नहीं फहराया लाल किले पर तिरंगा
भारतीय इतिहास में दो ऐसे प्रधानमंत्रियों का नाम भी दर्ज है, जिन्हें लाल किला पर तिरंगा फहराने का अवसर ही नहीं मिला। ये थे गुलजारीलाल नंदा और चंद्रशेखर। वह दो बार 13-13 दिन के लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे थे। पहली बार जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 27 मई, 1964 को गुलजारीलाल नंदा 13 दिन के लिए कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने थे और दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री के देहांत के बाद 11 जनवरी, 1966 को फिर 13 दिन के लिए कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। इस प्रकार प्रधानमंत्री के तौर पर उनका पूरा कार्यकाल महज 26 दिनों का ही रहा।
वहीं, गुलजारीलाल नंदा के बाद चंद्रशेखर दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्हें एक बार भी लाल किले की प्राचीर से झंडा फहराने का अवसर नहीं मिला। वह 10 नवंबर, 1990 से 21 जून, 1991 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे।
इन प्रधानमंत्रियों ने भी लाल किले से फहराया है तिरंगा
भारत को परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्र बनाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए कुल 6 बार लाल किले से तिरंगा झंडा फहराया है। वहीं, राजीव गांधी और पी. वी. नरसिम्हा राव ने 5-5 बार, मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 बार, मोरारजी देसाई ने 2 बार और चौधरी चरण सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह और एचडी देवेगौड़ा ने 1-1 बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से तिरंगा झंडा फहराया है और देश को संबोधित किया है।