महबूबा 'खरगोश के साथ दौड़ो और शिकार के साथ शिकार करो' की कहावत पर चल रहीं, बन रहा है दोबारा जेल का योग!
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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अब अनुच्छेद-370 और राष्ट्रीय ध्वज को लेकर विवादित टिप्पणी की है। बीच में चीन का नाम भी ले रहीं हैं। महबूबा मुफ्ती सत्ता में बने रहने के लिए 'खरगोश के साथ दौड़ो और शिकार के साथ शिकार करो', वाली कहावत पर चलती रही हैं। अगर उन्होंने अनुच्छेद-370 और तिरंगे को लेकर बयान देने में संयम नहीं बरता, तो उनका दोबारा से जेल का योग बन जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) ने आगे कहा कि महबूबा मुफ्ती अब अपने उस जनाधार को वापस लेना चाहती हैं, जो उनके गलत फैसलों और अड़ियल रुख के चलते खो चुका है। इसके लिए वे अपने विवादित बयानों को जरिया बना रही हैं। इस रणनीति को खुद उनके सहयोगी पूर्व मंत्री और विधायक अच्छी तरह समझते हैं।पहले जम्मू के लोग महबूबा मुफ्ती की सच्चाई जानते थे, अब कश्मीर घाटी भी समझ गई है।
बता दें कि केंद्र सरकार ने गत वर्ष जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म कर दिया था। तभी से महबूबा मुफ्ती हिरासत में थीं। कुछ दिन पहले उन्हें रिहा किया गया है। इसके बाद से वे कई विवादित बयान दे चुकी हैं।
महबूबा बोलीं, तिरंगा नहीं उठाऊंगी
अब महबूबा ने कहा, मैं तभी तिरंगा उठाऊंगी, जब पूर्व राज्य का झंडा और संविधान बहाल किया जाएगा। जहां तक मेरी बात है, तो मुझे चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं है। जब तक वह संविधान हमें वापस नहीं मिल जाता, जिसके तहत मैं चुनाव लड़ती थी, तब तक महबूबा मुफ्ती को चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हकीकत है कि चीन ने हमारी जमीन के एक हजार वर्ग किलोमीटर हिस्से पर कब्जा कर लिया है।मुझे लगता है कि हम किसी तरह लगभग 40 किमी जमीन वापस जाने में कामयाब रहे हैं।''
भाजपा ने महबूबा को जेल भेजने की मांग की
14 महीने तक नजरबंद रहीं महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेन्स में कहा, ''हम राष्ट्रीय ध्वज को तभी उठाएंगे, जब हमारे राज्य के ध्वज को वापस लाया जाएगा।राष्ट्रीय ध्वज केवल इस (जम्मू और कश्मीर) ध्वज और संविधान की वजह से है। हम इसी ध्वज के कारण देश के बाकी हिस्सों से जुड़े हुए हैं।'' इस बयान के बाद, भाजपा उनके खिलाफ हमलावर हो गई। जम्मू-कश्मीर भाजपा के अध्यक्ष रविन्दर राणा ने इस बयान को देशद्रोह बताया है।राणा ने महबूबा पर देशद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजने की मांग कर दी है।
महबूबा से सहयोगियों ने बना ली दूरी
राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) ने बताया, 'महबूबा इस प्रयास में है कि किसी तरह दोबारा सत्ता मिल जाए। महबूबा का अड़ियल रवैया, उन्हें अपने कई अहम सहयोगियों से दूर ले गया। उनके कई सहयोगी दूसरी पार्टी में चले गए या उन्होंने अलग पार्टी बना ली। जब वे सत्ता में रही, तो उन्होंने किसी की नहीं सुनी। अलगाववादियों की खुलेआम मदद करती रहीं। गिलानी के पोते को मनचाही नियुक्ति दे दी। वे 'खरगोश के साथ दौड़ो और शिकार के साथ शिकार करो' वाली कहावत पर चलना पसंद करती हैं। भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली, क्या इसके लिए उन्होंने लोगों की राय ली थी? क्या अपनी पार्टी के लोगों से पूछा था?''
रूठे साथियों को मनाने में जुटीं महबूबा
गौर ने कहा कि अब उनका प्रयास है कि किसी तरह पुराने सहयोगी साथ आ जाएं। सच तो यह है कि अब कश्मीर के लोग भी उनके साथ नहीं आ पा रहे हैं। तिरंगा नहीं उठाएंगी, लेकिन सरकारी सुविधाएं लेती रहेंगी। सरकारी आवास, पेंशन या सुरक्षा लेना क्यों नहीं छोड़ देतीं। कश्मीर के बहुत से लोग इस हकीकत को जानते हैं कि भाजपा या आरएसएस को वहां लाने वाला कौन है।यही वजह है कि अब महबूबा को राष्ट्र विरोधी बयानों का सहारा लेना पड़ रहा है।उन्होंने अपनी जुबान पर लगाम नहीं लगाई, तो उनका दोबारा से जेल का योग बनते देर नहीं लगेगी।