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आसान नहीं होगा बेनामी संपत्ति कानून के तहत संपत्ति जब्त करना
राजीव कुमार/नई दिल्ली
Updated Wed, 28 Dec 2016 03:54 AM IST
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काले धन व भ्रष्टाचार पर लगाम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोटबंदी के बाद अपने अगले कदम में बेनामी प्रॉपर्टी के खिलाफ कार्रवाई का संकेत दे चुके हैं, लेकिन विशेषज्ञ कार्रवाई को मुश्किल काम बता रहे हैं।
कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रॉपर्टी रखना सामान्य संवैधानिक अधिकार है और प्रॉपर्टी को जब्त करने से पहले लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा, जो इतना आसान नहीं दिखता। वित्त विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी को पकड़ लेने से कार्रवाई नहीं हो जाएगी। उसे अपने वित्तीय साधनों का ब्योरा देने के लिए पूरा समय मिलेगा।
उनका यह भी कहना है कि प्रॉपर्टी का मामला राज्य का है और राज्य के सहयोग के बिना यह संभव नहीं दिखता। रियल एस्टेट क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक, हाउसिंग से लेकर कमर्शियल व खेती की जमीन, सभी जगहों पर बेनामी प्रॉपर्टी हैं। उन सबकी तहकीकात करना काफी जद्दोजहद का काम होगा।
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पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट हिमांशु कुमार ने बताया कि सरकार को बेनामी संपत्ति की पहचान करने में दिक्कत नहीं आएगी क्योंकि कई ऐसे सॉफ्टवेयर प्रोग्राम हैं, जिनकी मदद से बेनामी संपत्ति पकड़ में आ जाएगी। लेकिन बेनामी संपत्ति रखने वालों को आय का स्त्रोत बताने व उसकी संपत्ति बेनामी नहीं है, यह साबित करने का पूरा मौका दिया जाएगा। इसके बाद कार्रवाई आसान नहीं रह जाती है।
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कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रॉपर्टी रखना सामान्य संवैधानिक अधिकार है और प्रॉपर्टी को जब्त करने से पहले लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा, जो इतना आसान नहीं दिखता। वित्त विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी को पकड़ लेने से कार्रवाई नहीं हो जाएगी। उसे अपने वित्तीय साधनों का ब्योरा देने के लिए पूरा समय मिलेगा।
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उनका यह भी कहना है कि प्रॉपर्टी का मामला राज्य का है और राज्य के सहयोग के बिना यह संभव नहीं दिखता। रियल एस्टेट क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक, हाउसिंग से लेकर कमर्शियल व खेती की जमीन, सभी जगहों पर बेनामी प्रॉपर्टी हैं। उन सबकी तहकीकात करना काफी जद्दोजहद का काम होगा।
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पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट हिमांशु कुमार ने बताया कि सरकार को बेनामी संपत्ति की पहचान करने में दिक्कत नहीं आएगी क्योंकि कई ऐसे सॉफ्टवेयर प्रोग्राम हैं, जिनकी मदद से बेनामी संपत्ति पकड़ में आ जाएगी। लेकिन बेनामी संपत्ति रखने वालों को आय का स्त्रोत बताने व उसकी संपत्ति बेनामी नहीं है, यह साबित करने का पूरा मौका दिया जाएगा। इसके बाद कार्रवाई आसान नहीं रह जाती है।
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अपराध नहीं है प्रॉपर्टी खरीदना
प्रापर्टी टैक्स
सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता सुबोध कुमार पाठक ने बताया कि जनता पार्टी की सरकार के काल में प्रॉपर्टी के अधिकार को मौलिक अधिकार से निकाल कर संविधान के अनुच्छेद 300ए में डाल दिया गया था। इसका मतलब यह हुआ कि प्रॉपर्टी रखने का अधिकार हमारे संविधान में है।
पाठक कहते हैं कि प्रॉपर्टी की खरीदारी कोई अपराध नहीं है। सरकार को यह साबित करना होगा कि जिस आय से प्रॉपर्टी खरीदी गई है, वह गैरकानूनी तरीके से कमाई गई है। ऐसे में प्रथम दृष्टया में किसी की संपत्ति बेनामी दिखती भी है तो बेनामी संपत्ति रखने वाला उस मामले को अदालत में ले जाएगा जो एक लंबी प्रक्रिया होगी।
कठिन होगा बेनामी साबित करना
नरेडको के चेयरमैन प्रवीण जैन ने बताया कि सरकार ने सोचा है तो सरकार उपाय करेगी, लेकिन बेनामी संपत्ति को जब्त कर लेना काफी मुश्किल काम होगा। अगर बेनामी संपत्ति रखने वाला टैक्स देता है तो उस संपत्ति के बेनामी होने के बावजूद बेनामी साबित करना कठिन होगा।
क्या होती है बेनामी संपत्ति
अगर कोई व्यक्ति अपना पैसा लगाकर किसी ऐसे शख्स के नाम से प्रॉपर्टी खरीदता है, जो उस प्रॉपर्टी को खरीदने के लायक नहीं कमाता है या उसके पास उस प्रॉपर्टी की खरीदारी के लायक वैधानिक पूंजी नहीं है, तो ऐसी प्रॉपर्टी बेनामी संपत्ति कहलाती है।
पाठक कहते हैं कि प्रॉपर्टी की खरीदारी कोई अपराध नहीं है। सरकार को यह साबित करना होगा कि जिस आय से प्रॉपर्टी खरीदी गई है, वह गैरकानूनी तरीके से कमाई गई है। ऐसे में प्रथम दृष्टया में किसी की संपत्ति बेनामी दिखती भी है तो बेनामी संपत्ति रखने वाला उस मामले को अदालत में ले जाएगा जो एक लंबी प्रक्रिया होगी।
कठिन होगा बेनामी साबित करना
नरेडको के चेयरमैन प्रवीण जैन ने बताया कि सरकार ने सोचा है तो सरकार उपाय करेगी, लेकिन बेनामी संपत्ति को जब्त कर लेना काफी मुश्किल काम होगा। अगर बेनामी संपत्ति रखने वाला टैक्स देता है तो उस संपत्ति के बेनामी होने के बावजूद बेनामी साबित करना कठिन होगा।
क्या होती है बेनामी संपत्ति
अगर कोई व्यक्ति अपना पैसा लगाकर किसी ऐसे शख्स के नाम से प्रॉपर्टी खरीदता है, जो उस प्रॉपर्टी को खरीदने के लायक नहीं कमाता है या उसके पास उस प्रॉपर्टी की खरीदारी के लायक वैधानिक पूंजी नहीं है, तो ऐसी प्रॉपर्टी बेनामी संपत्ति कहलाती है।