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जासूसी की भेंट चढ़ा दिए गए थे इसरो के नांबी, 24 साल बाद हुए बेदाग और अब पद्म भूषण, जानें पूरी कहानी

Sun, 27 Jan 2019 11:24 PM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
निलेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Sun, 27 Jan 2019 11:24 PM IST
सार

  • इसरो के पूर्व वैज्ञानिक एस. नांबी नारायणन को मिलेगा पद्म भूषण
  • साल 1994 में लगा था पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप
  • सीबीआई ने जांच में मामले को फर्जी, आरोपों को झूठ पाया था
  • 14 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट से बेदाग साबित हुए थे नांबी

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Isro Scientist Nambi narayanan is now awarded Padma Bhushan, know all about him
नांबी नारायणन को पद्म भूषण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत रत्न के साथ ही भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की भी घोषणा की। देश के कई महान विभूतियों के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र यानि कि इसरो के पूर्व वैज्ञानिक एस. नंबी नारायणन को पद्म भूषण पुरस्कार मिलने जा रहा है। पद्म पुरस्कारों की सूची जारी होने के बाद से ही इन पुरस्कारों पर विवाद शुरू हो गया है। जासूसी का आरोप झेल चुके और खुद को सही साबित करने को लेकर दशकों तक अपनी लड़ाई लड़ चुके नारायणन भी इन आरोपों से अछूते नहीं रहे। 

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नांबी नारायणन को पद्म भूषण दिए जाने पर केरल के पूर्व डीजीपी टीपी सेन कुमार ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन्होंने उन्हें पुरस्कार दिया है, उन्हें ये बताना चाहिए कि नांबी का देश के लिए क्या योगदान है। उन्होंने कहा कि इसरो में क्या हुआ, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने समिति नियुक्त की है। इसका निष्कर्ष निकलने से पहले सरकार उन्हें सम्मान दे सकते हैं?
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इन आरोपों से इतर, नांबी नारायणन ने पद्म भूषण मिलने पर संतोष और हर्ष जताया है। उन्होंने कहा कि आखिरकार भारतीय अंतरिक्ष के क्षेत्र में उनके काम को मान्यता मिल ही गई। उन्होंने कहा कि उनके काम से ज्यादा वह जासूसी के आरोपों से लोग उन्हें जानने लगे थे,  लेकिन अब उन्हें खुशी है कि सरकार ने उनके काम को मान्यता प्रदान की है। 
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आइए जानते हैं, उनपर लगे आरोपों से लेकर उनके बेदाग साबित होने की पूरी कहानी

जिस अहम प्रोजेक्ट के डाइरेक्टर, उसी की जानकारी बेचने का आरोप 

साल 1994 का अक्तूबर महीना चल रहा था। केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम से मालदीव एक महिला को गिरफ्तार किया गया। नाम था— मरियम राशिदा। मरियम को इसरो के स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन की ड्राइंग के बारे में खुफिया जानकारी दुश्मन देश पाकिस्तान को बेचने का आरोप था। स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे नारायणन को भी गिरफ्तार कर लिया गया। वह इस प्रोजेक्ट के डाइरेक्टर थे।


उनके साथ दो और साइंटिस्ट डी. शशिकुमारन और डिप्टी डाइरेक्टर के. चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया। सभी पर दुश्मन देश पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप था। इसके अलावे इस मामले में रुसी स्पेस एजेंसी के एक भारतीय प्रतिनिधि एसके शर्मा, एक लेबर कांट्रैक्टर और राशिदा की सहेली फैजिया इसन को भी गिरफ्तार किया गया था। 

यह मामला कई सालों तक चलता रहा। तब, नांबी खुद पर लगे आरोपों को खारिज करते रहे, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। उनपर आरोप लगाने वाले आईबी के एक अधिकारी ने उनसे कहा था कि वह केवल अपनी ड्यूटी कर रहा है। उन्होंने नारायणन से कहा था कि अगर उसके आरोप झूठे पाए जाएं, तो उन्हें(अधिकारी को) जूते से सिर पर मारा जाए।

सीबीआई ने आरोप गलत पाए, तो जारी हुआ दुबारा जांच का आदेश

दिसंबर 1994 में इस मामले की जांच सरकार ने सीबीआई को सौंप दी। इंटेलिजेंस ब्यूरो(आईबी) और केरल पुलिस ने नारायणन पर जासूसी के आरोप लगाए थे, सीबीआई ने उसे सही मान कर जांच शुरू कर दी। जनवरी 1995 में इसरो के वैज्ञानिक को बेल पर रिहा किया गया, हालांकि मालदीव की राशिदा और उसकी सहेली को राहत नहीं मिली। 

अप्रैल 1996 में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी(सीजेआई) की अदालत में रिपोर्ट सौंपते हुए सीबीआई ने मामले को फर्जी बताया और नारायणन पर लगे आरोपों को गलत बताया। मई 1996 में कोर्ट ने सीबीआई की इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और सभी आरोपियों को रिहा कर दिया। इसके बाद केरल की सीपीएम सरकार ने मामले की फिर से जांच के आदेश दिए। 
 

नांबी ने जारी रखी लड़ाई, सितंबर 2018 में बेदाग साबित हुए

Isro Scientist Nambi narayanan is now awarded Padma Bhushan, know all about him
नांबी नारायणन पर बन रही फिल्म में उनका रोल निभा रहे हैं आर माधवन - फोटो : Twitter @actormaddy
मई 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने दुबारा जांच के इस आदेश को खरिज कर दिया। इधर, देशद्रोह की तरह आरोपों को झेल रहे नारायणन मानसिक तौर पर प्रताड़ित होते रहे। 1999 में उन्होंने मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। साल 2001 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केरल सरकार को क्षतिपूर्ति का आदेश दिया, लेकिन राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती दे दी। 

सितंबर 2012 में हाईकोर्ट ने नारायणन को क्षतिपूर्ति के तौर पर 10 लाख रुपए देने का आदेश राज्य सरकार को दिया। अप्रैल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उन अधिकारियों के खिलाफ सुनवाई शुरू की, जिन्होंने नांबी को झूठे आरोपों में फंसाया था। केरल हाईकोर्ट ने नांबी के इस मामले में सुनवाई के दौरान एक आदेश दिया था कि पूर्व डीजीपी और केरल पुलिस के दो अधिकारियों के खिलाफ किसी कार्रवाई की जरुरत नहीं। 

नारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में केरल हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती दी। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल(2018) 14 सितंबर में साइंटिस्ट नारायणन को 50 लाख का मुआवजा देने का फैसला सुनाया। यह तारीख नांबी के जीवन में सुकून देनेवाली थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में न्यायिक जांच का भी आदेश दिया है। 

नांबी नारायणन के जीवन संघर्ष पर बन रही फिल्म रॉकेट्री

इसरो के इस महान वैज्ञानिक नांबी नारायणन पर बायोपिक बनने जा रही है। रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट नाम से बन रही फिल्म में तनु वेड्स मनु सीरिज फेम आर. माधवन उनकी भूमिका अदा कर रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, यह फिल्म साइंटिस्ट नंबी के जीवन संघर्षों को पर्दे पर दिखाएगी। आर माधवन की यह फिल्म हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलगु और मलयालम में बन रही है।

हाल ही में फिल्म का टीजर रिलीज किया गया। टीजर में आंकड़ों के जरिए ये बताया गया था कि कैसे मंगल मिशन को पूरा करने में अमेरिका की स्पेस संगठन नासा को 19 बार प्रयास करना पड़ा। रूस ने यह मिशन 16 प्रयासों के बाद पूरा किया जबकि भारत ने इन दोनों देशों से आधी कीमत में पहली बार में ही यह मिशन पूरा कर लिया था।
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