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जरांगे ने जारी किया ऑडियो: 500 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा, किस पर लगाया आरोप; भाजपा-शिवसेना ने क्या कहा?
Thu, 22 Oct 2026 07:55 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, जालना/मुंबई।
पीटीआई, जालना/मुंबई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 22 Oct 2026 07:55 PM IST
सार
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने कथित ऑडियो क्लिप जारी कर दावा किया कि उन्हें 500 करोड़ रुपये देने की बात कही गई है। उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने और उन्हें चुप कराने की साजिश का आरोप लगाया। भाजपा, शिवसेना ने इस पर क्या कहा, पूरा मामला क्या है? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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मनोज जरांगे
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
विस्तार
मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे ने गुरुवार को एक ऑडियो क्लिप जारी की। इसमें दावा किया गया है कि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिये कथित तौर पर उन्हें 500 करोड़ रुपये पहुंचाए गए थे। जरांगे ने आरोप लगाया कि उन्हें चुप कराने और उनके आंदोलन को कमजोर करने के लिए साजिश रची गई।
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उन्होंने यह ऑडियो क्लिप सार्वजनिक की। इससे एक दिन पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि जरांगे अपने उस आरोप को साबित करें, जिसमें कहा गया है कि एकनाथ शिंदे ने भाजपा से 500 करोड़ रुपये लिए और अपने बेटे व सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिये यह रकम आगे पहुंचाई।
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ऑडियो क्लिप को लेकर विवाद पर राज्य के मंत्री और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर जरांगे के पास 500 करोड़ रुपये के दावे को लेकर ठोस सबूत हैं, तो उन्हें पुलिस या जिला कलेक्टर के पास शिकायत दर्ज करानी चाहिए। वहीं, उनके पार्टी सहयोगी और मंत्री आशीष शेलार ने ऑडियो की सत्यता पर सवाल उठाए।
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सत्तारूढ़ शिवसेना के नेताओं ने भी जरांगे पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह एकनाथ शिंदे और पार्टी को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने दावा किया कि ऑडियो क्लिप में बोलने वाले लोग भाजपा से जुड़े हैं। उन्होंने इसकी फोरेंसिक जांच कराने की मांग की।
ऑडियो में क्या बातचीत होने का दावा?
जालना की अंबड तहसील में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जरांगे ने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग चलाई। उन्होंने इस 'साजिश' की जांच की मांग की। साथ ही, उन्होंने ऑडियो में बोलने वाले लोगों की पहचान सामने लाने की मांग भी की।
एक क्लिप में एक महिला कथित तौर पर दावा करती सुनाई देती है कि शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिये जरांगे को 500 करोड़ रुपये दिए गए थे। रिकॉर्डिंग में 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले जरांगे के बढ़ते प्रभाव के संभावित राजनीतिक असर पर चर्चा होने का भी दावा किया गया है। कथित तौर पर बोलने वाले लोग मराठवाड़ा में जरांगे के प्रभाव को रोकने की रणनीतियों पर चर्चा करते सुनाई देते हैं। इस क्षेत्र में जरांगे मराठा आरक्षण, किसानों की समस्याओं और कर्ज माफी जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं।
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एक वक्ता कथित तौर पर कहता है कि जरांगे भाजपा को मराठा विरोधी बता रहे हैं। बातचीत में मराठा और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नेताओं को इसके राजनीतिक असर पर विचार करने की जरूरत की बात भी कही गई है। एक वक्ता कथित तौर पर दूसरे लोगों के जरिये अप्रत्यक्ष रूप से जरांगे का मुकाबला करने का सुझाव देता है। वहीं, दूसरा वक्ता चेतावनी देता है कि जरांगे का बढ़ता प्रभाव मराठवाड़ा में पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
'लव जिहाद' और 'वोट जिहाद' पर भी चर्चा का दावा
रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर 'लव जिहाद' और 'वोट जिहाद' के आरोपों को लेकर राजनीतिक चर्चा की दिशा तय करने पर भी बातचीत है। इसमें अहिल्यानगर और छत्रपति संभाजीनगर के मामलों का जिक्र है। पालघर में वधावन बंदरगाह परियोजना के विरोध पर भी चर्चा होने का दावा किया गया है।
एक अन्य बातचीत में कथित तौर पर यह दिखाने पर चर्चा होती है कि विदेशी देश भारत में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें विपक्षी नेताओं के साथ बैठकों का भी जिक्र है।
आंदोलन को कुचलने की कोशिश का आरोप
जरांगे ने आरोप लगाया कि पिछले तीन साल से उन्हें बदनाम करने और आरक्षण आंदोलन को कुचलने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से कथित साजिश के पीछे के लोगों का पता लगाने के लिए पूरी जांच कराने का आदेश देने की मांग की।
जरांगे ने कहा, हमारे पास सूत्र हैं। इस मामले को देखना मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पर निर्भर है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें चुप कराने की कोशिश की गई है। उन्होंने आरोप लगाया, अगर मुख्यमंत्री फडणवीस इस क्लिप की जांच का आदेश नहीं देते हैं, तो इसका मतलब है कि वह खुद इस साजिश में शामिल हैं। आंदोलनकारी ने यह भी आरोप लगाया कि शिंदे ने मराठा समुदाय के भरोसे को धोखा दिया है।
चंद्रशेखर बावनकुले ने क्या कहा?
इस बीच, नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में इस मुद्दे पर पत्रकारों से बात करते हुए बावनकुले ने कहा, अगर जरांगे के पास कथित 500 करोड़ रुपये के भुगतान (जिसका जिक्र) ऑडियो क्लिप में है और उन्हें फंसाने की साजिश के ठोस सबूत हैं, तो उन्हें सिर्फ मीडिया से बात करने के बजाय पुलिस या जिला कलेक्टर के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने कहा, औपचारिक शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री और गृह विभाग संबंधित एजेंसियों के जरिये निष्पक्ष और पूरी जांच सुनिश्चित करेंगे।
शिवसेना ने किस पर आरोप लगाया?
जरांगे के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के मंत्री और शिवसेना नेता उदय सामंत ने कहा कि कथित ऑडियो क्लिप में बातचीत करने वाले लोग भाजपा से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, हम ऑडियो क्लिप की जांच की मांग करते हैं। अगर यह सही है, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। चर्चा सिर्फ श्रीकांत शिंदे तक सीमित नहीं है। एकनाथ शिंदे और शिवसेना को बदनाम करने की साजिश है। क्लिप की फोरेंसिक जांच की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि अगर यह सही साबित होती है, तो भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि वह क्या कार्रवाई करेगी।
ऑडियो क्लिप की तारीख पर क्यों उठाए सवाल?
शिवसेना के एक अन्य नेता रामदास कदम ने दावा किया कि यह क्लिप 14 अक्तूबर 2024 की है। कदम ने कहा, आपने (जरांगे ने) दो साल पुरानी इस क्लिप पर चुप्पी क्यों साधे रखी? उन्हें इस बारे में सफाई देनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिंदे ने मराठा समुदाय को न्याय दिलाने में योगदान दिया है।
कदम ने कहा, क्लिप में बोलने वाले लोग भाजपा से जुड़े हैं और इसमें कोई शक नहीं है। क्लिप में बातचीत कॉन्फ्रेंस कॉल का हिस्सा है। इसका संबंध छत्रपति संभाजीनगर, ठाणे और मुंबई से है। जिसने भी पैसे दिए जाने का दावा किया है, उसे सबूत देने चाहिए।
आशीष शेलार ने ऑडियो की सत्यता पर क्या कहा?
भाजपा मंत्री शेलार ने कहा कि कथित ऑडियो क्लिप में उनकी पार्टी का कोई नेता या पदाधिकारी सुनाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने वालों को पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, मैं मांग करता हूं कि मुख्यमंत्री ऑडियो क्लिप की पूरी जांच का आदेश दें। इससे पता लगाया जाए कि ये रिकॉर्डिंग कैसे बनाई गईं, क्या ये असली हैं या इनके साथ छेड़छाड़ की गई है, क्या इन्हें गैरकानूनी तरीके से रिकॉर्ड किया गया, इन्हें जरांगे तक किसने पहुंचाया और उन्होंने इन्हें अब सार्वजनिक करने का फैसला क्यों किया।
शेलार ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी एकनाथ शिंदे को इस विवाद में जिस तरह फंसाया जा रहा है, उसे स्वीकार नहीं करती।