{"_id":"619652cf52c8a70f9b7fbf82","slug":"jammu-and-kashmir-what-is-the-political-meaning-of-the-rally-of-ghulam-nabi-azad-supporters-in-kathua-does-he-want-to-be-the-cm-face-in-upcoming-assembly-election","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर: गुलाम नबी के समर्थकों की कठुआ में रैली के क्या हैं सियासी मायने, क्या सीएम चेहरा बनना चाहते हैं आजाद","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
जम्मू-कश्मीर: गुलाम नबी के समर्थकों की कठुआ में रैली के क्या हैं सियासी मायने, क्या सीएम चेहरा बनना चाहते हैं आजाद
Thu, 18 Nov 2021 06:49 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 18 Nov 2021 06:49 PM IST
सार
पार्टी के एक नेता ने बड़े ही दार्शनिक अंदाज में समझाया, ‘जब बुरे दिन चल रहे होते हैं तो सब ऐसे ही आंखें दिखाते हैं। अभी हमारे बुरे दिन हैं, इसलिए जब देखो तब कोई न कोई बड़ा नेता बगावती तेवर लिए चला आ रहा है। लगता है आजाद साहेब भी उस सिलसिले को और आगे बढ़ा रहे हैं।'
विज्ञापन
गुलाम नबी आजाद (फाइल फोटो)
- फोटो : Twitter/Ghulam Nabi Azad
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बुधवार शाम को कई पूर्व मंत्री और विधायकों के इस्तीफे के बाद गुरुवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के समर्थकों ने एक रैली की। यह रैली ऐसे वक्त में हुई जब माना जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले नेता कथित तौर पर उनके ही गुट के हैं। इन इस्तीफों की वजह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर और गुलाम नबी आजाद के बीच विचारों की टकराहट को माना जा रहा है। दूसरी तरफ कांग्रेस पहले से ही पंजाब और राजस्थान में आंतरिक संकट से जूझ रही है और अगले साल की शुरुआत में होने वाले पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है, ऐसे में गुलाम नबी आजाद के समर्थकों की राह पार्टी को और मुश्किलों की ओर ले जा रही है।
माना जा रहा है कि आजाद अपने समर्थकों के इस्तीफों के जरिए आलाकमान पर दबाव बनाने और गुलाम अहमद मीर को किनारे लगाने की कोशिश कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ उनके समर्थक रैली के जरिए पार्टी आलाकमान को अपनी सियासी ताकत दिखा दी और जता दिया कि यदि गुलाम नबी आजाद को प्रदेश में तवज्जो नहीं दी गई तो इसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि आजाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनना चाहते हैं इसलिए पार्टी आलकमान पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत ही पहले उनके गुट के लोगों ने इस्तीफा दिया और उसके बाद उनके समर्थकों ने यह रैली की। हालांकि जम्मू-कश्मीर में अभी तक विधानसभा चुनाव की घोषणा नहीं हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
माना जा रहा है कि आजाद अपने समर्थकों के इस्तीफों के जरिए आलाकमान पर दबाव बनाने और गुलाम अहमद मीर को किनारे लगाने की कोशिश कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ उनके समर्थक रैली के जरिए पार्टी आलाकमान को अपनी सियासी ताकत दिखा दी और जता दिया कि यदि गुलाम नबी आजाद को प्रदेश में तवज्जो नहीं दी गई तो इसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता है।
विज्ञापन
पार्टी सूत्रों का कहना है कि आजाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनना चाहते हैं इसलिए पार्टी आलकमान पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत ही पहले उनके गुट के लोगों ने इस्तीफा दिया और उसके बाद उनके समर्थकों ने यह रैली की। हालांकि जम्मू-कश्मीर में अभी तक विधानसभा चुनाव की घोषणा नहीं हुई है।
विज्ञापन
पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण समय
गुलाम नबी आजाद
- फोटो : अमर उजाला
एक स्थानीय पत्रकार ने बताया, ‘इस रैली को आप आजाद के बगावती तेवर जो उनके लिए नई बात नहीं है, उसके अलावा उनके अस्तित्व के सवाल से भी जोड़ सकते हैं। जी-23 में शामिल होकर वे पहले ही पार्टी नेतृत्व को लेकर अपना विरोध जता चुके हैं, लेकिन वे जम्मू-कश्मीर में अपना प्रभाव और अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं इसलिए समर्थकों के बहाने वे पार्टी नेतृत्व को अपनी सियासी ताकत दिखा रहे हैं। यह पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि चुनाव की घोषणा कभी भी की जा सकती है और पार्टी को एक टीम के रूप में काम करना चाहिए।’
समर्थन में वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतार दिया
आजाद क्या चाहते हैं यह बताने के लिए उन्होंने पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतार दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम तारा चंद ने मीडिया को दिए बयान में साफ कर दिया कि पूरा जम्मू-कश्मीर चाहता है कि गुलाम नबी आजाद अगले सीएम का चेहरा बनें। उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाए। वहीं कांग्रेस के पूर्व विधायक चौधरी अकरम ने भी कठुआ रैली में कहा कि यदि गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर की कमान संभालेंगे तभी हम जीत सकते हैं। वहीं, कांग्रेस के पूर्व एमएलसी सुभाष गुप्ता ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा हम चाहते हैं कि गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर में पार्टी की बागडोर संभालें।
समर्थन में वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतार दिया
आजाद क्या चाहते हैं यह बताने के लिए उन्होंने पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतार दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम तारा चंद ने मीडिया को दिए बयान में साफ कर दिया कि पूरा जम्मू-कश्मीर चाहता है कि गुलाम नबी आजाद अगले सीएम का चेहरा बनें। उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाए। वहीं कांग्रेस के पूर्व विधायक चौधरी अकरम ने भी कठुआ रैली में कहा कि यदि गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर की कमान संभालेंगे तभी हम जीत सकते हैं। वहीं, कांग्रेस के पूर्व एमएलसी सुभाष गुप्ता ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा हम चाहते हैं कि गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर में पार्टी की बागडोर संभालें।
धैर्य रखें आजाद
गुलाम नबी आजाद
- फोटो : पीटीआई
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा 'जम्मू-कश्मीर में अभी परिसीमीन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में सीएम उम्मीदवार घोषित करने की बात उठाना तर्कसंगत नहीं है। मुख्यमंत्री कौन बनेगा इस पर फैसला विधायक और आलाकमान मिलकर लेती है। पार्टी ने उन्हें अब तक बहुत कुछ दिया है इसलिए उन्हें धैर्य रखना चाहिए'।
गुलाम नबी आजाद उन 23 नेताओं में हैं, जिन्होंने पिछले साल अगस्त में सोनिया गांधी को चिट्ठी लिख कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने की मांग की थी। कहा जाता है G-23 कांग्रेस के भीतर असंतुष्टों का समूह है। इस ग्रुप में कपिल सिब्बल समेत कई बड़े नेता हैं। पंजाब में चल रहे उठापटक के दौरान भी आजाद ने कार्यसमिति की बैठक बुलाने की मांग की थी।
2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद से कांग्रेस नेतृत्व का विरोध करने वालों में आजाद सबसे प्रमुख नेताओं में है। उन्होंने 1973 में कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक सचिव के रूप में राजनीति में अपना करियर शुरू किया था। 1990 में वे पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए। 2005 में आजाद को जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया था। बताया जाता है कि 2005 में जम्मू-कश्मीर के सीएम बनने से पहले, आजाद को तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव ने क्रमशः 1986 और 1995-96 में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
गुलाम नबी आजाद उन 23 नेताओं में हैं, जिन्होंने पिछले साल अगस्त में सोनिया गांधी को चिट्ठी लिख कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराने की मांग की थी। कहा जाता है G-23 कांग्रेस के भीतर असंतुष्टों का समूह है। इस ग्रुप में कपिल सिब्बल समेत कई बड़े नेता हैं। पंजाब में चल रहे उठापटक के दौरान भी आजाद ने कार्यसमिति की बैठक बुलाने की मांग की थी।
2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद से कांग्रेस नेतृत्व का विरोध करने वालों में आजाद सबसे प्रमुख नेताओं में है। उन्होंने 1973 में कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक सचिव के रूप में राजनीति में अपना करियर शुरू किया था। 1990 में वे पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए। 2005 में आजाद को जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया था। बताया जाता है कि 2005 में जम्मू-कश्मीर के सीएम बनने से पहले, आजाद को तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव ने क्रमशः 1986 और 1995-96 में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।