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Jammu Kashmir: उड़ी खुफिया एजेंसियों की नींद, क्या घाटी में पहुंच रही तालिबान के कब्जे वाली US M16, M4 राइफलें

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 05 May 2023 01:11 PM IST
सार

Jammu Kashmir: सुरक्षा एजेंसियों के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, पुंछ हमला, जिसमें सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे, उसके बाद शुरू हुए सर्च ऑपरेशन में कई एजेंसियां लगी हैं, लेकिन अभी तक आतंकियों का सुराग नहीं लग सका है। यह आशंका जताई गई है कि तालिबान से मिले हथियारों के जरिए पुंछ हमले को अंजाम दिया गया है...

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Jammu Kashmir: US M16, M4 rifles captured by Taliban reaching in hands of terrorists
Jammu Kashmir: OP MACHHAL PRAHAR- माछल सेक्टर में आतंकियों से बरामद हथियार - फोटो : Agency

विस्तार

2021 में अमेरिका के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद 'नाटो' सेनाओं के अनेक हथियार और गोला-बारूद वहीं पर छूट गए थे। तालिबान के कब्जे में आए वे घातक हथियार, अब पाकिस्तान के रास्ते जम्मू-कश्मीर तक पहुंच रहे हैं। इस आशंका ने भारत की सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। गत दिनों पुंछ में हुए हमले की जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि तालिबान के पास मौजूद अमेरिकन M16 राइफल व M4 कार्बाइन जैसे हथियार, जम्मू-कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' और 'जैश-ए-मोहम्मद' के हाथ लगे हैं। हालांकि अभी इनकी संख्या तय नहीं है। इनके अलावा अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुई 'स्टील बुलेट' पहले से ही घाटी में मौजूद हैं।

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358530 असॉल्ट राइफलें व 126295 पिस्टल

अफगानिस्तान से नाटो सैनिकों के वापस लौटने के बाद '85 बिलियन डॉलर' के एयरक्रॉफ्ट, बख्तरबंद गाड़ियां, रॉकेट डिफेंस सिस्टम, मशीन गन और असॉल्ट राइफल सहित भारी मात्रा में गोला बारूद पर तालिबान का कब्जा हो गया था। हालांकि अमेरिका ने दावा किया था कि उसने तालिबान के हाथ लगे अपने अत्याधुनिक एयरक्रॉफ्ट, बख्तरबंद गाड़ियां व रॉकेट डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया है। अफगानिस्तान में '4 सीब-130 ट्रांसपोर्ट्स, 23 एम्ब्रेयर ईएमबी 314/ए29 सुपर सुकानो, 28 सेसेना 208, 10 सेसेना एसी-208 स्टाइक एयरक्रॉफ्ट' फिक्सड् विंग एयरक्रॉफ्ट बताए गए हैं। इनके अलावा 33 एमआई-17, 33 यूएच-60 ब्लैकहॉक व 43 एमडी 530 हेलीकॉप्टर भी हैं। अमेरिकी 22174-ह्मवे, 634 एमआई 117, 155 एमएक्सएक्स प्रो माइन प्रूफ व्हीकल, 169 एमआई 13 आर्म्ड पर्सनल केरियर, 42000 पिक अप ट्रक एंड एसयूवी, 64363 मशीन गन, 8000 ट्रक, 162043 रेडियो, 16035 नाइट गॉगल, 358530 असॉल्ट राइफल, 126295 पिस्टल और 176 आर्टलरी पीस भी तालिबान के कब्जे में बताए गए हैं।

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एम16 और एम4 हथियार की खासियतें

अमेरिका सेना, एम16 स्वचालित राइफलें साठ के दशक से इस्तेमाल करती रही है। वियतनाम युद्ध, ग्रेनाडा पर आक्रमण, खाड़ी युद्ध, सोमाली गृह युद्ध, इराक और अफगानिस्तान में लड़ाई के दौरान अमेरिकी सेना इसी राइफल से लैस थी। इस राइफल का वजन 7.18 पौंड (3.26 किग्रा) (अनलोडेड) और 8.79 पौंड (4.0 किग्रा) (लोडेड) है। एम16 से 700-950 राउंड/मिनट फायर हो सकते हैं। एम4 भी नब्बे के दशक से अमेरिका सेना में है। इन कार्बाइन को भी अफगानिस्तान युद्ध, इराक युद्ध, कोलंबियाई सशस्त्र संघर्ष, दक्षिण ओसेशिया युद्ध, लेबनान युद्ध, मैक्सिकन ड्रग युद्ध और दूसरे कई ऑपरेशनों में इस्तेमाल किया गया था। इसका वजन 6.36 पौंड (2.88 किग्रा) खाली, 6.9 पौंड (3.1 किग्रा) 30 राउंड मैगजीन के साथ होता है। इसमें से 700-950 राउंड/मिनट फायर होते हैं।

कहां हैं सेना के वाहन पर हमला करने वाले आतंकी

सुरक्षा एजेंसियों के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, पुंछ हमला, जिसमें सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे, उसके बाद शुरू हुए सर्च ऑपरेशन में कई एजेंसियां लगी हैं, लेकिन अभी तक आतंकियों का सुराग नहीं लग सका है। यह आशंका जताई गई है कि तालिबान से मिले हथियारों के जरिए पुंछ हमले को अंजाम दिया गया है। आतंकियों ने स्टील बुलेट इस्तेमाल की थी। ये बुलेट किसी भी बख्तरबंद गाड़ी को भेद सकती हैं। सामान्य बुलेटप्रूफ जैकेट और पटका, इससे बचाव नहीं कर पाते। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पाकिस्तान से आए आतंकियों ने पुंछ में सेना के वाहन पर हमला किया हो और उसके बाद वे वापस सीमा पार कर गए हों। सूत्रों का कहना है कि अगर तालिबान से घातक अमेरिकन राइफलें और स्टील गोलियां, घाटी में पहुंच गई हैं, तो ये सुरक्षा बलों के लिए चिंता का विषय हैं। वजह, देश में ज्यादातर बुलेटप्रूफ वाहन, मोर्चा, जैकेट और पटका 'लेवल 3' श्रेणी वाले होते हैं। स्टील की गोलियां यानी 'आर्मर पियर्सिंग इन्सेंडरी' (एपीआई) इन्हें भेद देती हैं। देश में हर जगह पर 'लेवल-4' बुलेटप्रूफ कवच नहीं है। इस कवच को केवल चुनींदा ऑपरेशनों में ही इस्तेमाल किया जाता है।

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तालिबान से भारत के कूटनीतिक लिंक पर सवाल

पुंछ हमले के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तालिबान से भारत के कूटनीतिक रिश्तों पर सवाल उठाया था। 28 फरवरी को जारी अमेरिका की SIGAR (Special Inspector General for Afghanistan Reconstruction) की नवीनतम रिपोर्ट कहती है, तालिबान अपने राजस्व प्रवाह को बढ़ाने के लिए अपने कब्जे वाले हथियारों और उपकरणों के एक हिस्से को बेच सकता है। वैकल्पिक रूप से, तालिबान का पूरे शस्त्रागार पर नियंत्रण नहीं हो सकता है। ऐसे में वे उपकरण तस्करों या बंदूक डीलरों द्वारा चुराए या तस्कर किये जा सकते हैं और खुले बाजार में बेचे जा सकते हैं।

पवन खेड़ा का कहना था कि मोदी सरकार ने भारत की पिछली विदेश नीति के रुख को झुठलाते हुए तालिबान के साथ बातचीत शुरू कर दी है। 2023 के बजट में, मोदी सरकार ने अफगानिस्तान के लिए 200 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की है। दिसंबर 2022 में काबुल में भारतीय तकनीकी टीम के सदस्यों ने तालिबान के शहरी विकास मंत्री हमदुल्ला नोमानी से मुलाकात की और बातचीत की। क्या उस वक्त, जब सेना पर हमले में तालिबान का लिंक दिखता हो, भारत को कूटनीतिक पहल करनी चाहिए।

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