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JK Elections: चुनावों से पहले पाकिस्तान ने जम्मू में बनाया नया आतंकी संगठन, LoC के पास भेजे आतंकी लॉन्च पैड
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जम्मू-कश्मीर में चुनाव की तैयारी के बीच पाकिस्तान के नापाक मंसूबे।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों का एलान होते ही पाकिस्तान को मिर्ची लग गई है। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को बाधित करने के लिए बड़ी साजिश रच रहा है। जम्मू के अलावा घाटी में भी वह आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने की फिराक में है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों का एलान होने वाला है, उसकी खबर पाकिस्तान को भी लग गई थी। चुनावों के एलान से ठीक पहले ही पंजाब पाकिस्तान के कसूर में आतंकियों की बैठक हुई थी, जिसमें आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर शामिल हुए थे। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर चुनावों में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने और बांग्लादेश की तरफ से भारत में हिंसा भड़काने की साजिश रची गई। सूत्रों ने यह भी खुलासा किया कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में हिंसा भड़काने के लिए सभी आतंकी शिविरों और लॉन्च पैड्स को एलओसी के नजदीक ले आया है।14 अगस्त को कसूर में लश्कर के आतंकियों की बैठक
इंटेलिजेंस एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि 14 अगस्त को पाकिस्तान पंजाब के कसूर में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के टॉप आतंकियों की एक बैठक हुई थी। 14 अगस्त को पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस भी मनाता है। इसी मौके पर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर में होने वाले चुनावों को बाधित करने के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है। आतंकियों की इस बैठक में लश्कर का चीफ और को-फाउंडर अब्दुल रहमान मक्की, लश्कर का कमांडर इब्तिसाम इलाही जहीर, लश्कर का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी, लश्कर का को फाउंडर अमीर हमजा और मुंबई हमले का मास्टरमाइंड लश्कर सरगना आतंकी हाफिज सईद का बेहद करीबी और लश्कर का फाइनेंस सेक्रेटरी हैरिस डार भी शामिल हुआ था।
आत्मघाती हमलों की रची साजिश
सूत्रों ने बताया कि लश्कर की हुई बैठक में जो जानकारी सामने आई है, उसमें पता चला है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकी संगठन लश्कर के साथ मिल कर बड़ी साजिश रच रही है। विधानसभा चुनावों को देखते हुए आत्मघाती हमलों की योजना बनाई गई है। मिली जानकारी के मुताबिक आने वाले समय में कई फिदायीन हमलावर जम्मू-कश्मीर में बड़े आत्मघाती हमलों को अंजाम दे सकते हैं। इस मीटिंग में जम्मू-कश्मीर में हमले तेज करने की रणनीति बनाई गई है। साथ ही, आतंकी सुरक्षाबलों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से कई आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की है। इन आतंकियों ने आतंकी पहाड़ी इलाकों में पनाह ली हुई है। ऐसे तकरीबन 40 आतंकियों में से कई फिदायीन हमलावर हैं। सूत्रों ने बताया कि लगभग 40-50 ट्रेंड पाकिस्तानी आतंकवादी डोडा, राजौरी, पुंछ, उधमपुर के ऊपरी इलाकों में छिपे हुए हैं।
लॉन्च पैड्स को एलओसी के नजदीक भेजा
इंटेलिजेंस एजेंसियों के सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि विधानसभा चुनावों में जम्मू-कश्मीर में दहशत फैलाने की अपनी नापाक साजिशों को विस्तार देते हुए आतंकी सगठनों ने जम्मू क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों को तेज करने के लिए अपने सभी आतंकी शिविरों और लॉन्च पैड्स को नियंत्रण रेखा के करीब स्थानांतरित कर दिया है। नए खुफिया इनपुट से पता चला है कि इन सभी लॉन्च पैड्स पर मौजूद आतंकियों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने प्रशिक्षित किया है। ये लॉन्च पैड्स आतंकी संगठनों मत्तेवाला, हेडमराला, सहांशा में बनाए हैं। सूत्रों ने बताया कि तालिबान द्वारा अफगानिस्तान से बाहर निकाले गए एक बड़े प्रशिक्षित कैडर को कथित तौर पर पेशावर, बहावलपुर और मुजफ्फराबाद में तैनात किया गया है, जो भारतीय इलाके में घुसपैठ करने के लिए तैयार हैं।
नया संगठन जम्मू डोगरा लिबरेशन फ्रंट बनाया
खुफिया इनपुट (अमर उजाला के पास कापी मौजूद है) से पता चला है कि जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने एक नया संगठन जम्मू डोगरा लिबरेशन फ्रंट (जेडीएलएफ) भी बनाया है। जिसके जरिए घाटी में आतंकी वारदातों को अंजाम दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि इस पूरी सांठगांठ को यूरोप और तुर्की में बैठे लोग अंजाम दे रहे हैं। सूत्रों का यह भी पता चला है कि 01 जून 2024 को जम्मू शहर में इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) का एक कंसाइनमेंट पहुंचा है। चुनावों को देखते हुए आईईडी की इस बड़ी खेप को पहले ही घाटी में पहुंचा दिया गया है। खुफिया एजेंसियां और सुरक्षा बल इन बड़ी खेप की खोजबीन में लगे हैं। खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि आने वाले वक्त में इन आईईडी का इस्तेमाल जम्मू में तैनात स्पेशल फोर्सेज की यूनिटों, कैंपों, सैन्य वाहनों, सुरक्षा बलों के काफिलों और धार्मिकों स्थलों को निशाना बनाने में किया जा सकता है।
बांग्लादेश में पाकिस्तान का हाथ
खुफिया इनपुट से पता चला है कि कसूर में जो बैठक हुई है, उसमें बांग्लादेश में पैदा हुए ताजा हालात का फायदा भारत के खिलाफ उठाने की बात कही गई है। इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का को-फाउंडर अमीर हमजा ने बेहद भड़काऊ भाषण दिया है। अमीर हमजा ने कहा कि 52 साल बाद, पाकिस्तान बांग्लादेश में अपने उद्देश्य में सफल रहा है। अब भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सैंडविच बन गया है। वहीं, लश्कर के फाइनेंस सेक्रेटरी हैरिस डार ने भी इस बैठक में भाषण दिया था। लश्कर आतंकी हैरिस धर ने भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि जब पाकिस्तान को आजादी मिली थी तो नेहरू ने भविष्यवाणी की थी कि पाकिस्तान छह महीने से एक साल भी नहीं टिक पाएगा, फिर भी 77 साल बाद भी पाकिस्तान दुनिया के नक्शे पर बरकरार है। उसने पाकिस्तान को दुनिया का एकमात्र एटमी ताकत वाला इस्लामिक मुल्क बताते हुए कहा कि बांग्लादेश में भारत और उसके हिंदुत्व एजेंडे को कुचल दिया गया है। उम्मीद है कि कश्मीर में भी भारत की हार होगी। बता दें कि हैरिस डार वही शख्स है, जिसे हाल ही में ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर लौटे पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम के साथ देखा बैठे गया था। सूत्रों ने बताया कि हैरिस डार भारत में घुसपैठ करने वाले लश्कर के आतंकवादियों को मेडिकल और फर्स्ट एड के स्किल्स सिखाता था। उसे लश्कर के ट्रेनिंग कैंपों में भी देखा गया है।
जम्मू-कश्मीर में तीन फेज में चुनाव
बता दें, कि शुक्रवार को ही चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान किया है। जम्मू-कश्मीर में 18 सितंबर को पहले फेज में 24 सीटों पर, 25 सितंबर को दूसरे फेज में 26 सीटों पर और एक अक्तूबर को तीसरे फेज में 40 सीटों पर मतदान होना है। चार अक्तूबर को वोटों की गिनती के बाद वहां नई सरकार का गठन हो जाएगा। पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद-370 और 35ए की विदाई के बाद वहां पहली बार चुनाव होंगे। जम्मू-कश्मीर में 10 साल पहले 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे। जम्मू रीजन में आतंकवादी हमलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच, केंद्र ने सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करने के लिए असम राइफल्स की दो बटालियनों को जम्मू भेजने का फैसला लिया है। इसके अलावा मणिपुर से असम राइफल्स की दो बटालियनें भी जम्मू भेजी जाएंगी। इससे पहले जम्मू में सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करने के लिए 3000 अतिरिक्त सेना के जवानों और 2000 बीएसएफ कर्मियों को भी तैनात किया गया था।