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फारुख और महबूबा के खास रहे डीसी-एसपी नपेंगे, अफसरों की ऐसी छल कपट कहीं नहीं देखी होगी

Thu, 26 Nov 2020 12:23 AM IST
देव कश्यप जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 26 Nov 2020 12:23 AM IST
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Jammu and Kashmir action will be taken on close DC-SP of Farooq Abdullah and Mehbooba Mufti
फारूख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती - फोटो : ANI

जम्मू-कश्मीर में रोशनी एक्ट के तहत नियमों की अवहेलना कर सरकारी जमीनों पर कराए गए कब्जों की जांच के लिए सीबीआई ने जो पांचवां केस दर्ज किया है, उसमें सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के खास रहे डीसी-एसपी, तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी व राजस्व महकमे के बड़े अधिकारी नप सकते हैं।

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जांच एजेंसी की एफआईआर बताती है कि राजनेताओं के प्रभाव में आकर ये अफसर, हाईकोर्ट के समक्ष भी छल कपट करने से बाज नहीं आए। बडगाम के तत्कालीन डीसी ने तो हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद रोशनी एक्ट के जरिए बहुत ही सस्ते दामों पर अलॉट की गई जमीनों का रिकॉर्ड नहीं दिया। हाईकोर्ट ने 10 दिसंबर 2014 को जम्मू डेवेलपमेंट अथॉरिटी और आईजी पुलिस को कहा था कि वे रोशनी एक्ट के अंतर्गत दी गई जमीन की निशानदेही कराएं। इस आदेश के तीन साल बाद तक इन दोनों अधिकारियों ने कुछ नहीं किया। जब तीन साल बाद 13 सितंबर 2017 को हाईकोर्ट ने जम्मू डेवेलपमेंट अथॉरिटी 'जेडीए' के उपाध्यक्ष को तलब किया तो इन्होंने छल कपट का एक नया पुलिंदा अदालत के समक्ष पेश कर दिया।
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सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में लिखा है कि जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 2014 में जम्मू डेवेलपमेंट अथॉरिटी के उपाध्यक्ष को जमीन की निशानदेही करने के लिए कहा था। वर्ष 2017 तक कुछ नहीं हुआ। इसके बाद 19 जुलाई 2017 को हाईकोर्ट ने जेडीए उपाध्यक्ष से कहा कि वे इस मामले में कार्रवाई करें।जम्मू के आईजी पुलिस से कहा गया कि वे उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएं। जिला उपायुक्तों ने यह कह कर इस मामले से किनारा करने का प्रयास किया कि उनके पास तो स्टाफ ही नहीं है।
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इस पर हाईकोर्ट ने कहा, जेडीए उपाध्यक्ष मैन पावर उपलब्ध कराएं। चूंकि ये निशानदेही जेडीए की जमीन पर होनी थी, इसलिए राजस्व रिकॉर्ड जेडीए को उपलब्ध कराना था। चार अगस्त 2017 को दोबारा से इस मामले में हाईकोर्ट ने नया आदेश जारी कर दिया। कहा गया कि रिकॉर्ड मिलने के दो सप्ताह के भीतर निशानदेही का काम पूरा कर लिया जाए। आईजी पुलिस से कहा, वे सुरक्षा प्रदान करें। 13 सितंबर को हाईकोर्ट में उस वक्त हैरानी वाली स्थिति बन गई, जब जेडीए उपाध्यक्ष ने छल कपट से भरी एक शिकायत अदालत में पेश कर दी।

उपाध्यक्ष ने कहा, अभी तक निशानदेही का काम नहीं हो सका है। अदालत ने कहा, आपने तीन साल बाद यह बात कही है। इसकी क्या वजह है। जेडीए उपाध्यक्ष का जवाब था कि राजस्व महकमे ने रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं कराया। जब पुलिस से सुरक्षा मांगी गई तो वह भी नहीं मिली। आठ दिसंबर 2017 को हाईकोर्ट ने जम्मू संभाग के जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश देकर इस मामले में कार्रवाई करने के लिए कहा।

इस केस में स्टेट विजिलेंस ने कहा, अफसरों ने सारे नियम ताक पर रखकर रोशनी एक्ट के जरिए बहुत ही मामूली दामों पर जमीन की अलॉटमेंट की है। जमीन के मार्केट रेट की पड़ताल नहीं की गई। जमीन कैसी है, यानी वह बंजर है, मैदानी है, लुबरू या कृषि क्षेत्र वाली है, इसका सर्वे ही नहीं किया गया। सारी जमीन को एक जैसी मानकर उसे अलॉट कर दिया गया।इतना कुछ हो गया, मगर डीसी शांत बने रहे।


बडगाम में करेवा दामोदर गांव में खसरा नंबर 540 की 40 कनाल और दस मरला जमीन रोशनी एक्ट के जरिए पांच लोगों को अलॉट कर दी गई। मार्केट रेट 13 लाख रुपये था, जबकि प्रशासन ने पांच लाख रुपये के भाव पर वह जमीन दे दी। जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) बताते हैं कि राजनेता और नौकरशाह इस मामले में नपेंगे। अफसरों ने राजनेताओं के संरक्षण में करोड़ों रुपये की जमीनों को सस्ते दामों पर और तय नियमों का उल्लंघन कर अलॉट कर दिया। सीबीआई जांच के बाद उन अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होने की उम्मीद है, जिन्होंने राजनेताओं का साथ देकर जम्मू कश्मीर सरकार को हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है।

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