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देश की आंतरिक सुरक्षा के दायित्वों में अपनी भूमिका जारी रखना चाहती है आईटीबीपी

Wed, 23 Dec 2020 07:05 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 23 Dec 2020 07:05 PM IST
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ITBP seeks continuation of role in internal security duties
आईटीबीपी के जवान - फोटो : पीटीआई (फाइल)

भारत और चीन की सीमा एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर पहरेदारी करने वाली आईटीबीपी यानी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने सरकार से मांग की है कि उसके सैनिकों की आंतरिक सुरक्षा के कार्यों में तैनाती जारी रहे। सूत्रों के अनुसार आईटीबीपी ने कहा कि ऐसा होने पर उसके जवानों को एक अच्छा ब्रेक मिल जाएगा, जो बहुत ऊंचाई वाले और ठंडे स्थानों पर तैनात रहते हैं, यह उनके स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर होगा। सुरक्षा बल ने अपनी इस चिंता को हाल ही में गृह मामलों पर संसदीय स्थायी समिति के सामने और गृह मंत्रालय के समक्ष भी रखा था।

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दरअसल केंद्र सीमा सुरक्षा बलों को देश के भीतर सुरक्षा ड्यूटी से धीरे-धीरे हटाने के ‘महत्वाकांक्षी’ प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि आईटीबीपी ने सांसदों को सूचित किया है कि चूंकि उसकी जिम्मेदारी ऊंचाई पर स्थित तथा मौसम संबंधी बेहद विषम परिस्थितियों वाले स्थलों पर मोर्चों को संभालने की है इसलिए बल चाहता है कि उसे देशभर में आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी में भी निरंतर शामिल रखा जाए ताकि सुरक्षा बल के जवानों की ड्यूटी ‘एलएसी पर कठिन हालात वाले स्थलों और मैदानी इलाकों’ में बारी-बारी से लगाई जा सके।
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60:40 के अनुपात में तैनाती जारी रखने की मांग
एक अधिकारी ने बताया, ‘बल ने 60:40 के अनुपात में तैनाती जारी रखने की मांग की है जिसमें से 60 फीसदी तैनाती एलएसी पर होती है जिसका अधिकांश हिस्सा ऊंचाई पर, पर्वतों पर स्थित है। इस व्यवस्था से उन जवानों की तैनाती में बदलाव संभव हो पाता है जो बहुत ही विषम हालात में, मोर्चे पर डटे होते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आईटीबीपी के जवानों को सर्द मौसम के कारण कई रोगों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए उन्हें इन क्षेत्रों से कुछ समय दूर रहने की और थोड़ी राहत की जरूरत होती है।’
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लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3,488 किमी लंबी एलएसी के पश्चिमी, मध्य एवं पूर्वी सेक्टर में आईटीबीपी की ज्यादातर चौकियां 9,000 फीट से लेकर 18,700 फीट तक की ऊंचाई पर स्थित है। सरकार ने सीमाओं पर सुरक्षा को और मजबूत करने के लिहाज से सीमा की सुरक्षा में तैनात बल बीएसएफ, सशस्त्र सीमा बल और आईटीबीपी की भूमिका अंतरिक सुरक्षा ड्यूटी में कम करने पर विचार करना शुरू किया है।


इस प्रस्ताव के मुताबिक गृह मंत्रालय कथित तौर पर एक ‘मॉडल’ पर काम कर रहा है जिसमें चुनाव कराने समेत आंतरिक सुरक्षा की ज्यादातर जिम्मेदारी देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ की होगी। हर साल सीमा की सुरक्षा में तैनात इन बलों के जवानों को मोर्चो से हटाकर आंतरिक सुरक्षा में लगाया जाता है जिसका दुष्प्रभाव भी एक रिपोर्ट में सामने आया है। बीएसएफ के उप महानिरीक्षक (खुफिया) एस.एस. गुलेरिया की रिपोर्ट ‘‘मानव तस्करी और सीमा सुरक्षा’’ के मुताबिक ‘‘अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों की कम संख्या और आंतरिक सुरक्षा कामों के लिए उन्हें सीमा से हटाने का सीमा के प्रबंधन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।’’

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