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Climate: जनवरी 2024 में रही रिकॉर्ड गर्मी, यूरोपीय जलवायु एजेंसी ने बताई तापमान बढ़ने की वजह
Thu, 08 Feb 2024 11:02 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 08 Feb 2024 11:02 AM IST
सार
जनवरी में वैश्विक तापमान 1.66 डिग्री सेल्सियस औसत से ज्यादा रहा। इससे पहले 1850-1900 के जनवरी माह में इतना तापमान बढ़ा था। जनवरी 2024 में औसत तापमान 13.14 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि साल 2020 की जनवरी की तुलना में 0.12 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
विस्तार
यूरोप की जलवायु एजेंसी ने दावा किया है कि इस साल का बीता महीना जनवरी रिकॉर्ड स्तर का गर्म रहा। जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, वैश्विक तापमान भी बीते एक साल में डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। एजेंसी के अनुसार, बीते साल जून के बाद से हर महीना रिकॉर्ड स्तर का गर्म रहा है।
अल नीनो इफेक्ट के चलते तापमान बढ़ा
वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो इफेक्ट के चलते प्रशांत महासागर की सतह के पानी का तापमान बढ़ गया है, जिसकी वजह से गर्मी बढ़ी है। साथ ही मानव जनित कारणों से भी तापमान बढ रहा है। जनवरी में वैश्विक तापमान 1.66 डिग्री सेल्सियस औसत से ज्यादा रहा। इससे पहले 1850-1900 के जनवरी माह में इतना तापमान बढ़ा था। जनवरी 2024 में औसत तापमान 13.14 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि साल 2020 की जनवरी की तुलना में 0.12 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है।
साल 2024 में और खराब हो सकते हैं हालात
साल 2015 में दुनिया के देश पेरिस समझौते के तहत वैश्विक औसत तापमान को दो डिग्री सेल्सियस कम करने पर सहमत हुए थे। विभिन्न रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दुनिया पेरिस समझौते के लक्ष्य के आसपास भी नहीं है और इस लक्ष्य को पाने के लिए कार्बन उत्सर्जन और मीथेन गैसों के उत्सर्जन को साल 2030 तक 43 प्रतिशत तक करने की जरूरत है। वैश्विक मौसम विज्ञान संगठन ने दिसंबर में कहा था कि साल 2024 में हालात और भी ज्यादा खराब हो सकते हैं।
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अल नीनो इफेक्ट के चलते तापमान बढ़ा
वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो इफेक्ट के चलते प्रशांत महासागर की सतह के पानी का तापमान बढ़ गया है, जिसकी वजह से गर्मी बढ़ी है। साथ ही मानव जनित कारणों से भी तापमान बढ रहा है। जनवरी में वैश्विक तापमान 1.66 डिग्री सेल्सियस औसत से ज्यादा रहा। इससे पहले 1850-1900 के जनवरी माह में इतना तापमान बढ़ा था। जनवरी 2024 में औसत तापमान 13.14 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि साल 2020 की जनवरी की तुलना में 0.12 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है।
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साल 2024 में और खराब हो सकते हैं हालात
साल 2015 में दुनिया के देश पेरिस समझौते के तहत वैश्विक औसत तापमान को दो डिग्री सेल्सियस कम करने पर सहमत हुए थे। विभिन्न रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दुनिया पेरिस समझौते के लक्ष्य के आसपास भी नहीं है और इस लक्ष्य को पाने के लिए कार्बन उत्सर्जन और मीथेन गैसों के उत्सर्जन को साल 2030 तक 43 प्रतिशत तक करने की जरूरत है। वैश्विक मौसम विज्ञान संगठन ने दिसंबर में कहा था कि साल 2024 में हालात और भी ज्यादा खराब हो सकते हैं।
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