राज्यसभा: 'आपको होमवर्क करके आना चाहिए'; जगदीप धनखड़ ने आखिर क्यों केसी वेणुगोपाल को दी ये सलाह?
ये तब हुआ जब राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल को लेकर बहस चल रही थी। इस दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने नई संसद के उद्घाटन में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की अनुपस्थिति का ज़िक्र किया गया। जिसपर सभापति जगदीप धनखड़ भड़क गए।
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इस दिनों संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल को लेकर सदन में खूब गहमा-गहमी हो रही है। इस बिल पर लोकसभा में चर्चा के बाद गुरुवार को राज्यसभा में इस पर बहस हुई। इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल को डांट लगा दी। उन्होंने केसी वेणुगोपाल से कहा कि आपको अपना होमवर्क करके आना चाहिए।
दरअसल, ये तब हुआ जब राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल को लेकर बहस चल रही थी। इस दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने नई संसद के उद्घाटन में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की अनुपस्थिति का ज़िक्र किया गया। जिसपर सभापति जगदीप धनखड़ भड़क गए। उन्होंने वेणुगोपाल को टोंकते हुए कहा कि कोई संवैधानिक उल्लंघन नहीं हुआ है, आपको अपना होमवर्क करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, 'हम कमियों पर समझौता नहीं कर सकते। हम दूसरों की अज्ञानता का व्यापार नहीं कर सकते। मैं यह स्पष्ट कर दूं कि उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति को देश में सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। कोई संवैधानिक उल्लंघन नहीं हुआ है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति अथवा चेयरमैन का पद अपेक्षानुसार उनके स्तर का ही रखना होगा और वही किया गया। पिछले तीन दिनों में भी आपने यही देखा है। प्रमुख विपक्षी दल के सदस्य के रूप में मैं आपसे अपील करूंगा कि आप अपना होमवर्क अवश्य करें। पता लगाएं।'
#WATCH | Rajya Sabha | On statement by Congress MP KC Venugopal that "it is an insult that the President and Vice President were not present at the inauguration of the New Parliament", Rajya Sabha Chairman Jagdeep Dhankhar says, "We cannot trade on deficiencies. We can't trade… pic.twitter.com/NdB28K86T9
— ANI (@ANI) September 21, 2023
उपराष्ट्रपति इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, टजब आप राष्ट्रपति को बीच में लाते हैं तो इससे अच्छा संदेश नहीं जाता। संविधान पढ़ें तो आप पाएंगे कि भूमिका स्पष्ट रूप से परिभाषित की गई है। राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सत्र को संबोधित करेंगे, यही संविधान में मूल निर्देश था। राष्ट्रपति को संविधान के अनुरूप कार्य करना होगा।