फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Jamiat Ulema-e-Hind in favour of modern education support for separate schools for girls and boys

Muslim Education: आधुनिक शिक्षा के पक्ष में जमीयत उलेमा-ए-हिंद, लड़कियों-लड़कों के लिए अलग स्कूलों का समर्थन

Fri, 01 Dec 2023 06:03 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 01 Dec 2023 06:03 AM IST
सार

संगठन के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश को डॉक्टरों, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की उसी तरह जरूरत है जैसे विद्वानों की। हालांकि, उन्होंने कहा कि जमीयत धार्मिक शिक्षा को अनिवार्य मानती है।

विज्ञापन
Jamiat Ulema-e-Hind in favour of modern education support for separate schools for girls and boys
Jamait ulema e Hind Maulana Arshad Madni - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने जोर देकर कहा कि वह धार्मिक ज्ञान प्रदान करने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा के पक्ष में है। साथ ही उसने मुस्लिम लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों की वकालत भी दोहराई। मदनी जमीयत की दिल्ली इकाई के जिला अध्यक्षों, आयोजकों और केंद्रीय सदस्यों के एक दिवसीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
विज्ञापन


जमीयत धार्मिक शिक्षा को अनिवार्य मानती है
संगठन के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश को डॉक्टरों, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की उसी तरह जरूरत है जैसे विद्वानों की। हालांकि, उन्होंने कहा कि जमीयत धार्मिक शिक्षा को अनिवार्य मानती है। हमारे पूर्वज समसामयिक विज्ञान के खिलाफ नहीं थे, हालांकि वे सभी इस्लामी विज्ञान के विद्वान और विशेषज्ञ थे। मदनी ने कहा, देश की आजादी के लिए उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लंबा संघर्ष किया और अपने जीवन और धन का बलिदान दिया, लेकिन सच्चाई यह है कि वे अंग्रेजी शिक्षा के खिलाफ नहीं थे। मदनी ने इस्राइल-हमास संघर्ष के बारे में बात करते हुए, मदनी ने इस्राइल की आलोचना की और इसे अत्याचारी और हड़पने वाला बताया। उन्होंने फिलिस्तीन के लोगों के प्रति समर्थन जताया। 
विज्ञापन


हम शादी-समारोहों में लाखों खर्च करते हैं पर स्कूल-कॉलेजों के बारे में नहीं सोचते
मदनी ने चिंता जताई कि दक्षिण भारत के मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा उत्तर के मुसलमानों की तुलना में अधिक है। हम शादी और अन्य समारोहों पर लाखों रुपये खर्च करते हैं लेकिन स्कूल और कॉलेज स्थापित करने के बारे में नहीं सोचते। मदनी ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद शासकों की तय नीति के तहत मुसलमानों को शैक्षिक और आर्थिक क्षेत्रों से बाहर रखा गया। इसलिए, अब मुसलमानों के लिए अपने बच्चों को किसी भी कीमत पर शिक्षित करने का समय आ गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed