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जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी बोले: सेना को देना चाहता था 150 स्नाइपर राइफल, लेकिन..

Tue, 12 Nov 2019 01:50 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Tue, 12 Nov 2019 01:50 PM IST
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Jammu and Kashmir Former DGP SP Vaid said wanted to give 150 sniper rifles to army but
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद 150 स्नाइपर राइफल देकर भारतीय सेना की मदद करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व से बात भी की थी, लेकिन वहां से कोई जवाब ही नहीं मिला। ये बात डॉ. एसी वैद ने जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद सोमवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत में कही।

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उन्होंने कहा कि पुलिस की नौकरी में लगातार राजनीतिक दबाव झेलना पड़ता है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, मुफ्ती मोहम्मद सईद, गुलाम नबी आजाद, उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती के साथ काम किया। वैद कहते हैं कई बार दबाव आए लेकिन सभी को टैकल किया और फैसले नहीं बदले। डॉ. वैद इसके साथ ही वह एक घटना बताते हुए अफसोस भी जताते हैं।
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उनके मुताबिक, पाकिस्तानी सेना जब हमारे जवानों को स्नाइपर से अधिक निशाने बनाने लगी तो सेना ने स्नाइपर राइफल की मदद मांगी थी। हमारे पास तकरीबन 150 राइफलें थीं, जो डीजीपी रहते मैंने एसओजी के लिए मंगाई गई थीं।
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इस पर सेना को राइफलें देने के लिए तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व से बात भी की लेकिन उन्होंने कोई भी जवाब ही नहीं दिया। पूर्व डीजीपी वैद ने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इशारा पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ओर था।

बता दें कि पूर्व डीजीपी डॉ. वैद को राजनीतिक दबाव में स्नाइपर राइफल से सेना की मदद न कर पाने तथा आतंकी अजहर मसूद को छोडे़ जाने का आज भी मलाल है। पुलिस विभाग में 34 साल से अधिक समय तक अलग-अलग पदों पर रहे डॉ. वैद हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं।

जम्मू-कश्मीर पुलिस देश में सबसे अच्छी 

विलेज डिफेंस कमेटी (वीडीसी) और कम्युनिटी पुलिसिंग शुरू करने वाले डॉ. वैद दावे से कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर पुलिस देश की सबसे अच्छी और अनुशासित फोर्स है। बावजूद इसके कि उसे आतंकियों और पत्थरबाजों से लड़ने के साथ ही समाज के एक तबके से भी जूझना पड़ता है।  

डॉ. वैद का कहना है कि आतंकवाद और अलगाववाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। कारण, एक तो कश्मीरी युवा इसकी हकीकत समझ चुका है। दूसरा अनुच्छेद 370 खत्म होने से इनका हौसला पूरी तरह पस्त हो गया है।

उन्होंने कहा कि केंद्र ने फैसले के बाद संचार नेटवर्क ठप कर बेहतरीन काम किया, क्योंकि इससे पाकिस्तान को कश्मीरी युवाओं में कट्टरता फैलाने का मौका नहीं मिल सका।  उन्होंने यह भी कहा कि आतंकियों ने उन पर चार बार हमला किया।

एक हमले में तो उनके एक हाथ की एक अंगुली कट गई। सिर में चोट लगने के कारण ऑपरेशन कराना पड़ा। उनके डीजीपी रहते हुए पहली बार अलगाववादियों पर शिकंजा कसा गया। बाग में एनआईए ने छापेमारी कर अलगाववादियों की कारगुजारियां ही उजागर नहीं की, उनकी गिरफ्तारी भी की। 

आसिया ने पाकिस्तान के इशारे पर तैयार कीं महिला पत्थरबाज

डीजीपी डॉ. वैद ने बताया कि हिजबुल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में अशांति फैलाने के लिए पाकिस्तान के ही कहने पर महिला अलगाववादी आसिया अंद्राबी ने बाकायदा महिला पत्थरबाजों की फौज तैयार की थी। 

उन्होंने कहा कि इसके लिए महिला कॉलेजों में खासतौर पर टीम बनाई गई थी। पुलिस ने इसमें शामिल छात्राओं को समझाइश भी दी थी। प्राचार्यों और अभिभावकों से बातचीत की। इस तरह धीरे-धीरे महिलाओं की ओर से पत्थरबाजी की घटनाओं पर अंकुश पाने में कामयाबी मिली।

आतंकी को छोड़े जाने का मलाल

पूर्व डीजीपी ने विशेष बातचीत में कहा कि उन्हें आतंकी अजहर मसूद को कंधार कांड के दौरान छोड़े जाने का मलाल है। उन्होंने कहा कि मैं तब जम्मू—कश्मीर का डीआईजी था। आतंकी अजहर मसूद तब कोट भलवाल सेंट्रल जेल में बंद था।

उसे लेने के लिए दिल्ली से विशेष विमान टेक्निकल एयरपोर्ट आ चुका था। मसूद को वहां तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मुझे ही सौंपी गई थी। डॉ. वैद कहते हैं कि तब दिल पर भारी बोझ लेकर मसूद को एयरपोर्ट तक पहुंचाया था। यह घटना कभी भूलती नहीं है।

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