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Hindi News ›   India News ›   Jammu and Kashmir: effect of Pakistan Global Islamophobia Mehbooba Mufti and Omar Abdullah Hurriyat Latest Update

जम्मू-कश्मीर: इन नेताओं पर दिखा पाकिस्तान के 'ग्लोबल इस्लामोफोबिया' का असर, 'हुर्रियत' का नकाब ओढ़ने में जुटे महबूबा और अब्दुल्ला  

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 18 May 2022 05:44 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर ओआईसी की टिप्पणी कोई नई बात नहीं है। वह पहले भी ऐसा कर चुका है। इस संगठन ने कई बार भारत विरोधी बयानबाजी की है।

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Jammu and Kashmir: effect of Pakistan Global Islamophobia Mehbooba Mufti and Omar Abdullah Hurriyat Latest Update
उमर अब्दुल्ला-महबूबा मुफ्ती - फोटो : Social Media

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को लेकर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉन्फ्रेंस (ओआईसी) की टिप्पणी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने करारा जवाब दे दिया है। ओआईसी ने सोमवार को अपने ट्वीट में लिखा कि भारत का यह प्रयास जम्मू-कश्मीर के डेमोग्राफिक ढांचे को बदलने और कश्मीरी लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है। मुस्लिम देशों के इस संगठन ने परिसीमन की प्रक्रिया को चौथे जेनेवा कन्वेंशन, यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव एवं अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम इस बात से निराश हैं कि ओआईसी सचिवालय ने एक बार फिर भारत के आंतरिक मामलों पर अनुचित टिप्पणी की है। जम्मू-कश्मीर, भारत का अभिन्न व अविभाज्य हिस्सा है। 

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राजनीतिक एवं सुरक्षा मामलों के जानकार ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) का कहना है कि पाकिस्तान व तुर्की के कहने पर ओआईसी कोई भी बयान जारी कर देता है। जम्मू-कश्मीर में दो नेताओं पर भी पाकिस्तान के 'ग्लोबल इस्लामोफोबिया' फ्लॉप शो का असर देखने को मिल रहा है। ये दोनों नेता अब 'हुर्रियत' का नकाब ओढ़ने में जुटे हैं। जम्मू-कश्मीर में आज 'ओआईसी' की तर्ज पर ही 'महबूबा व अब्दुल्ला' अपनी राजनीति आगे बढ़ा रहे हैं।  
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दूसरों के इशारे पर सांप्रदायिक एजेंडा फैलाने से परहेज करे ओआईसी  
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर ओआईसी की टिप्पणी कोई नई बात नहीं है। वह पहले भी ऐसा कर चुका है। इस संगठन ने कई बार भारत विरोधी बयानबाजी की है। मार्च में ओआईसी की इस्लामाबाद में हुई विदेश मंत्री स्तरीय बैठक में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष को बुलाया गया था। भारत ने इस बाबत कड़ी आपत्ति जाहिर की थी। कुछ दिन बाद ओआईसी ने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगा दिया। इस संगठन ने एक प्रस्ताव पास कर कहा था कि जब तक कश्मीर मसला हल नहीं हो जाता, तब तक यहां पर स्थायी शांति स्थापित नहीं हो सकती।
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भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओआईसी ने भारत के आंतरिक मामलों पर अनुचित टिप्पणी की है। इस संगठन को किसी एक देश के इशारे पर अपना सांप्रदायिक एजेंडा आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। इतना ही नहीं, दो माह पहले पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'इंटरनेशनल डे टू कॉम्बैट इस्लामोफोबिया' मतलब इस्लामो फोबिया विरोधी दिवस मनाने वाला एक प्रस्ताव पारित करा लिया था। यह दिवस 15 मार्च को मनाने की बात कही गई थी। पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम इमरान खान ने इस प्रस्ताव के पास होने पर मुस्लिम जगत को बधाई दी थी। भारत ने इस प्रस्ताव का यह कहकर विरोध किया था कि धर्मों को लेकर अलग-अलग तरह से डर का मौहाल बनाया जा रहा है। यह प्रस्ताव हिंदू, सिख और बौद्ध जैसे अन्य धर्मों के खिलाफ हिंसा, भेदभाव व नफरत को नजरअंदाज करता है। यह प्रस्ताव दूसरे सभी धर्मों के खिलाफ घृणा और हिंसा की गंभीरता को दबा सकता है।
 
'महबूबा व अब्दुल्ला' पर दिखा 'ग्लोबल इस्लामोफोबिया' का असर  
ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) बताते हैं कि ओआईसी ने उस वक्त कोई स्टेटमेंट जारी नहीं की, जब जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म किया गया था। ओआईसी, पाकिस्तान व तुर्की के इशारे पर चलता रहा है। पाकिस्तान के मन मुताबिक जब ओआईसी, कोई बयान नहीं देता है तो पाक, तुर्की के साथ मिलकर नया मुस्लिम देशों का संगठन खड़ा करने की बात कहने लगता है। वैसे अब ओआईसी पर पाकिस्तान का ज्यादा प्रभाव नहीं रहा।

पड़ोसी मुल्क के खुद के हालात बहुत खराब हैं। पाकिस्तान तो पहले से ही ग्लोबल इस्लामोफोबिया का शिकार है। उसे हर बात में कश्मीर दिखाई पड़ता है। वहां की राजनीति इसी मुद्दे पर आकर टिकती है। जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती, ग्लोबल इस्लामोफोबिया से पीड़ित हैं। महबूबा के हर बयान में पाकिस्तान का नाम आ जाता है। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट से ये नेता परेशान हो उठे हैं। जिन्हें दशकों से जम्मू कश्मीर में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला, आयोग की रिपोर्ट में ऐसे वर्गों को अब उनका हक दिया गया है। इससे न केवल ओआईसी और पाकिस्तान बौखला गया है, बल्कि जम्मू कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्री भी भयभीत हो उठे हैं। 

टारगेट किलिंग के लिए इन दोनों नेताओं को बताया जिम्मेदार 
जम्मू कश्मीर का माहौल बिगाड़ने में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला का हाथ रहा है। ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि जम्मू कश्मीर में हो रही टारगेट किलिंग के लिए ये दोनों नेता जिम्मेदार हैं। महबूबा तो खुले तौर पर पाकिस्तान का समर्थन करती हैं। पाकिस्तान द्वारा जम्मू कश्मीर के शांत माहौल को बिगाड़ने के लिए जो प्रयास किया जाता है, उसे इन नेताओं का समर्थन हासिल रहता है। ये दोनों नेता आज, हुर्रियत का स्थान लेने में जुटे हैं।

बतौर अनिल गुप्ता, दोनों नेताओं में होड़ लगी है कि कौन हुर्रियत को अपनाकर पाकिस्तान की नजरों में वफादार बन जाए। अलगाववादियों की मदद करने वाले ये नेता, खुद को मुस्लिमों का हितैषी बताते हैं। साम्प्रदायिक बयानबाजी करते हैं। अगर जांच एजेंसियां इन नेताओं की जांच करें तो घाटी का माहौल बिगाड़ने में इनकी भूमिका की पोल खुल सकती है। जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट में लोकसभा की पांच सीटों में से दो-दो सीटें जम्मू और कश्मीर संभाग में रखी गई हैं। एक सीट दोनों के लिए साझा रहेगी। केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़ाकर 90 करने का प्रस्ताव है। इनमें 43 सीटें जम्मू और 47 सीटें कश्मीर में रहेंगी। इससे पहले 83 विस सीटों में से 37 जम्मू और 46 सीट कश्मीर में थीं।


परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि क्या ये अब केवल भाजपा का विस्तार बन गया है। हम इसे सिरे से खारिज करते हैं। हम इस पर भरोसा नहीं करते। यह केवल जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से संबंधित है। फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि गुपकार मिल कर लड़ेगा, तभी भाजपा को हरा सकेंगे। 

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