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Hindi News ›   India News ›   Jamiat Ulama I Hind moves to Supreme Court against action of razing buildings of accused of communal crimes news in Hindi

विवाद: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, आपराधिक मामलों में बुलडोजर से घर ढहाने का मामला

Mon, 18 Apr 2022 03:57 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 18 Apr 2022 03:57 PM IST
सार

जमीयत ने अपनी याचिका में यह निर्देश दिए जाने की मांग भी की है कि आपराधिक अदालत के निर्णय तक मंत्री, विधायक और आपराधिक जांच से असंबद्ध कोई भी व्यक्ति किसी को जिम्मेदार ठहराने संबंधी बात न कहे।

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Jamiat Ulama I Hind moves to Supreme Court against action of razing buildings of accused of communal crimes news in Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : unsplash

विस्तार

आपराधिक मामलों में आरोपियों के मकान ढहाए जाने की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। मुस्लिम संगठन ने याचिका में केंद्र और मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों को यह निर्देश देने की मांग की है कि आपराधिक कार्यवाही में मकानों को ढहाने जैसा कदम न उठाया जाए। 

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यह याचिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में राम नवमी के अवसर पर हुए दंगों के आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश में अधिकारियों ने बुलडोजर से संपत्तियां ढहाने की कार्रवाई की थी। जमीयत ने अपनी याचिका में कहा है कि आपराधिक कार्यवाही में घर ढहाना आपराधिक कानून के अनुसार नहीं है।
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याचिकाकर्ता ने यह घोषित करने की मांग भी की है कि आवासीय इमारतों या व्यावसायिक संपत्ति को दंडात्मक उपाय के रूप में ध्वस्त नहीं किया जा सकता है। पुलिस कर्मियों को सांप्रदायिक दंगों और इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाए जहां आबादी अशांत हो जाती है।
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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सचिव गुलजार अहमद नूर मोहम्मद आजमी की ओर से दाखिल इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि सजा के तौर पर उन्हें सुनवाई का मौका दिए बिना दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। कई मंत्री और विधायकों ने समाज के एक निश्चित वर्ग के अपराध के बारे में बयान दिए हैं।

मध्यप्रदेश की तरह ही उत्तर प्रदेश और गुजरात में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए याचिका में कहा गया है कि उन्होंने हमारे देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। इसमें अदालतों की महत्वपूर्ण भूमिका भी शामिल है। इन कदमों से मुकदमों और उनसे पूर्व की स्थिति प्रभावित हुई है।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी लिखा था पत्र
सुप्रीम कोर्ट का रुख करने से पहले संगठन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस संबंध में एक पत्र लिखा था। इस पत्र में कहा गया था कि खरगोन में मुसलमानों के घरों व अन्य संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। मामले में शाह से दखल देने की मांग की गई थी।

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