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Sikkim Flood: सिक्किम में झील फटने के बाद कैसे मची तबाही, इसरो ने सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों से समझाया
Thu, 05 Oct 2023 04:34 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गंगटोक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गंगटोक
Published by: गुलाम अहमद
Updated Thu, 05 Oct 2023 04:34 AM IST
सार
इसरो ने एक बयान में कहा कि सैटेलाइट से ली गईं तस्वीरों से पता चलता है कि झील फटने के बाद लगभग 105 हेक्टेयर क्षेत्र बह गया है, जिससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई होगी।
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Lhonak lake outburst
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सिक्किम में झील फटने के बाद अचानक आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 पहुंच गई है, जबकि 80 से अधिक लोग लापता बताए गए हैं। सिक्किम सरकार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मरने वालों में सभी नागरिक हैं। तीस्ता बांध में काम कर रहे करीब 14 मजदूर अभी भी सुरंगों में फंसे हैं। बाढ़ के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में 3,000 से अधिक पर्यटकों के फंसे होने की आशंका है। तीस्ता नदी में अचानक बाढ़ आने के कारण ल्होनक झील का लगभग 65 प्रतिशत बह गया है।
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इस बीच, इसरो ने अपने राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर द्वारा सिक्किम में ल्होनक झील के फटने की घटना की उपग्रह द्वारा ली गई तस्वीरें जारी की हैं और इस त्रास्दी को समझाने की कोशिश की है। इसरो ने एक बयान में कहा कि सैटेलाइट से ली गईं तस्वीरों से पता चलता है कि ल्होनक झील फटने के बाद लगभग 105 हेक्टेयर क्षेत्र बह गया है, जिससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई होगी।
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इसरो ने 17 सितंबर, 28 सितंबर (त्रासदी से पहले) और बुधवार सुबह छह बजे ली गई तस्वीरों को साझा किया है और 28 सितंबर को ली गई तस्वीर का चार अक्टूबर की तस्वीर से मिलान किया गया है। 17 सितंबर और 28 सितंबर को ली गई तस्वीरों में झील का क्षेत्रफल क्रमशः 162.7 और 167.4 हेक्टेयर दिखाई देता है। जबकि त्रासदी के बाद की तस्वीर से पता चलता है कि झील का क्षेत्रफल आधे से कम बचा है और अब इसमें केवल लगभग 60.3 हेक्टेयर पानी है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि वह उपग्रह डेटा का उपयोग करके आगे भी झील की निगरानी जारी रखेगी।
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एनडीएमए ने बताया अचानक आई बाढ़ का संभावित कारण
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने कहा है कि सिक्किम में अचानक आई बाढ़ का संभावित कारण भारी बारिश और उत्तरी सिक्किम में साउथ ल्होनक झील में हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (GLOF) घटना का मेल हो सकता है। एनडीएमए ने एक बयान में यह भी कहा कि हिमालय पर्वतमाला में कई हिमनद झीलें (Glacial Lakes) मौजूद हैं। रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से अनुमान लगाया गया है कि हिमालय पर्वतमाला में लगभग 7,500 झीलें हैं और इनमें से सिक्किम में लगभग 10 प्रतिशत हैं, जिनमें से लगभग 25 झीलों को जोखिम के रूप में माना गया है।
बयान में कहा गया है, फिलहाल वैज्ञानिक अचानक आई बाढ़ के सटीक कारण की जांच कर रहे हैं, लेकिन अचानक आई बाढ़ का प्राथमिक कारण अत्यधिक बारिश और उत्तरी सिक्किम में साउथ ल्होनक झील में जीएलओएफ (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) घटना का संभावित संयोजन प्रतीत होता है।
दुनिया की 30 लाख से अधिक आबादी पर हमेशा हिमनद बाढ़ का खतरा
हिमनद क्षेत्रों के पहले वैश्विक मूल्यांकन में पाया गया है कि 30 लाख भारतीय ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (जीएलओएफ) किसी भी समय आ सकती है। दुनियाभर के एक तिहाई लोग इस तरह के जोखिम का सामना कर रहे हैं। विश्वस्तर पर 30 देशों के नौ करोड़ लोग हिमानी झीलों वाले 1,089 बेसिनों में रहते हैं। नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इनमें से 1.5 करोड़ लोग हिमनद झीलों के 50 किमी के दायरे में रहते हैं। इनमें से विश्वस्तर पर गणना की गई आबादी का एक बड़ा हिस्सा, 93 लाख उच्च पर्वतीय एशिया (एचएमए) के क्षेत्र में रहता है।
न्यूकैसल विवि के वैज्ञानिकों ने अध्ययन के आधार पर कहा है कि विश्व स्तर पर लगभग आधी (48 फीसदी) आबादी झीलों के बहाव क्षेत्र में 20 किमी से 35 किमी के बीच स्थित है। जीएलओएफ के संपर्क में आने वाली वैश्विक आबादी का केवल दो प्रतिशत (तीन लाख) लोग एक या अधिक हिमनद झीलों के पांच किमी के दायरे में रहते हैं।