शिक्षण संस्थानों में तेजाब पीड़िताओं को मिलने वाले आरक्षण की जानकारी देना अनिवार्य
संस्थानों द्वारा जानकारी न देने के कारण तेजाब पीड़िताएं इसका लाभ नहीं ले पा रही हैं। इसीलिए सभी संस्थानों और राज्यों को दोबारा कहा गया है। दाखिला आवेदन पत्र में दिव्यांगजन श्रेणी में तेजाब पीड़िताओं के आरक्षण कॉलम को विशेष रूप से उल्लेखित करना अनिवार्य है।
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देश के सभी कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने आवेदन पत्र में तेजाब पीड़िताओं के आरक्षण की जानकारी देनी अनिवार्य होगी। यदि कोई संस्थान नियमों में कोताही या फिर दाखिला देने से इंकार करता है तो उसके खिलाफ दिव्यांगजन कानून के तहत कार्रवाई का भी प्रावधान है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से सर्कुलर जारी कर यह आदेश दिया गया है।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2018 को जनवरी 2018 में लागू किया था। इसमें दिव्यांगजनों की नई श्रेणियां शामिल की गई थीं। इनमें एक श्रेणी तेजाब पीड़िताओं की भी थी। दाखिले में कुल सीटों में पांच फीसदी दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित हैं। इसमें तेजाब पीड़िताओं को प्रति प्रोग्राम एक सीट आरक्षित की गई है।
शिक्षण संस्थान अपने दाखिला आवेदन पत्र में इसका उल्लेख नहीं कर रहे हैं। कानूनन तेजाब पीड़िताओं को आरक्षण की जानकारी का उल्लेख करना अनिवार्य किया गया था। संस्थानों द्वारा जानकारी न देने के कारण तेजाब पीड़िताएं इसका लाभ नहीं ले पा रही हैं। इसीलिए सभी संस्थानों और राज्यों को दोबारा कहा गया है। दाखिला आवेदन पत्र में दिव्यांगजन श्रेणी में तेजाब पीड़िताओं के आरक्षण कॉलम को विशेष रूप से उल्लेखित करना अनिवार्य है।
कैंपस में दाखिला हेल्प डेस्क पर देनी होगी जानकारी
सरकार के पिछले निर्देशों के तहत शिक्षण संस्थानों को अपने दाखिला हेल्प डेस्क पर तेजाब पीड़िताओं के लिए अलग से उल्लेख करना अनिवार्य हैं। ताकि आम छात्र ऐसी पीड़िताओं तक यह जानकारी पहुंचा सकें। इसके अलावा यदि पीड़िताओं की संख्या ज्यादा होती है तो फिर सीटों की संख्या एक फीसदी तक बढ़ाने का भी प्रावधान है।
आरक्षण से पीड़िताओं को आगे बढ़ने में मिलेगी मदद
शिक्षा में तेजाब पीड़िताओं को दाखिले में आरक्षण मिलने से उन्हें जीवन में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। एसिड अटैक के बाद पीड़िताओं का जीवन अंधेरे में डूब जाता है। वे निराश होकर जीवन की चाह छोड़ देती हैं। हालांकि ऐसी पीड़िताओं को शिक्षा से जोड़कर ही आगे बढ़ाया जा सकता है। इस नियम को प्रभावी तरीके से लागू करने पर यह पीड़िताएं आम लड़कियों की तरह आगे बढ़ पाएंगी।
- लक्ष्मी, तेजाब पीड़िता