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NLEM: आवश्यक दवाओं की सूची पर सरकार ने साफ की स्थिति, कहा- साइड इफेक्ट की वजह से नहीं हटाई गईं दवाएं

Sat, 17 Sep 2022 11:13 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 17 Sep 2022 11:13 PM IST
सार

डॉ वाई के गुप्ता ने कहा कि चूंकि हमारे पास इस सूची से हटाई गई दवाओं के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं, इसलिए हमने इन दवाओं को हटाया है। ऐसे में इन दवाओं को लेकर यह कहना कि इन दवाओं को कैंसर की चिंता या साइड इफेक्ट के कारण हटाया गया है, एक गलत बयान है।
 

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It misleading to say drugs dropped from NLEM due to side-effects like cancer
दवाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार जनता को आसानी से और कम कीमत वाली दवाएं मुहैया कराने पर जोर दे रहा है। इसी क्रम में हाल ही में केंद्रिया स्वास्थ्य मंत्रालय ने आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) जारी की थी। इस सूची में इस सूची में अब 384 दवाएं शामिल हो गई हैं। वहीं 26 दवाओं को इस राष्ट्रीय सूची से हटा दिया गया है। हटाई गई आवश्यक दवाओं में एंटासिड रैनिटिडिन, एटेनोलोल, एरिथ्रोमाइसिन, रैनिटिडिन, सुक्रालफेट, व्हाइट पेट्रोलेटम, एटेनोलोल और मेथिल्डोपा आदि शामिल हैं। जिसके बाद इन दवाओं को लेकर सवाल उठने लगे थे कि इन दवाओं को किसी साइड इफेक्ट या कैंसर की चिंताओं के कारण इस सूची से हटाया गया था। जिसके बाद दवाओं पर स्थायी राष्ट्रीय समिति के उपाध्यक्ष डॉ. वाई.के. गुप्ता ने स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि एटेनोलोल एरिथ्रोमाइसिन और रैनिटिडीन जैसी दवाएं जो इस सूची से बाहर की गई हैं, वे चार दशकों से अधिक समय से सुरक्षित और प्रभावशाली है। इन दवाओं में साइड इफेक्ट या कैंसर होने की चिंता जैसी कोई बात नहीं है।

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स्थायी राष्ट्रीय समिति के उपाध्यक्ष डॉ. वाई.के. गुप्ता ने स्थिति की साफ
स्थायी राष्ट्रीय समिति के उपाध्यक्ष डॉ. वाई.के. गुप्ता ने कहा कि इन दवाओं के साथ कोई दुष्प्रभाव या कैंसर की चिंता नहीं है। हाल ही में कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में भी इसके बारे में कहा गया है कि  वे प्रामाणिक, सुरक्षित हैं। उन्होंने आगे कहा कि एनएलईएम में उत्पादों को जोड़ने या हटाने का मानदंड लागत बनाम एमआरपी, जीवन रक्षक गुण, उपयोग आदि जैसे कई मापदंडों पर निर्भर करता है।
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डॉ वाई के गुप्ता ने कहा कि एफडीए द्वारा कुछ चिंताएं की गई हैं, लेकिन इसके बारे में कारण स्पष्ट होना चाहिए और यह अभी तक काफी हद तक साफ नहीं है इसलिए चिंता या घबराहट का कोई कारण नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि चूंकि हमारे पास बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं, इसलिए हमने इसे हटाया है, लेकिन इसे इसलिए हटाया गया है क्योंकि यह कैंसर का कारण बन सकता है, एक गलत बयान है। डॉ गुप्ता ने आगे कहा कि भारत में कंपनी द्वारा नाइट्रोसोडिमिथाइलमाइन (एनडीएमए) की स्वीकार्य सीमा के साथ इसकी बिक्री की अनुमति है। ऐसे में यह धारणा नहीं होनी चाहिए कि दवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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बीते मंगलवार को जारी हुई थी सूची
गौरतलब है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बीते मंगलवार को ताजा आवश्यक दवाओं की सूची जारी की थीा। मंडाविया ने ट्वीट किया था, 'आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची 2022 जारी की। इसमें 27 कैटगरी में 384 दवाएं शामिल हैं। कई एंटीबायोटिक्स, टीके, कैंसर रोधी दवाएं और कई अन्य आवश्यक दवाएं सस्ती हो जाएंगी और मरीजों के जेब खर्च को कम करेंगी।' 


इस सूची में फ्लूड्रोकोरटिसोन, ऑरमेलॉक्सीफेन, इन्सुलिन ग्लेरजीन और टेनेलाइटिन जैसी अंत:स्त्रावी और गर्भनिरोधक दवाओं को भी जोड़ा गया था। इसके अलावा मॉन्टेलुकास्ट (श्वसन पथ के लिए दवा) और लैटानोप्रोस्ट (नेत्र रोग संबंधी दवा) का नाम भी सूची में शामिल किया गया है। इसके अलवाा कार्डियोवैस्कुलर, डबीगट्रान और टेनेक्टेप्लेस को भी सूची में जगह दी गई थी।

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