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कोरोना वैक्सीन: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हर टीके का नफा-नुकसान होता है, यह सदियों पुराना विवाद
Mon, 04 Apr 2022 10:02 PM IST
अभिषेक दीक्षित
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 04 Apr 2022 10:02 PM IST
सार
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि यह सर्कुलर राज्य को जारी करना चाहिए था न कि निगम को। इस पर पीठ ने कहा कि आप राज्य से इसकी शिकायत कीजिए।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि हर वैक्सीन का नफा नुकसान होता है और यह एक सदियों पुराना विवाद है। हमें टीके के लाभ को देखना चाहिए। शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी करते हुए अहमदाबाद नगर निगम द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश के लिए कोविड टीके की अनिवार्यता संबंधी आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने अहमदाबाद नगर निगम द्वारा इस संबंध में जारी सर्कुलर को बरकरार रखने के गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एक विशेष अनुमति याचिका(एसएलपी) को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि आखिरकार नगर आयुक्त शहर के भीतर सार्वजनिक स्थानों के प्रभारी हैं। उन्हें निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं बनता।
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निगम द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया था कि निगम ने एक वृहत टीकाकरण अभियान शुरू किया है और कुछ सार्वजनिक स्थानों (जोनल कार्यालय, चिड़ियाघर, साबरमती रिवरफ्रंट, स्विमिंग पूल, पुस्तकालय, खेल परिसर आदि) में प्रवेश कोविड टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने पर ही होगी। इस सर्कुलर को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन याचिका खारिज हो गई। जिसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
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सुनवाई की शुरुआत में अहमदाबाद के निवासियों (याचिकाकर्ताओं) की ओर से पेश वकील एम कोतवाल ने जस्टिस चंद्रचूड़ की पीठ से कहा कि नगर आयुक्त को इस तरह का आदेश जारी करने का कोई अधिकार नहीं था। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप पहिया में स्पोक क्यों डाल रहे हैं। आप खुद टीका क्यों नहीं लगवाते? जवाब में वकील ने कहा कि टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभाव हैं।
इस पर पीठ ने कहा कि हर टीकाकरण का नफा नुकसान होता है और यह एक सदियों पुराना विवाद है। समुदाय को होने वाले लाभ को देखें। इस विशेष समय में, आपके मुवक्किल को उस लाभ को देखना चाहिए जो व्यापक समुदाय को मिल रहा है। यह कहते हुए पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि यह सर्कुलर राज्य को जारी करना चाहिए था न कि निगम को। इस पर पीठ ने कहा कि आप राज्य से इसकी शिकायत कीजिए।