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देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अयोध्या जाना चाहते थे, मगर इस वजह से नहीं जा सके
Sun, 10 Nov 2019 12:27 PM IST
Priyesh Mishra
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sun, 10 Nov 2019 12:27 PM IST
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jawaharlal nehru
- फोटो : Social Media
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1950 के दौरान बाबरी मस्जिद वाली जगह पर भगवान राम और सीता की मूर्तियां रखने को लेकर विवाद हुआ था। उस घटना को मौजूदा विवाद, जिसका निपटारा सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को किया है, की जड़ें कहा जा सकता है। मूर्तियों को लेकर अयोध्या में तनाव हो गया था। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अयोध्या जाना चाहते थे, लेकिन जा नहीं सके। उन्होंने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद बल्लब पंत से अपनी यात्रा को लेकर बातचीत भी की थी। हालांकि बाद में वे किन्ही व्यस्तताओं के चलते वहां नहीं जा पाए।
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तत्कालीन जिला फैजाबाद के डीएम को लेकर जवाहरलाल नेहरू काफी नाराज थे। नेहरू का मानना था कि डीएम केके नायर ठीक तरह से काम नहीं कर रहे हैं। वे सरकार की बात को दरकिनार कर रहे हैं। नायर से कहा गया था कि वे मूर्तियों को मस्जिद से बाहर लाकर कहीं ओर स्थापित कर दें। इस पर नायर ने कहा था कि इससे दंगे फैल सकते हैं। अगर सरकार यह काम कराना चाहती है तो उनकी जगह किसी दूसरे अधिकारी को यहां तैनात कर दिया जाए।
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विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 23-23 दिसंबर 1949 की रात को यह खबर आई कि बाबरी मस्जिद के अंदर राम और सीता की मूर्तियां रखी हैं। कुछ पुजारियों और भक्तों ने दावा किया कि ये मूर्तियां मस्जिद के अंदर अपने आप चमत्कारिक रूप से दिखाई दी हैं।
उनका कहना था कि 1539 में एक मंदिर के स्थल पर मुगल शासक बाबर ने मस्जिद बनाई थी। कुछ दूसरे दावों के अनुसार, कोई गिरोह था, जिसने मस्जिद की पवित्रता भंग कर वहां मूर्तियों को रख दिया। बाद में माता प्रसाद नाम के एक पुलिस कांस्टेबल ने 23 दिसंबर को बाबरी मस्जिद परिसर में अपने बयान दर्ज कराए।
उन्होंने एफआईआर में कहा, 50-60 अज्ञात लोगों के एक समूह ने मस्जिद में अचानक प्रवेश किया और उनकी पवित्रता को खराब कर दिया। पुजारियों, भक्तों और कई स्थानीय समूहों में इसे लेकर खुशी मनाई गई। कुछ दिन बाद अयोध्या और विशेष रूप से संयुक्त प्रांत यानी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया।उस समय कांग्रेस के दिग्गज नेता गोविंद बल्लभ पंत संयुक्त राज्य के मुख्यमंत्री थे।
अयोध्या मामले को लेकर नेहरू ने पंत को लिखा पत्र ...
तीन दिन बाद 26 दिसंबर को पंडित नेहरू ने अयोध्या विवाद पर जीबी पंत को एक टेलीग्राम भेजा। इसमें उन्होंने लिखा, मैं अयोध्या के घटनाक्रम से परेशान हूं। उम्मीद है कि आप व्यक्तिगत रूप से इस मामले को हल करने में रुचि लेंगे। कुछ मीडिया रिपोर्टों में कथित तौर पर कहा गया कि नेहरू ने राज्य सरकार को रामलला और सीता की मूर्तियों को बाबरी मस्जिद परिसर से बाहर स्थानांतरित करने का निर्देश देने वाला एक नोट भी लिखा था।
नेहरू ने भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी को लिखे अपने पत्र में अपनी यह चिंता दोहराई। नेहरू ने गवर्नर जनरल को बताया कि मैंने कल रात अयोध्या के बारे में पंत जी को लिखा है।पंत जी ने मुझे बाद में फोन भी किया। उन्होंने कहा कि वे बहुत चिंतित थे और व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देख रहे हैं।
नेहरू ने अयोध्या विवाद के लिए डीएम को दोषी ठहराया था...
पंडित नेहरू का एक और पत्र जो कि दिनांक 5 मार्च, 1950 को फैजाबाद जिला प्रशासन को भेजा गया था, उसमें नेहरू ने कहा कि डीएम अपनी ड्यूटी ठीक तरह से नहीं कर रहे हैं। उस दौरान डीएम केके नायर, आईसीएस ने स्पष्ट रूप से नेहरू के निर्देश का पालन करने से इनकार कर दिया था। नेहरू ने अपने पत्र में लिखा, आप अयोध्या मस्जिद का जिक्र करते हैं। यह घटना दो या तीन महीने पहले घटी थी। मुझे इसका बहुत दुख हुआ है। एक डीएम ने गलत व्यवहार किया और राज्य सरकार ने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
दूसरी ओर, नायर ने राज्य सरकार के माध्यम से तत्कालीन प्रधानमंत्री के निर्देश पर स्पष्ट रूप से काम नहीं करने की बात कह दी। तत्कालीन यूपी के मुख्य सचिव को भेजे एक पत्र में नायर ने लिखा, अगर सरकार ने किसी भी कीमत पर मूर्तियों को हटाने का फैसला किया है तो मेरा अनुरोध है कि उससे पहले मुझे वहां से हटा दिया जाए। किसी दूसरे डीएम को वहां लगा दिया जाए। नायर ने यह भी दावा किया कि विवादित स्थल से मूर्तियों को हटाने से जनता को व्यापक पीड़ा होगी, जिसके परिणामस्वरूप कई लोगों की जान जा सकती है।
इस पृष्ठभूमि के खिलाफ नेहरू ने जीबी पंत को एक और पत्र भेजा।इसमें उन्होंने लिखा, वे अयोध्या जाने के लिए तैयार हैं। पांच फरवरी, 1950 को नेहरू ने पंत को कहा, अयोध्या विवाद का कश्मीर मुद्दे सहित शेष भारत पर असर पड़ सकता है। मुझे खुशी होगी अगर आप अयोध्या की स्थिति से लगातार अवगत कराते रहेंगे। यदि आवश्यक हो तो मैं अयोध्या जाऊंगा।
नेहरू ने लिखा, यदि आपको लगता है कि मेरा आना जरुरी है तो मैं तारीख तय करने का प्रयास करूंगा, हालांकि मैं बहुत व्यस्त हूं। उनकी यह यात्रा कभी नहीं हो सकी। अयोध्या में सांप्रदायिक तनाव को शांत करने के लिए बाबरी मस्जिद के द्वार बंद कर दिए गए थे। जनता का प्रवेश वर्जित था। एक पुजारी को वर्ष में एक बार राम लल्ला और सीता की मूर्तियों की पूजा करने की अनुमति थी।
दूसरी ओर, नायर ने राज्य सरकार के माध्यम से तत्कालीन प्रधानमंत्री के निर्देश पर स्पष्ट रूप से काम नहीं करने की बात कह दी। तत्कालीन यूपी के मुख्य सचिव को भेजे एक पत्र में नायर ने लिखा, अगर सरकार ने किसी भी कीमत पर मूर्तियों को हटाने का फैसला किया है तो मेरा अनुरोध है कि उससे पहले मुझे वहां से हटा दिया जाए। किसी दूसरे डीएम को वहां लगा दिया जाए। नायर ने यह भी दावा किया कि विवादित स्थल से मूर्तियों को हटाने से जनता को व्यापक पीड़ा होगी, जिसके परिणामस्वरूप कई लोगों की जान जा सकती है।
इस पृष्ठभूमि के खिलाफ नेहरू ने जीबी पंत को एक और पत्र भेजा।इसमें उन्होंने लिखा, वे अयोध्या जाने के लिए तैयार हैं। पांच फरवरी, 1950 को नेहरू ने पंत को कहा, अयोध्या विवाद का कश्मीर मुद्दे सहित शेष भारत पर असर पड़ सकता है। मुझे खुशी होगी अगर आप अयोध्या की स्थिति से लगातार अवगत कराते रहेंगे। यदि आवश्यक हो तो मैं अयोध्या जाऊंगा।
नेहरू ने लिखा, यदि आपको लगता है कि मेरा आना जरुरी है तो मैं तारीख तय करने का प्रयास करूंगा, हालांकि मैं बहुत व्यस्त हूं। उनकी यह यात्रा कभी नहीं हो सकी। अयोध्या में सांप्रदायिक तनाव को शांत करने के लिए बाबरी मस्जिद के द्वार बंद कर दिए गए थे। जनता का प्रवेश वर्जित था। एक पुजारी को वर्ष में एक बार राम लल्ला और सीता की मूर्तियों की पूजा करने की अनुमति थी।