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देशभर में दही-हांडी की धूम, जानिए कैसे शुरू हुई थी ये खास परंपरा
Sat, 24 Aug 2019 12:58 PM IST
शिल्पा ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिल्पा ठाकुर
Updated Sat, 24 Aug 2019 12:58 PM IST
सार
- भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्र मास की अष्टमी को अर्द्धरात्रि में हुआ था, इस दिन को देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है।
- देश के विभिन्न राज्यों में इस खास मौके पर दही-हांडी की परंपरा भी निभाई जाती है।
- देशभर में अलग-अलग जगह चौराहों पर दही और मक्खन से भरी मटकियां लटकाई जाती हैं।
- जिसके बाद गोविंदा मानव पिरामिड बनाकर एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते हुए इसे तोड़ते हैं।
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दही-हांडी उत्सव
- फोटो : PTI
विस्तार
भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्र मास की अष्टमी को अर्द्धरात्रि में हुआ था, इस दिन को देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। देश के विभिन्न राज्यों में इस खास मौके पर दही-हांडी की परंपरा भी निभाई जाती है। देशभर में अलग-अलग जगह चौराहों पर दही और मक्खन से भरी मटकियां लटकाई जाती हैं। जिसके बाद गोविंदा मानव पिरामिड बनाकर एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते हुए इसे तोड़ते हैं।
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देशभर में जन्माष्टमी की धूम
- फोटो : PTI
कृष्ण रोहिणी नक्षत्र में माता देवकी की कोख से जन्मे थे। कंस ने माता देवकी और उनके पति वायुदेव को कारागार में डाल रखा था। हालांकि उन्हें कारागार में डालने से पहले ही ये आकाशवाणी हो चुकी थी कि देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान कंस की मौत का कारण बनेगी।
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देशभर में जन्माष्टमी की धूम
- फोटो : PTI
इस आकाशवाणी के बाद से ही कंस देवकी की सभी संतानों को एक-एक कर मारता गया। जब आठवीं संतान के रूप में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ तो वासुदेव ने किसी तरह उन्हें वहां से सुरक्षित निकाल यशोदा और नंद के पास गोकुल पहुंचाया। यहीं से कृष्ण की बाल लीलाओं का आरंभ हुआ।
देशभर में जन्माष्टमी की धूम
- फोटो : PTI
भगवान कृष्ण को बचपन से ही माखन बहुत पसंद था। वह अक्सर गोपियों की मटकियों से माखन चुराकर खाते थे। इस बात की शिकायत गोपियां माता यशोदा से करती थीं। जिसके बाद माता यशोदा अपने कान्हा को समझाती थीं, लेकिन उनपर इसका कोई असर नहीं होता था।
देशभर में जन्माष्टमी की धूम
- फोटो : अमर उजाला
अपनी मटकियां कृष्ण से बचाने के लिए गोपियां उन्हें ऊंचाई पर टांगने लगी थीं, लेकिन कृष्ण अपने दोस्तों के साथ उन मटकियों तक भी पहुंच जाते थे। कई बार कृष्ण गोपियों की मटकियां भी फोड़ दिया करते थे। उनकी इन्हीं शरारती लीलाओं को याद करते हुए दही-हांडी का उत्सव मनाया जाता है।